विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सिर्फ एक नृत्य नहीं, असम की लोक संस्कृति का प्रतीक है बिहू, जनजातिय समुदाय से जुड़ा है इस डांस का नाता

Published: Thu, 17 Sep 2026 03:53 PM (IST)

बिहू नृत्य असम की संस्कृति का अहम हिस्सा है। ये नृत्य वहां की जनजातिय सभ्यता से जुड़ा है।

बिहू नृत्य का इतिहास क्या है? (AI Generated Image)

बिहू नृत्य का इतिहास क्या है? (AI Generated Image)

HighLights

  1. बिहू असम की संस्कृति और उत्सव का प्रतीक है

  2. इसकी जड़ें प्राचीन जनजातीय सभ्यताओं से जुड़ी हैं

  3. फसल कटाई और प्रकृति के लिए आभार व्यक्त करता है ये नृत्य

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। असम की संस्कृति बिहू के बिना अधूरी है। ये सिर्फ एक लोक नृत्य नहीं है, बल्कि वहां के जीवन और उत्सव का प्रतीक है। तेज ताल और ऊर्जा से भरे गीतों पर किया जाने वाला बिहू असम की संस्कृति का अहम हिस्सा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत कब हुई थी? 

बिहू का इतिहास काफी पुराना है और ये यहां की जनजातीय सभ्यता से गहराई से जुड़ा है। आइए जानें बिहू का इतिहास क्या है और क्यों ये नृत्य इतना खास है। 

क्या है बिहू का इतिहास?

बिहू नृत्य की जड़ें काफी पुरानी है। इसकी शुरुआत की कहानी असम की आग्नेय और मंगोलाई जनजातीयों से जुड़ी है। ऐतिहासिक रूप से ये नृत्य खेती से जुड़े उत्सव और प्रजनन क्षमता से जुड़े प्राचीन रीति-रिवाजों से जुड़ा था।

17वीं सदी में अहोम राजवंश के राजा रुद्र सिंह के शासन में इस नृत्य को संरक्षण मिला। उन्होंने नर्तकों को अपने दरबार में आमंत्रित किया और इस नृत्य को अपना संरक्षण दिया। समय के साथ इस नृत्य में कुछ बदलाव आए और ये खुले खेतों में एक साथ इकट्ठा होकर किया जाने वाला लोक नृत्य बन गया। 

क्यों किया जाता है बिहू? 

बिहू का प्रकृति से गहरा नाता है और उसी का धन्यवाद और आभार जाहिर करने के लिए ये नृत्य किया जाता है। फसल की कटाई का जश्न मनाने के लिए इस नृत्य को किया जाता है। असम में तीन बिहू मनाए जाते हैं, लेकिन रोंगाली बिहू पर मुख्य रूप से इस नृत्य को किया जाता है। 

बसंत ऋतु में बोहाग बिहू मनाया जाता है, जो नववर्ष की शुरुआत और बसंत के आगमन के रूप में मनाया जाता है। इस समय खेतों में बुवाई शुरू होती है और इस पर्व के जरिए युवाओं को बीच प्रेम और उत्साह का संदेश दिया जाता है।  

बिहू नृत्य की खासियत क्या है?

इस नृत्य को करने के लिए नर्तक मुग्गा सिल्क से बनी पोशाक पहनते हैं। महिलाएं लाल और गोल्जन रंग की मेखेला चादोर पहनती हैं, बालों में कपौ फूल लगाती हैं और हाथ में आल्ता लगाकर तैयार होती हैं। वहीं, पुरुष धोती, गमोसा और सूती कुर्ता पहनते हैं। 

बिहू नृत्य का संगीत भी काफी खास होता है। ढोल, पेपा और बांसुरी की धुन पर ये नृत्य किया जाता है। बिहू की खासियत है कि ये बहुत तेज गति से किया जाता है और इसमें हिप्स और हाथों की मूवमेंट पर खास ध्यान दिया जाता है। नर्तक एक लाइन में एक साथ खड़े होते हैं और हाथों को कमर पर रखकर अपने हिप्स को एक लय में हिलाते हुए नृत्य करते हैं।