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90s Nostalgia: फैंटम सिगरेट से मेलोडी तक, आज भी महंगी चॉकलेट्स को मात देती हैं बचपन की 10 टॉफियां

Published: Sat, 23 May 2026 02:26 PM (IST)

यह आर्टिकल 90 के दशक की यादें ताजा कर देगा, क्योंकि इसमें फैंटम स्वीट सिगरेट और मेलोडी जैसी 10 मशहूर टॉफियों का जिक्र किया गया है।

आज की महंगी चॉकलेट्स को मात देती हैं ये 10 देसी टॉफियां (Image Source: AI-Generated)

आज की महंगी चॉकलेट्स को मात देती हैं ये 10 देसी टॉफियां (Image Source: AI-Generated) 

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। 90 का दशक सिर्फ एक दौर नहीं, बल्कि एक खूबसूरत अहसास था। उस समय न तो हाथों में स्मार्टफोन होते थे और न ही इंटरनेट की दुनिया। तब हमारी सबसे बड़ी खुशी शाम को दोस्तों के साथ खेलना और जेब में पड़े एक या दो रुपये लेकर पास की दुकान पर दौड़ जाना होती थी, क्योंकि उन थोड़े से सिक्कों में ढेर सारी टॉफियां जो आ जाती थीं।

आज भले ही बाजार में विदेशी और महंगी चॉकलेट्स की भरमार है, लेकिन 90 के दशक की उन सस्ती और चटक रंग वाली टॉफियों का स्वाद आज भी हमारे दिलों में बसा है। आइए, एक बार फिर बचपन की उन पुरानी यादों को ताजा करते हैं और याद करते हैं वो 10 टॉफियां, जो आज भी किसी भी महंगी चॉकलेट को मात दे सकती हैं।

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(Image Source: AI-Generated) 

फैंटम स्वीट सिगरेट

90 के दशक के हर बच्चे ने इसे अपनी उंगलियों के बीच फंसाकर खुद को किसी फिल्म का हीरो जरूर समझा होगा। सफेद रंग की यह चॉक जैसी दिखने वाली मिंट फ्लेवर वाली स्वीट कैंडी, स्टाइल मारने का सबसे बेहतरीन और 'सेफ' तरीका हुआ करती थी।

मैंगो बाइट

"असली आम का स्वाद" वाली यह पीले और हरे रैपर की टॉफी हर बच्चे की फेवरेट थी। गर्मियों में जब आम खाने को नहीं मिलते थे, तो मैंगो बाइट ही हमारे आम खाने की तलब को पूरा करती थी।

पॉपिन्स

लाल, पीली, हरी और नारंगी... एक ही पैकेट में इंद्रधनुष के सारे रंग। दोस्तों के बीच हमेशा इस बात पर लड़ाई होती थी कि लाल वाली पॉपिन्स कौन खाएगा। इसे खाना और जीभ का रंग बदलकर एक-दूसरे को डराना, हमारे बचपन का फेवरेट गेम था।

पान पसंद

अगर बिना पान खाए मुंह लाल करना हो, तो 'पान पसंद' से बेहतर क्या हो सकता था? पान के हुबहू स्वाद वाली इस टॉफी की खुशबू इतनी तेज़ होती थी कि दूर से ही पता चल जाता था कि किसी ने पान पसंद खाई है।

मेलोडी

"मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?" इस सवाल का जवाब शायद आज तक किसी को नहीं मिला। बाहर से कैरेमल और अंदर से गाढ़ी चॉकलेट वाली यह टॉफी आज की किसी भी प्रीमियम चॉकलेट से कम नहीं थी।

पारले किस्मी

इलायची और कैरेमल के जादुई स्वाद वाला यह बार लाल और सफेद रैपर में आता था। इसे धीरे-धीरे चबाकर खाने का मजा ही कुछ और था। यह उस दौर की 'पॉकेट-फ्रेंडली' चॉकलेट थी।

स्वाद

सफेद और नीले रैपर में आने वाली 'स्वाद' सिर्फ एक टॉफी नहीं थी, बल्कि हमारे लिए हाजमा ठीक करने की दवा भी थी। इसकी खट्टी-मीठी और चुलबुली डकारें आज भी याद आती हैं।

रोल-अ-कोला

जब कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए पैसे नहीं होते थे, तब हम 'रोल-अ-कोला' खाते थे। यह सॉलिड कोला के जैसी थी। इसे मुंह में रखते ही ऐसा लगता था जैसे हम सच में कोका-कोला पी रहे हों।

फटाफट

काले और संतरी रंग के छोटे से पैकेट में आने वाली ये गोलियां कमाल की होती थीं। काले रंग की इन खट्टी-मीठी और मसालेदार गोलियों को एक बार खाना शुरू करो, तो पूरा पैकेट कब खत्म हो जाता था, पता ही नहीं चलता था।

कॉफी बाइट

"यह कॉफी है या टॉफी?" इस मीठी-सी बहस के बीच कॉफी बाइट ने हमें बचपन में ही कॉफी का चस्का लगा दिया था। इसका स्वाद इतना रिच था कि इसे मुंह में रखकर धीरे-धीरे पिघलने देने में ही असली सुकून था।

बचपन की यादें कभी पुरानी नहीं होतीं

आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो एहसास होता है कि वो सिर्फ टॉफियां नहीं थीं, बल्कि हमारे बचपन के छोटे-छोटे पल थे। आज की 100 रुपये वाली चॉकलेट में शायद वो स्वाद न मिले, जो उस वक्त 1 रुपये की 4 टॉफियों में मिलता था।

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