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पार्सल भेजते समय स्पीड पोस्ट और रजिस्टर्ड पोस्ट में कौन-सा ऑप्शन चुनें, जिससे हो समय और पैसे की बचत?

Published: Thu, 10 Sep 2026 04:32 PM (IST)

भारतीय डाकघर में यूं तो कई सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन दो नाम सबसे ज्यादा सुने जाते हैं- 'स्पीड पोस्ट' और 'रजिस्टर्ड पोस्ट'।

इंडिया पोस्ट से पार्सल भेजने जा रहे हैं? (Image Source: AI-Generated)

इंडिया पोस्ट से पार्सल भेजने जा रहे हैं? (Image Source: AI-Generated)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इंडिया पोस्ट आज भी जरूरी डॉक्यूमेंट्स और पार्सल भेजने का सबसे भरोसेमंद जरिया माना जाता है। हालांकि, जब हम पोस्ट ऑफिस जाते हैं, तो स्पीड पोस्ट और रजिस्टर्ड पोस्ट जैसे दो विकल्पों के बीच अक्सर उलझ जाते हैं।

बता दें, दोनों का मुख्य काम आपकी डाक पहुंचाना ही है, लेकिन इनकी कीमत, समय और नियमों में काफी अंतर होता है। आइए बिना किसी कन्फ्यूजन के इससे जुड़ी कुछ डिटेल्स समझ लीजिए, ताकि अगली बार आप अपनी जरूरत के हिसाब से सही ऑप्शन चुन सकें।

पार्सल भेजने की जल्दी है?

क्या आपको अपना पैकेट जल्द से जल्द पहुंचाना है? अगर हां, तो स्पीड पोस्ट आपके लिए एकदम सही रहेगा। यह डाक विभाग की फास्ट और प्रीमियम सर्विस है। अगर पार्सल लोकल शहर में ही भेजना है, तो यह 1 से 2 दिन में डिलीवर हो जाता है। वहीं, देश के किसी भी अन्य हिस्से में इसे पहुंचने में ज्यादा से ज्यादा 5 दिनों का वक्त लगता है।

इसके उलट, रजिस्टर्ड पोस्ट में डिलीवरी की स्पीड से ज्यादा पार्सल की सुरक्षा को अहमियत दी जाती है। इसी कारण से, रजिस्ट्री के जरिए भेजे गए सामान को अपनी मंजिल तक पहुंचने में 5 से 7 दिन या इससे ज्यादा समय भी लग सकता है।

कम बजट में भेजना है पार्सल?

अगर आपका बजट सीमित है और पार्सल पहुंचने की कोई खास जल्दी नहीं है, तो रजिस्ट्री काफी किफायती सर्विस है। आप मात्र ₹26 के न्यूनतम शुल्क से रजिस्टर्ड पोस्ट भेज सकते हैं। वहीं, स्पीड पोस्ट की शुरुआत ₹41 से होती है। इसमें आपके पार्सल के वजन और जगह की दूरी के आधार पर किराया तय होता है, इसलिए यह सर्विस रजिस्ट्री के मुकाबले थोड़ी महंगी होती है।

पार्सल मिलने पर चाहिए रिसीवर के साइन?

अगर आप चाहते हैं कि पार्सल मिलने पर सामने वाला व्यक्ति साइन करे और वह सबूत वापस आपके घर तक आए, तो रजिस्ट्री में यह काम बेहद सस्ते में हो जाता है। इसमें एक्नॉलेजमेंट ड्यू नाम का एक फॉर्म लगाया जाता है, जिसका खर्च लगभग 5 रुपये आता है। अगर आपको यही लिखित रसीद वाली सुविधा स्पीड पोस्ट में चाहिए, तो इसके लिए 10 रुपये से ज्यादा का भुगतान करना पड़ता है।

पोस्ट ऑफिस की गलती से पार्सल खोने पर मिलता है मुआवजा

अगर पोस्ट ऑफिस की चूक से आपका स्पीड पोस्ट समय पर नहीं पहुंच पाता या पार्सल कहीं खो जाता है, तो डाक विभाग के नियमों के अनुसार आपको इसका हर्जाना दिया जाता है। दूसरी तरफ, रजिस्ट्री वाले पार्सल के गुम होने पर भी डाकघर की तरफ से एक तय मुआवजा देने का प्रावधान है। चूंकि दोनों ही सेवाओं में मिलने वाली मुआवजे की राशि सीमित होती है, इसलिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि अगर आप कोई बहुत ही कीमती या गोपनीय दस्तावेज भेज रहे हैं, तो सुरक्षा के लिहाज से उसका इंश्योरेंस जरूर करा लें।

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