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54% दोस्त सिर्फ बुराई करने के लिए हैं साथ, 67% मजबूरी में निभा रहे दोस्ती! पढ़ें मॉडर्न फ्रेंडशिप की सच्चाई

Published: Sun, 12 Jul 2026 11:14 AM (IST)

आधुनिक दोस्ती में लोग अब संख्या से ज्यादा गुणवत्ता को महत्व दे रहे हैं, क्योंकि कई रिश्ते मजबूरी या शिकायत पर आधारित हैं।

सोशल मीडिया पर 1000 दोस्त, असल जिंदगी में अकेले? (Picture Courtesy: Freepik)

सोशल मीडिया पर 1000 दोस्त, असल जिंदगी में अकेले? (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अपने फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट या सोशल मीडिया की फ्रेंड्स लिस्ट खोलकर देखेंगे, तो आपको सैकड़ों नाम मिल जाएंगे, लेकिन मुसीबत के समय आप इनमें से कितने लोगों को फोन कर सकते हैं? जवाब में 10-15 लोग ही शामिल होंगे। 

शायद यही वजह है कि इंटरनेट पर पिछले कुछ महीनों में बिना बताए दोस्त से दूरी कैसे बनाएं और दोस्ती खत्म कैसे करें, जैसे सर्च काफी बढ़ गए हैं। लोग अब लंबी फ्रेंड लिस्ट नहीं चाहते, बल्कि वे सच्चे दोस्त चाहते हैं। इसलिए लोग अब दोस्ती में ब्रेकअप करने से भी नहीं हिचकिचा रहे हैं। 

मजबूरी बन चुके हैं 67% रिश्ते

एक सर्वे के मुताबिक, करीब 67% लोग ऐसी दोस्तियां निभा रहे हैं, जिनमें कोई अपनापन या लगाव नहीं बचा है। ये रिश्ते ज्यादातर वो हैं, जो कभी साथ में स्कूल-कॉलेज में थे, ऑफिस कलीग रह चुके हैं या जिंदगी के किसी दौर में साथ थे। ऐसे रिश्तों जो किसी समय मजबूत हुआ करते थे, अब सिर्फ औपचारिकता बन कर रह गए हैं। 

इसी सर्वे में 54% लोगों ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी कई दोस्तियां सिर्फ शिकायत करने, ऑफिस की बातें, फैमिली स्ट्रेस या किसी व्यक्ति की बुराई पर ही टिके हैं। इन दोस्तियों में किसी और चीज की कोई जगह नहीं है। किसी समय में जिंदगी का खास हिस्सा होने की वजह से लोग गिल्ट में आकर या पुरानी यादों के कारण इन दोस्तियों को जबरदस्ती खींचते रहते हैं।   

150 से ज्यादा रिश्ते संभालना व्यावहारिक नहीं

एक रिसर्च में यह पाया गया है कि एक इंसान अपने जिंदगी में ज्यादातर 150 सोशल रिश्ते ही असरदार तरीके से संभाला जा सकता है। इससे ज्यादा लोगों के साथ एक जैसा भरोसा, समय और कनेक्शन रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। 

दरअसल, जैसे-जैसे दोस्तों की संख्या बढ़ती है, रिश्तों में जुड़ाव कम होने लगता है। केवल शिकायत और नेगेटिव बातों पर टिकी दोस्ती मानसिक रूप से काफी थकाने वाली होती है। इसलिए लोग अब ज्यादा दोस्त बनाने की जगह, बेहतर दोस्त बनाने पर फोकस करना चाह रहे हैं। भले ही कम दोस्त हो, लेकिन उनके साथ कनेक्शन गहरा हो। यहीं अब रिश्तों का असली फॉर्मूला है। 

भारी पड़ सकती है चुगली और शिकायतों वाली दोस्ती

एक स्टडी के अनुसार, जब दो लोग किसी तीसरे व्यक्ति, संस्था या किसी बात पर एक जैसी नाराजगी रखते हैं, तो वे बहुत जल्दी करीब आ जाते हैं। ये कॉमनैलिटी ही उन्हें एक-दूसरे के करीब लाती है, लेकिन दोस्ती का आधार सिर्फ शिकायत और चुगली हो, तो सावधान हो जाना चाहिए। समय बीतने के साथ इस रिश्ते में कोई सुकून नहीं मिलता, सिर्फ मेंटल स्ट्रेस ही हाथ आता है। इसलिए चुगली या किसी नेगेटिव बात के आधार पर बनी दोस्ती मेंटल हेल्थ के लिए ठीक नहीं होती और आपके लिए ही चिंता की वजह बन जाती है।