गरबा नाइट की शान बने इस गाने के पीछे है श्रीराम की कहानी, दीपिका की फिल्म से भी है खास कनेक्शन
क्या आपने कभी सोचा है कि किसी लोकगीत में भगवान श्रीराम, माता सीता और एक भक्त के बीच की कितनी प्यारी कहानी हो सकती है?

नवरात्र में गरबा की रौनक बढ़ाता है यह गुजराती लोकगीत (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जब हम गुजराती लोकगीतों की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान सिर्फ उसकी धुन पर जाता है, लेकिन आज हम जिस पारंपरिक गीत की बात कर रहे हैं, उसमें श्रीराम, माता सीता और एक सच्चे भक्त के बीच की एक बेहद खूबसूरत कहानी पिरोई गई है।
जी हां, यह गीत सिर्फ कानों को मधुर नहीं लगता, बल्कि इसकी कहानी सीधे दिल में उतर जाती है। आइए, डिटेल में जानते हैं इसके बारे में।
“लीली लेमड़ी रे, लीलो नागरवल नो छोड़”
इस गीत में इस्तेमाल हुए शब्द 'लीली लेमड़ी' का मतलब 'हरा नीम' और 'नागरवल' का अर्थ 'सुपारी' है। इस लोकगीत की कहानी एक भक्त से शुरू होती है, जो बड़ी ही श्रद्धा के साथ श्रीराम को अपने घर रुकने का आमंत्रण देता है। भक्त प्रेम से गाता है:
“लीली लेमड़ी रे, लीलो नागरवल नो छोड़
हे परभू परोड़ ना रे, म्हारे घर उतारा करता जाओ...”
इन पंक्तियों के जरिए भक्त कहता है, "हे प्रभु! कृपया कुछ समय के लिए मेरे घर रुकें और अपने आगमन से मेरे घर को धन्य कर दें।"
दिल छू लेता है श्रीराम का जवाब
भक्त के इस प्रेम भरे आग्रह पर भगवान राम जो जवाब देते हैं, वह दिल छू लेने वाला है। श्रीराम कहते हैं कि वे उसके घर नहीं रुक सकते, क्योंकि माता सीता उनकी राह देख रही हैं। गीत की अगली पंक्तियां इस कहानी में और भी मिठास घोल देती हैं:
“उतारो नहीं करूं रे, के म्हारे घर सीता जूवे वाट
सीता एकली रे, के जूवे राम-लखमण नी वाट...”
इनका अर्थ है कि माता सीता घर पर बिल्कुल अकेली हैं और वे श्रीराम व लक्ष्मण जी के लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।
भक्ति और पारिवारिक रिश्तों का सुंदर तालमेल
इस गुजराती लोकगीत की असली खूबसूरती इसी भावना में छिपी है। एक तरफ भक्त का अटूट प्रेम है, जो भगवान को अपने पास ही रोक लेना चाहता है। वहीं दूसरी तरफ भगवान श्रीराम हैं, जो अपने परिवार और माता सीता की पूरी परवाह करते हैं। यह गीत हमें बताता है कि भगवान सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने रिश्तों की भी उतनी ही कद्र करते हैं।
गरबा पंडालों और नवरात्र की शान
शायद यही बड़ा कारण है कि यह लोकगीत गुजरात में गरबा और नवरात्र का एक बेहद अहम हिस्सा है। लोग इसे महज एक गाने की तरह नहीं गुनगुनाते, बल्कि इस गीत में हमारी संस्कृति, हमारे आपसी रिश्ते और हमारी गहरी आस्था पूरी तरह से रची-बसी है।
बता दें, बॉलीवुड की मशहूर फिल्म 'गोलियों की रासलीला राम-लीला' का सुपरहिट गाना 'नगाड़ा संग ढोल बाजे' भी इसी पारंपरिक गुजराती लोकगीत की धुन से काफी हद तक प्रेरित है।
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