सोशल मीडिया पर वायरल मोनाली ठाकुर का ‘बोलो बोलो दुग्गा ऐलो’... जानिए अगोमोनी गीत की परंपरा
दुर्गा पूजा में अगोमोनी गीत मां और बेटी के भावनात्मक रिश्ते को दर्शाता है, जिसमें देवी दुर्गा को एक बेटी ...और पढ़ें

क्यों खास है बंगाल की अगोमोनी परंपरा? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
अगोमोनी गीत मां-बेटी के भावनात्मक रिश्ते का प्रतीक
देवी दुर्गा को बेटी 'उमा' के रूप में दर्शाया गया
मोनाली ठाकुर का 'बोलो बोलो दुग्गा ऐलो' गीत वायरल
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। शरद ऋतु की हल्की ठंडक, हरसिंगार के फूलों की मीठी महक और ढाक की गूंज के बीच दुर्गा पूजा की अलग ही रौनक देखने को मिलती है। यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक मां के इंतजार को व्यक्त करता पर्व है। यही भावना इस त्योहार को नवरात्र से अलग बनाती है।
सोशल मीडिया पर वायरल गाना
दुर्गा पूजा आते ही सोशल मीडिया पर मोनाली ठाकुर का एक गीत काफी वायरल होने लगा है। बोलो बोलो दुग्गा ऐलो… ये गीत इन दिनों हर तरफ सुनाई दे रहा है। यह एक खास तरह का गीत गाया जाता है, जिसका अपना एक खास महत्व होता है। इसे 'अगोमोनी गान' कहा जाता है। यह गीत एक मां के उस इंतजार का उत्सव है, जब वह अपनी विवाहित बेटी के मायके लौटने की राह देखती है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-
क्या है अगोमोनी और इसकी परंपरा?
अगोमोनी गीतों की कहानी बहुत ही सरल और दिल को छू लेने वाली है। इन गीतों की शुरुआत एक सपने से होती है। शरद ऋतु की एक रात, माता मेनका (हिमालय की पत्नी) को अपनी बेटी उमा (देवी दुर्गा) की याद सताती है और वह उसे सपने में देखती हैं। वह तुरंत जाग जाती हैं और अपने पति गिरिराज से विनती करती हैं कि वे कैलाश जाएं और उमा को कुछ दिनों के लिए घर ले आएं।
लोकमान्यताओं और परंपराओं के मुताबिक इसी सपने से हर अगोमोनी गीत की शुरुआत होती है। पीढ़ियों से ये गीत भोर के समय गाए जाने वाले रागों- जैसे ललित, बिभास और रामकेली- में गाए जाते रहे हैं, जो सुबह की पवित्रता को और बढ़ा देते हैं।
मां दुर्गा को बेटी के रूप में दर्शाता है ये गीत
इन पारंपरिक गीतों की सबसे खास बात यह है कि इनमें मां दुर्गा को एक शक्तिशाली देवी के रूप में नहीं, बल्कि 'उमा' नाम की एक साधारण बेटी के रूप में दिखाया गया है। इन गीतों की मुख्य नायिका उमा नहीं, बल्कि उनकी मां मेनका हैं। मेनका एक आम मां की तरह अपनी बेटी से लाड़ लड़ाती हैं, रूठती हैं और अपने दामाद (भगवान शिव) को लेकर मीठी शिकायतें भी करती हैं।
जब उमा कुछ दिनों के लिए मायके आती है, तो खुशी में गाए जाने वाले ये गीत ही 'अगोमोनी' कहलाते हैं। और जब वह वापस अपने ससुराल लौटती है, तो उस विदाई के दर्द को 'बिजोया' (विजयादशमी) के गीतों में पिरोया जाता है।
इसलिए खास है आगमन गीत
जब हम पूजा पंडालों में देवी की भव्य मूर्ति देखते हैं, तो हम उनके चमत्कारिक रूप को पूजते हैं। लेकिन अगोमोनी गीत हमें पंडाल की चकाचौंध से दूर एक घर के बरामदे में ले जाते हैं, जहां एक मां दरवाजे पर खड़ी अपनी बेटी का इंतजार कर रही है।
