‘लट्ठे दी चादर’ से सजती है दुल्हन की सहेलियों की महफिल, इस पंजाबी लोकगीत में छिपा है प्रेमिका का चुलबुला अंदाज
यह गीत एक महिला के चुलबुले प्यार और नजाकत को खूबसूरती से दर्शाता है, जिसके बोलों में गहरा अर्थ छिपा है।

सादगी और रोमांस के लिए फेमस सदाबहार लोकगीत ‘लट्ठे दी चादर’ (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पंजाबी संस्कृति की सबसे खास बात यह है कि इसके कई लोकगीत आज भी उतने ही जीवंत हैं, जितने पुराने जमाने में हुआ करते थे। इन्हीं में से एक है 'लट्ठे दी चादर', जिसके कई बोल बॉलीवुड फिल्मों में भी उसी धुन के साथ पर अलग अंदाज में सुनने को मिल जाते हैं।
इस गाने को सुनकर हर कोई थिरकने को मजबूर हो जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि शादी-ब्याह के मौकों पर गाया जाने वाला यह गीत पहले प्रेमी और प्रेमिका के बीच रूठने-मनाने का एक जरिया हुआ करता था? आइए आज इसी मशहूर लोकगीत के एक-एक बोल के बारे में विस्तार से बात करते हैं।
‘लट्ठे दी चादर’ का क्या मतलब है?
‘लट्ठे दी चादर’ गीत एक महिला द्वारा अपने प्रेमी को छेड़ने और प्यार जताने से जुड़ा हुआ है। पंजाबी लोकसंगीत में ऐसे बहुत कम ही गीत सुनने को मिलते हैं, जिसमें किसी महिला की नजाकत और उसके चुलबुले प्यार को इतनी खूबसूरती से जाहिर किया गया हो। इसमें पंजाबी शब्द लट्ठ का मतलब शुद्ध सूती कपड़ा होता है, इस तरह यहां बात सूती कपड़े की चादर की हो रही है।
सादगी और रोमांस के लिए फेमस सदाबहार लोकगीत
‘लट्ठे दी चादर’ लोकगीत पीढ़ियों से अपनी साड़ी और रोमांस के लिए जाना जाता रहा है। इसे अब तक के सबसे फेमस लोकगीतों में गिना जाता है, जिसे पंजाब में शादी, मेहंदी और बाकी कार्यक्रमों में गाया जाता है। इसकी धुन पर अक्सर ही दुल्हन और उसकी सहेलियां थिरकती नजर आती हैं।
‘लट्ठे दी चदार उत्ते सलेटी रंग माहिया
आवो सामणे कोलों दी रुस के न लंग माहिया’
यह लोकगीत प्रेमिका के प्यार जताने के अंदाज को बखूबी दिखाता है, जिसमें वो अपने माहिया यानी प्रेमी से कह रही है कि उसने जो सूती कपड़ा ओढ़ रखा है, उसपर सिलेटी रंग खूब जच रहा है। इसके बाद वो कहती है कि तुम मुझसे रूठकर इस तरह से मत जाओ, सामने आओ और बात करो।
‘चन्ना कंदा तूं मरिया अख वे
साडे आटे दे विच हथ वे’
इसके बाद पहले अंतरे में प्रेमिका कहती है कि तुम दीवार के सहारे खड़े होकर मुझे आंख मार रहे हो, पर मेरे हाथ अभी भी गूंधे हुए आटे से सने हुए हैं।
सुनी और बोली जाती हैं लड़की की भावनाएं
इस गाने की सबसे बड़ी खूबी ही यही है कि इसमें लड़की अपनी भावनाओं को कह पा रही है। इसमें प्रेमिका की शर्म, प्यार और चुलबुलेपन का मिश्रण है। मूलरूप से इस गाने को सुरिंदर कौर और प्रकाश कौर ने आवाज दी है, पर समय के साथ जगजीत सिंह, गुरदास मान, नेहा भसीन और हर्षदीप कौर ने भी इस गीत को जीवंत बनाए रखने में भूमिका निभाई।
