चंद्रगुप्त-शिवाजी की सेना का 'ड्राई राशन' जो कारगिल युद्ध में भी आया काम; रोचक है इस देसी टॉनिक की कहानी
एक ऐसी ट्रेडिशनल ड्रिंक जिसे पकाने का झंझट नहीं होता, सदियों पहले भी राजा-महाराजाओं का फेवरेट सुपरफूड हुआ करता था।

परंपरी ड्रिंक सत्तू की कहानी (Image Source: AI Generated)
HighLights
सत्तू प्राचीन काल से सैनिकों का त्वरित ऊर्जा स्रोत रहा
मौर्य, शिवाजी और कारगिल युद्ध में सत्तू ने निभाई अहम भूमिका
प्रोटीन, फाइबर से भरपूर यह पारंपरिक पेय आज भी लोकप्रिय
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज हमारे घरों में जिसे हम उसकी ठंडी तासीर होने की वजह से गर्मियों की कूलिंग ड्रिंक मानते हैं, वही सत्तू एक समय में ठंडक के लिए नहीं बल्कि ताकत के लिए खानपान में शामिल किया जाता था। यह सैनिकों का वो राशन था जो उन्हें तुरंत ऊर्जा देने में मदद करता था, आइए आपको बताते हैं इस पारंपरिक ड्रिंक सत्तू की कहानी।
परंपरी ड्रिंक सत्तू की कहानी
सत्तू की उत्पत्ति कैसे हुई, इसे लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। पहली कहानी तो तिब्बत के बौद्ध भिक्षुओं से जुड़ी हुई है। इसके मुताबिक, भिक्षुओं का काम ज्ञान की तलाश में यात्रा करने का था और इस सफर में सत्तू उनकी भूख का साथी होता था। इसके अलावा, इसका संबंध पहले समय के युद्धों के साथ भी बताया जाता है।
मौर्यकालीन इतिहास में था सैनिकों का ड्राई राशन
भारत का इंस्टेंट फूड कहे जाने वाले सत्तू के बारे में कहते हैं कि कुषाण साम्राज्य के अंत तक सत्तू लोगों का दैनिक आहार बन चुका था। कहते हैं उस जमाने में कलिंग के नाविक और सैनिक लंबी यात्रा में सत्तू ले जाया करते थे। इसी के साथ, मौर्य काल में युद्ध में जुटी सैनिक टुकड़ियों को राशन, वेतन और भत्ते के तौर पर सत्तू दिए जाने की बात भी पढ़ने को मिलती है।
छत्रपति शिवाजी के गोरिल्ला युद्ध से भी खास नाता
सत्तू में मौजूद पोषक तत्वों की वजह से ही 17 वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी ने गोरिल्ला युद्ध में लगे सैनिकों को तुरंत एनर्जी देने के लिए इसे ड्राई राशन की तरह इस्तेमाल किया था। खुद वीर शिवाजी की भी यह पहली पसंद हुआ करता था।
कारगिल युद्ध में अहम भूमिका
साल 1999 में कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के लिए जौ से बने त्साम्पा नामक हिमालयन सत्तू ने बड़ी अहम भूमिका निभाई थी। ज्यादा ऊंचाई और खराब मौसम में शरीर को ऊर्जा देने के लिए सैनिकों के लिए यही सबसे बेस्ट ऑप्शन के तौर पर देखा गया।
उत्तर प्रदेश और बिहार का टॉनिक है सत्तू
प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर सत्तू बिहार और उत्तर प्रदेश में टॉनिक की तरह काम करता है। गर्मी के मौसम में शरीर को लू से बचाने के लिए इन राज्यों में इसे तरह-तरह से पीया जाता है। कभी चीनी डालकर मीठे सत्तू का स्वाद लेते हैं तो कभी प्याज, भुना जीरा और नींबू के साथ कूलिंग ड्रिंक तैयार कर ली जाती है।
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