ठेठ भोजपुरी बोल, बिरहा की धुन और तिरंगे का गौरव! फिल्मी गानों से अलग है पूर्वांचल-बिहार का ये देशभक्ति गीत
बिरहा शैली, जिसे अक्सर विरह से जोड़ा जाता है, का उपयोग देशभक्ति और सामाजिक मुद्दों पर भी हुआ है।

भोजपुरी में देशभक्ति गीतों का अपना अलग अंदाज (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भोजपुरी गीतों में बात जब भी बिरहा शैली की आती है, तो इसे हमेशा विरह और जुदाई से जोड़कर देखा जाता है। जबकि कम लोग जानते हैं कि बिरहा केवल किसी व्यक्ति की भावनाओं से जुड़ा हुआ नहीं है, समय के साथ इसका उपयोग देशभक्ति और सामाजिक मुद्दों से जुड़े गीतों में भी हुआ। आज हम बिरहा के इसी देशभक्ति रूप और उससे जुड़े एक खास गीत की चर्चा करेंगे।
पूर्वांचल से हुई ‘बिरहा’ की शुरुआत
बिरहा के गीतों का इतिहास आज से करीब 180 साल पुराना है, कहते हैं इसकी औपचारिक शुरुआत साल 1837 में बनारस से हुई थी। उस समय एक किसान परिवार से संबंध रखने वाले बिहारी यादव ने बिरहा शैली में लोकगीतों को गाना शुरू किया था।
शुरू-शुरू में रामायण की चौपाइयों और लोककथाओं को भोजपुरी बिरहा शैली में गाया गया। इसके बाद धीरे-धीरे देशभक्ति और समाज सुधार से जुड़े मुद्दे भी इस शैली से जुड़ गए। इसके क्षेत्र विस्तार की बात करें तो बिरहा वाराणसी, आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर और गोरखपुर के साथ बिहार के कुछ हिस्सों की संस्कृति से भी खास संबंध रखता है।
भोजपुरी में देशभक्ति गीतों का अपना अलग अंदाज
इससे पहले हमने भोजपुरी भाषा के ऐतिहासिक गीत ‘बटोहिया’ की बात थी, आज हम ऐसे ही दूसरे लोकप्रिय गीत “तिरंगा लहर-लहर लहराए” की बात करने वाले हैं। हमें लगता है कि भोजपुरी के सारे ही गीत मनोरंजन से जुड़े हैं, जबकि इनका संबंध स्वतंत्रता संग्राम और तिरंगे की शान से भी है। आइए इस गीत के बोल पर जरा नजर डालें:
'तिरंगा लहर-लहर लहराए, भारत माता मन मुस्काए!
पवन बहिया डुलावे, मेघ पनिया पिलावे, पावन देश वाह माँ...
सुगना सगुण बतावे, पंछी गावे गाली…
अरे लहरी लहरी लहराई तिरंगा, अपने देश जान में…
अरे वीर बहादुर जन्म लिए हैं, अपने हिंदुस्तान में!'
इस गीत की पहली लाइन आसानी से समझ में आ रही है कि तिरंगा लहरा रहा है, जिसे देखकर भारत माता मुस्का रही हैं। ‘पवन बहिया डुलावे, मेघ पनिया पिलावे, पावन देश वाह माँ…’ में ठंडी-ठंडी हवा हिलकर और बादल पानी पिलाकर देश की सेवा कर रहे हैं। इसके बाद यहां सुगना यानी पक्षी का जिक्र है, जो गीत गाते हुए शुभ संकेत दे रहे हैं।
बिरहा सम्राट की आवाज बनी पहचान
इस देशभक्ति गीत को बिरहा शैली में बिरहा के सम्राट हीरालाल यादव ने गाया था। उन्होंने गाते हुए ठेठ भोजपुरी के शब्दों का खूबसूरती से इस्तेमाल किया था। साथ ही जिस बुलंद आवाज और भारीपन के साथ इसे गया गया, वह किसी को भी देशभक्ति के जोश से भर सकता है।
