विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अमीर और गरीब देशों में अलग-अलग हैं डिमेंशिया के कारण, 2 लाख लोगों पर हुई स्टडी ने खोले सेहत से जुड़े राज

Published: Tue, 14 Jul 2026 08:21 AM (IST)

अमीर और गरीब देशों में डिमेंशिया के जोखिम कारक अलग-अलग होते हैं, यह खुलासा 'द लैंसेट हेल्दी लांगेविटी जर्नल' के एक अध्ययन में हुआ है।

अमीर और गरीब देशों में बिल्कुल अलग हैं डिमेंशिया के खतरे (Image Source: AI-Generated)

अमीर और गरीब देशों में बिल्कुल अलग हैं डिमेंशिया के खतरे (Image Source: AI-Generated) 

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

प्रेट्र, नई दिल्ली। 'द लैंसेट हेल्दी लांगेविटी जर्नल' में प्रकाशित एक हालिया शोध ने डिमेंशिया के खतरों को लेकर एक दिलचस्प जानकारी सामने रखी है। इस स्टडी के मुताबिक, डिमेंशिया के आम रिस्क फैक्टर अमीर और गरीब देशों में एक जैसे नहीं होते हैं। आइए जानते हैं इस अहम रिसर्च में क्या-क्या खुलासे हुए हैं।

14 देशों के 2 लाख लोगों पर हुई रिसर्च

यह अध्ययन कोई छोटा-मोटा नहीं था, बल्कि इसे 14 अलग-अलग देशों के 2 लाख से ज्यादा लोगों पर किया गया। इस विस्तृत शोध में यह बात साफ तौर पर उभर कर आई कि डिमेंशिया के वो कारण, जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं (जैसे शिक्षा की कमी और मोटापा)- अधिक आय वाले देशों और कम या मध्यम आय वाले देशों के बीच काफी अलग-अलग पाए जाते हैं।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि अलग-अलग इलाकों में 50 प्रतिशत से अधिक लोगों में कम से कम दो जोखिम कारक एक साथ मौजूद थे।

बदले जा सकते हैं ये खतरे

लैंसेट कमीशन ऑन डिमेंशिया ने अपनी स्टडी में 12 ऐसे जोखिम कारकों का विश्लेषण किया है, जिन्हें इंसान अपनी आदतों में बदलाव करके कंट्रोल कर सकता है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • सुनने की क्षमता का कम होना
  • डिप्रेशन
  • शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना
  • सामाजिक रूप से अलग-थलग रहना

रिसर्च में यह गहराई से जांचा गया कि ये खतरे कितने आम हैं, और उम्र, लिंग व शिक्षा के स्तर के हिसाब से इनमें कितना अंतर आता है। इसके अलावा, यह भी देखा गया कि एक ही व्यक्ति में एक साथ कई रिस्क फैक्टर कितनी बार पाए जाते हैं।

अमेरिका और भारत में मोटापे का असर

इस स्टडी में ज्यादा बॉडी मास इंडेक्स यानी मोटापे को लेकर दो देशों के बीच एक बहुत बड़ा अंतर देखा गया। आंकड़ों के अनुसार:

  • अमेरिका में 44.9% लोग ज्यादा BMI के खतरे से प्रभावित मिले।
  • भारत में यह आंकड़ा काफी कम, मात्र 13.3% ही दर्ज किया गया।

दुनियाभर में एक जैसा है इन बीमारियों का पैटर्न

भले ही अमीर और गरीब देशों में कुछ कारण अलग हों, लेकिन कुछ आदतें और बीमारियां ऐसी हैं जो पूरी दुनिया में एक जैसा असर दिखाती हैं। शोध के अनुसार, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से जुड़े खतरे हों, या फिर धूम्रपान और शराब पीने जैसी जोखिम भरी आदतें, इन सभी का एक साथ पाया जाना पूरी दुनिया में एक ही पैटर्न को दर्शाता है।

यह भी पढ़ें- कैसे लाइफस्टाइल में बदलाव करके डिमेंशिया के आधे मामलों को रोका जा सकता है, क्या कहती है नई रिसर्च?

यह भी पढ़ें- "मेरे लिए तो 5 घंटे की नींद काफी है!" अगर आप भी शान से कहते हैं ये बात, तो सच्चाई कर देगी हैरान