AI से 80s का रेट्रो लुक बनवाना पड़ सकता है भारी, फोटो अपलोड करने से पहले पढ़ें ये 6 जरूरी बातें
सोशल मीडिया पर 80 के दशक का रेट्रो लुक बनाने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन ...और पढ़ें
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80s रेट्रो AI लुक के पीछे छिपे हैं बड़े खतरे (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
डीपफेक तकनीक से आपकी पहचान चोरी होने का खतरा
AI पर अपलोड फोटो पर आपका कंट्रोल खत्म हो जाता है
बायोमेट्रिक डेटा और प्राइवेसी को गंभीर खतरा हो सकता है
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। 80 के दशक का वह सुनहरा दौर एक बार फिर लौट आया है। जी हां, सोशल मीडिया पर इन दिनों हर कोई 80s के विंटेज और रेट्रो लुक को रीक्रिएट कर रहा है। हाल ही में लोग AI टूल्स का इस्तेमाल करके खुद को 80 के दशक के किसी स्टाइलिश रॉकस्टार, विंटेज बॉलीवुड स्टार या उस दौर के ट्रेंडी साड़ी लुक में ढाल रहा है।
एआई से बनी ये तस्वीरें और रेट्रो पोलरॉइड्स इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहे हैं और हर कोई शौक से इस ट्रेंड का हिस्सा बनना चाह रहा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अपनी असली तस्वीरें इन अनजान AI प्लेटफॉर्म्स को सौंपना कितना खतरनाक साबित हो सकता है? आपके इस शौक के पीछे कई बड़े डिजिटल खतरे छिपे हैं, जिन्हें जानना आज के समय में बेहद जरूरी है। आइए,जानते हैं इसके कुछ ऐसे ही खतरों के बारे में-
डीपफेक का खतरा
80s वाला लुक पाने के लिए आप अपनी जिस असली फोटो को AI को देते हैं, उसका इस्तेमाल करके AI आपकी ही शक्ल वाला एकदम असली लगने वाले फर्जी वीडियो या फोटो, जिसे डीपफेक भी कहा जाता है, बना सकता है। इससे आपकी पहचान चोरी हो सकती है, जो काफी खतरनाक हो सकता है।
तस्वीर पर आपका कंट्रोल खत्म होना
इस बारे में बेहद कम लोग ही जानते हैं कि एक बार जब आप कोई फोटो इंटरनेट के AI जनरेटर पर अपलोड कर देते हैं, तो उस पर आपका कोई अधिकार नहीं रह जाता। सिस्टम आपकी फोटो से आपकी लोकेशन और पर्सनल जानकारी चुरा सकता है। इससे आपकी फोटो का गलत यूज होने का खतरा बढ़ जाता है।
असली-नकली में फर्क करना मुश्किल
AI टूल्स के इस्तेमाल से बनने वाली तस्वीरों का एक और नुकसान यह है कि जैसे-जैसे AI से बनी तस्वीरें आम हो रही हैं, असली और नकली तस्वीरों के बीच फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। इसकी वजह से विजुअल कंटेंट पर निर्भर दूसरे उद्योगों पर बुरा असर पड़ सकता है।
हो सकता है आपकी तस्वीरों का इस्तेमाल
आपने भले ही बस मनोरंजन के लिए किसी एआई का ऐप इस्तेमाल किया हो, लेकिन ये टेक कंपनियां कई बार आपकी तस्वीर का इस्तेमाल विज्ञापनों या अपने सिस्टम को और स्मार्ट बनाने में कर सकती हैं। वह भी आपकी परमिशन लिए के बिना।
प्राइवेसी को खतरा
जब आप किसी AI ऐप को अपनी फोटो देते हैं, तो आप अनजाने में अपने चेहरे की बारीकियां (बायोमेट्रिक डेटा) उनके सर्वर पर सेव कर देते हैं। ये कंपनियां आपका डेटा थर्ड-पार्टी को बेच सकती हैं, जिससे आपकी प्राइवेसी हमेशा के लिए खतरे में पड़ सकती है।
भेदभाव को बढ़ावा देना
कई बारे AI सिस्टम समाज के पुराने और गलत विचारों को बढ़ावा देता है। इसकी वजह से फोटो बनाते समय ये टूल्स रंग-रूप या नस्ल के आधार पर भेदभाव करते हैं और सुंदरता के गलत पैमाने तय करते हैं, जो समाज के लिए हानिकारक हो सकता है।
