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किताब पढ़ना था बीमारी, आराम था इलाज! महिलाओं की शिक्षा रोकने वाली सोच की कहानी है बड़ी चौंकाने वाली

Published: Sat, 12 Sep 2026 05:56 PM (IST)

महिलाओं की शिक्षा से जुड़ी पुरानी मानसिकता की जड़ें 19 वीं सदी से जुड़ी हुई हैं।

किताबें पढ़ना महिलाओं के लिए माना जाता था बीमारी (Image Source: AI Generated)

किताबें पढ़ना महिलाओं के लिए माना जाता था बीमारी (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज भी समाज में महिलाओं को ऐसे एक ऐसे वर्ग के रूप में देखा जाता है, जिसमें दिमाग कम होता है। यह मानसिकता लोगों में कुछ इस तरह घर कर चुकी है कि इसे उखाड़ फेंकने में अभी भी कई दशक लगेंगे, पर क्या आप इसके पीछे का इतिहास जानते हैं? 

क्या आपको मालूम है कि महिलाओं के पढ़ने-लिखने से जुड़ी यह दकियानूसी मानसिकता की शुरुआत कहां से हुई? चलिए आज आपको इस कहानी के बारे में विस्तार से बताते हैं। 

किताबें पढ़ना महिलाओं के लिए माना जाता था बीमारी 

19 वीं सदी वो समय था जब आज के विकसित कहे जाने वाले ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में महिलाओं को किसी भी बौद्धिक गतिविधि के लिए कमजोर माना जाता था। लोगों का मानना था कि महिलाएं शारीरिक और मानसिक रूप से पढ़ने के लिए कमजोर होती हैं। उनका कहना था कि अगर महिलाएं ऐसा करती हैं तो उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। 

ज्यादा सोचने से नर्वस सिस्टम हो जाएगा डैमेज 

आपको जानकार हैरानी होगी कि उस समय की मेडिकल थ्योरी तो यहां तक दावा करती थी कि औरतों का ज्यादा पढ़ाई-लिखाई करना उनके नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता था। ऐसी धारणा थी कि पढ़ने से नर्वस सिस्टम ज्यादा थकने के साथ ही डैमेज तक हो सकता था। फिर इससे उनकी प्रजनन क्षमता को भी काफी नुकसान पहुंचता था। सरल शब्दों में समझें तो मोटे तौर पर महिलाओं का शिक्षित होना एक बीमारी बना दिया गया था। 

उपन्यासों को पढ़ने पर भी थी रोक 

उस दौर में महिलाओं के उपन्यासों को पढ़ने पर भी रोक थी, यह तर्क देते हुए कि इससे उनकी भावनाएं भड़क जाती हैं और आलस बढ़ता है। इतना ही नहीं, नॉवल्स पढ़ने से उनका दिमाग खराब होता है, यह भी खूब प्रचलित था। 

इलाज के लिए दी गई आराम की सलाह 

पढ़ने से नर्वस सिस्टम की सिर्फ बीमारी के बारे में बताने के साथ ही इसके इलाज का सुझाव भी दिया गया। अमेरिकी चिकित्सक एस. वेअर मिचेल ने महिलाओं को नर्वस डिसऑर्डर ठीक करने के लिए अच्छे से आराम और एकांतवास की सलाह दी थी। इसका सीधा सा मतलब था कि कोई पढ़ाई-लिखाई या बौद्धिक गतिविधि नहीं करनी, केवल आराम करना है। 

इसका संदेश एकदम साफ था कि महिलाओं को शिक्षा से दूर रखना था, इसके लिए मेडिकल साइंस और हेल्थ का झूठा बहाना भी दिया गया।  

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