नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Kasauli Travel: कसौली समुद्र तल से लगभग 1951 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, लेकिन परवानू तक चढ़ाई या ऊंचाई का उतना एहसास नहीं होता। धर्मपुर तक सड़कें अच्छी हैं और डबल लेन भी, तो गाड़ियां पूरी रफ्तार से दौड़ती हैं। उसके बाद ही पहाड़ के घुमावदार रास्ते से गुजरते हुए घाटी और धौलाधर पर्वत श्रृंखला का दीदार होता है। प्रकृति का रंग बदलने लगता है। हलकी, गुनगुनी ठंडक हवा में तैर जाती है। आकाश में बादलों की सूरज के साथ आंख-मिचौली सुहावनी लगने लगती है।

रस्किन की जन्मस्थली

देवदार के सुंदर जंगलों के बीच निर्मल वातावरण को अनुभव करने का एक अलग ही आनंद है। पूरे समय पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देती है। पेड़ों के पत्ते जब आपस में टकराते हैं, तब उनसे भी एक अलग तरह की ध्वनि निकलती है। यही वजह है कि कसौली अनेक लेखकों और रचनाकारों की कर्मस्थली रही है। पढ़ने-लिखने के शौकीनों को मालूम ही होगा कि कसौली से सुप्रसिद्ध लेखक रस्किन बांड का गहरा और पुराना संबंध रहा है। 1934 में यहीं के मिलिट्री अस्पताल में उनका जन्म हुआ था। अपने इंटरव्यूज़ में रस्किन ने बताया है कि कैसे उनके जन्म के समय मां अपनी बहन के घर कसौली आ गई थीं।

गिलबर्ट ट्रेल में नेचर वाक

अमूमन सभी पहाड़ी शहरों के कुछ खास आकर्षण होते हैं- माल रोड, सनसेट पॉइंट, चर्च, मंदिर आदि। कसौली में भी ये सब हैं। कसौली बस स्टैंड से 2 किलोमीटर दूर एक खास ट्रैक विकसित किया गया है जिसे गिलबर्ट ट्रेल कहते हैं। कसौली क्लब से शुरु होकर करीब 1.5 किलोमीटर का यह ट्रेल एयरफोर्स स्टेशन तक जाता है। यहां ट्रैकिंग करते हुए आप प्रकृति की मनोहारी एवं अद्भुत छटा को करीब से देख सकते हैं। प्रकृति प्रेमी से लेकर बर्ड वॉचर्स का यह पसंदीदा ट्रैक है। चारों ओर खिले हुए मनमोहक फूल जादुई एहसास करा रहे थे।

हनुमान जी ने रखा था पांव

कसौली का सबसे पहला उल्लेख महाकाव्य रामायण में मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, लक्ष्मण जी के मूर्छित हो जाने पर हनुमान जी जब संजीवनी बूटी युक्त पहाड़ी लेकर लौट रहे थे, तो यहां स्थित एक पहाड़ी पर उन्होंने अपने पांव रखे थे। उस पैर के आकार वाली पहाड़ी चोटी पर आज एक छोटा-सा मंदिर है, जिसके आसपास बहुत सारे बंदर होते हैं इसलिए इसे मंकी पॉइंट भी कहा जाता है। यह कसौली का सबसे ऊंचा स्थान है, जहां से पूरी घाटी के आकर्षक एवं मनमोहक दृश्यों को देख सकते हैं।

मनमोहक है बड़ोग

चूर चांदनी पहाड़ियों के बीच, देवदार एवं चीड़ के पेड़ों से घिरा बड़ोग कसौली से 21 किलोमीटर दूर है। यहां भी कमोबेश शांति रहती है। परिवार के संग अच्छा समय व्यतीत कर सकते हैं। दोलांजी बान मोनेस्ट्री में शांति की अनुभूति होती है, तो चूर चांदनी पहाड़ी की चोटी स प्रकृति का विहंगम नजारा देखने को मिलता है। यहां लोग ट्रैकिंग के लिए भी आते हैं।

कब जाएं

गर्मियों और सर्दियों के अलावा मानसून सीजन में भी कसौली जा सकते हैं क्योंकि यहां हर मौसम का अपना अलग मजा है। गर्मियों में तापमान 14 से लेकर 27 डिग्री के बीच रहता है। दिन सुहाना और रातें ठंडक भरी होती हैं।

कैसे जाएं

देश के किसी भी हिस्से से कालका रेलवे स्टेशन पहुंच सकते हैं। वहां से टैक्सी या अन्य वाहन मिल जाते हैं। अगर बस से जाना चाहते हैं, तो हिमाचल प्रदेश राज्य परिवहन निगम की बसें कई राज्यों से कसौली के लिए चलती हैं। वैसे, चंडीगढ़ से भी यहां पहुंचा जा सकता है। हवाई जहाज से सफर करने वालों के लिए चंडीगढ़ सबसे करीबी हवाई अड्डा है। वहां से टैक्सी या कैब लेकर कसौली जा सकते हैं।

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Edited By: Priyanka Singh