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डिप्रेशन-एंग्जायटी से दूर रहने का देसी तरीका! दादी-नानी की ये हॉबीज आज भी हैं बड़े काम की

Published: Tue, 27 Oct 2026 12:09 PM (IST)

दादी-नानी के जमाने की हॉबीज जैसे बागवानी, बुनाई और किस्सागोई आज भी डिप्रेशन व एंग्जायटी से लड़ने में मददगार हैं।

मेंटल हेल्थ ठीक रखने के लिए दादी-नानी के जमाने की हॉबीज (Image Source: AI Generated)

मेंटल हेल्थ ठीक रखने के लिए दादी-नानी के जमाने की हॉबीज (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पुराने जमाने में भी मेंटल हेल्थ आज के समय जितनी ही मायने रखती थी, लेकिन आजकल मोबाइल और लैपटॉप के बढ़ते कॉर्पोरेट कल्चर ने हमें डिप्रेशन, एंग्जायटी और बर्नआउट जैसी गंभीर समस्याओं पर सोचने को मजबूर कर दिया है। 

यही वजह है लोग इसके लिए कभी थेरेपी लेते नजर आ रहे हैं, तो कभी ट्रैवलिंग के जरिए अपने मन को खुश रखने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे में चलिए आपको उस दौर के दादी-नानी के जमाने की हॉबीज बताते हैं, जो उन्हें स्ट्रेस फ्री रखने में मदद करती हैं। 

बागवानी 

प्रकृति हमें अच्छे वक्त के इंतजार का सब्र देती है, जिन लोगों का पेड़-पौधों से ज्यादा जुड़ाव होता है वो स्वभाव से भी काफी शांत होते हैं। इस तरह हम देखें तो लोगों में इन दिनों किचन गार्डन का बढ़ता क्रेज नया नहीं दादी-नानी के जमाने का है। 

बुनाई और क्रोशिया 

सिलाई, कढ़ाई और बुनाई हमें दिमाग में चल रही अनगिनत बातों को ब्रेक लगाने का मौका देती हैं, क्योंकि इस काम में फोकस की जरूरत है। इससे माइंड को कुछ अलग सोचने का मौका ही नहीं मिलता। तभी तो पहले के समय में लोग बिना किसी थेरेपी के अपनी मेंटल हेल्थ को इसके जरिए ठीक रखते थे। 

किस्सागोई और चौपाल

उस दौर में अनौपचारिक बातचीत मन हल्का रखने में मदद करती थी। लोग दोपहर और शाम के खाली समय में घर के आंगन में बैठकर किस्से-कहानियां सुनाते थे। ऐसे में अकेलेपन और डिप्रेशन का तो सवाल ही खड़ा नहीं होता। 

माइंडफुल कुकिंग

दादी-नानी की माइंडफुल कुकिंग में रोज वाला खाना शामिल नहीं है, इसमें आम, नींबू और मिर्च के आचार-मुरब्बे से लेकर तरह-तरह के पापड़ बेलना, इमामदस्ते में मसाले कूटना और बड़िया बनाने जैसी कई हॉबी शामिल हैं। इस तरीके को आज अपनाकर हम न सिर्फ पारंपरिक खानपान के तरीके को सीख सकते हैं, बल्कि वर्तमान में ठहरने की कला भी जान सकते है। 

लोकगीत और भजन 

मनोरंजन किसे कहते हैं वो आज की जेनरेशन से ज्यादा बड़े-बुजुर्ग जानते हैं। अगर यकीन नहीं होता तो एक बार उनकी महफिल में जरा बैठकर देखिए। म्यूजिक की यह कला हैप्पी हॉर्मोन रिलीज करके हमारे मन को खुश रखने का काम करती है। 

मिट्टी के बर्तन बनाना 

मिट्टी के बर्तनों को अपने हाथों से आकार देना क्रिएटिविटी बढ़ाने के साथ स्ट्रेस को कम करके मन को शांत रखने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।