होली पार्टी का नाम सुनकर आपको भी होती है एंग्जायटी? जानिए क्या हैं इसके कारण और इससे निपटने के तरीके
कुछ लोगों को होली पार्टी और भीड़ से घबराहट महसूस होती है, जिसके कारण यह त्योहार उनके लिए मुश्किलों भरा हो सकता है।
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होली पार्टी में जाने का सोचकर ही होनी लगती है बेचैनी? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। होली का नाम सुनते ही हवा में गुलाल और कानों में 'बुरा न मानो होली है' की गूंज सुनाई देने लगती है। जहां ज्यादातर लोग टोलियों में निकलने और नाचने-गाने का इंतजार करते हैं, वहीं कुछ लोगों के लिए यह त्योहार भारी मानसिक तनाव लेकर आता है।
अगर भीड़, अनजान लोगों का छूना या जबरदस्ती रंग लगाया जाना आपको बेचैन करता है, तो आप अकेले नहीं हैं। इसे सोशल एंग्जायटी कहा जाता है। आइए समझते हैं कि क्यों खुशियों का त्योहार होली कुछ लोगों के लिए परेशानी भरा हो सकता है।
होली पर क्यों होती है कुछ लोगों को सोशल एंग्जायटी?
सोशल एंग्जायटी का मतलब सिर्फ शर्मिला होना नहीं है। होली के दौरान यह और भी बढ़ जाती है क्योंकि इस त्योहार में पर्सनल स्पेस लगभग खत्म हो जाता है। अचानक किसी का पीछे से आकर रंग लगा देना, जोर-जोर से बजते डीजे और अजनबियों के साथ घुलने-मिलने के दबाव के कारण कुछ लोगों को घबराहट, पसीना आना या दिल की धड़कन तेज होने जैसी स्थिति में डाल सकता है।

(AI Generated Image)
भीड़ और शोर से क्यों डर लगता है?
होली एक अनप्रिडिक्टेबल त्योहार है। आपको पता नहीं होता कि कब कौन आप पर पानी डाल देगा या रंग देगा। जिन लोगों को कंट्रोल पसंद होता है या जो भीड़ में अनकम्फर्टेबल महसूस करते हैं, उनके लिए यह काफी एंग्जायटी का कारण बन जाता है। वे इस डर से घर में कैद हो जाते हैं कि कहीं कोई उनके साथ जबरदस्ती न करे या उन्हें पार्टी पॉपर न समझा जाए।
सोशल एंग्जायटी से निपटने के लिए क्या करें?
- अपनी बाउंडरी सेट करें- यह पूरी तरह ठीक है कि आप किसी को खुद पर रंग लगाने से मना कर दें। अपने करीबियों को पहले ही बता दें कि आप केवल टीका लगवाना पसंद करेंगे या आप ज्यादा शोर-शराबे वाली जगह नहीं जाना चाहते।
- छोटे ग्रुप से शुरुआत करें- सीधे बड़ी होली पार्टी में जाने के बजाय, केवल उन दोस्तों या रिश्तेदारों के साथ होली खेलें जिनके साथ आप सुरक्षित और कमफर्टेबल महसूस करते हैं।
- एग्जिट प्लान तैयार रखें- जब आप किसी गेदरिंग में जाएं, तो मन में एक एग्जिट प्लान बनाकर रखें। अगर आपको घबराहट महसूस होने लगे, तो आप बिना किसी सफाई के वहां से हट सकें। 5-10 मिनट अकेले शांति में बैठना आपको वापस नॉर्मल महसूस करा सकता है।
- खुद पर दबाव न डालें- सोशल मीडिया की तस्वीरों को देखकर यह न सोचें कि आपको भी वैसा ही पागलपन दिखाना है। अगर आपको शांति से बैठकर गुजिया खाना पसंद है, तो वही आपकी असली होली है।
