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जिसे आप नॉर्मल समझ रहे हैं, वो हार्ट अटैक की आहट हो सकती है; बीमारी पकड़ने में विदेशी मॉडल नाकाम

Published: Sun, 05 Apr 2026 08:31 AM (IST)

शोध में पाया गया कि लगभग 80 प्रतिशत ऐसे मरीज, जिन्हें बाद में हार्ट अटैक पड़ा, उन्हें पहले से 'ज्यादा जोखिम' वाली श्रेणी में नहीं रखा गया।

हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने वाले पश्चिमी मॉडल भारतीय मरीजों के लिए नहीं होते सटीक (Image Source: AI-Generated)

हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने वाले पश्चिमी मॉडल भारतीय मरीजों के लिए नहीं होते सटीक (Image Source: AI-Generated)

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प्रेट्र, नई दिल्ली। पश्चिमी देशों में विकसित हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने वाले मॉडल भारतीय मरीजों के लिए सटीक नहीं होते और भारतीय संदर्भ में खतरे को कम आंकते हैं। भारत में हृदय रोग कम उम्र (30-40 साल) में ही होने लगते हैं और यहां की जीवनशैली व अनुवांशिकता अलग है, जिसके कारण इन मॉडलों के परिणाम अविश्वसनीय हो सकते हैं।

फेल हो रहे हैं दिल की बीमारी भांपने वाले मॉडल

दिल की बीमारी का अनुमान लगाने वाले कैलकुलेटर भारतीय मरीजों के एक बड़े हिस्से की पहचान करने में असफल हो सकते हैं। नए शोध के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत मरीज, जो अंततः हार्ट अटैक का शिकार हुए, उन्हें पहले 'उच्च जोखिम' के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया था।

Cardiovascular health

(Image Source: Freepik)

यह शोध 'एएससीवीडी ' जोखिम अनुमान माडल की तुलना दक्षिण एशियाई समूह से अंतर्दृष्टि" शीर्षक से है, जिसे फरीदाबाद के गोविंद बल्लभ पंत इंस्टीट्यूट आफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, ईएसआईसी मेडिकल कालेज और एआईआईएमएस के दिल्ली कैंसर रजिस्ट्री सहित विज्ञानियों की एक टीम द्वारा किया गया।

इस अध्ययन में 4,975 पहले हार्ट अटैक के मरीजों पर किया गया, जिसमें पाया गया कि पांच प्रमुख वैश्विक जोखिम अनुमान माडल व्यक्तियों को वर्गीकृत करने में महत्वपूर्ण भिन्नताएं दिखाते हैं, जो दक्षिण एशियाई जनसंख्या के लिए उनकी विश्वसनीयता पर चिंता बढ़ाते हैं।

पश्चिमी मॉडलों में गलत तरीके से किया गया वर्गीकृत

जीबी पंत अस्पताल में कार्डियोलाजी के प्रोफेसर और इस अध्ययन में शामिल शोधकर्ता डॉ. मोहित गुप्ता ने बताया, "जब हम भारतीय हार्ट अटैक के मरीजों को इन पश्चिमी माडलों के माध्यम से डालते हैं, तो उनमें से कई को गलत तरीके से वर्गीकृत किया जाता है। शारीरिक रूप से उन्हें 'उच्च जोखिम' के मरीजों के रूप में माना जाना चाहिए, खासकर क्योंकि हार्ट अटैक का शिकार हुए, लेकिन ये मॉडल उन्हें कम और मध्यम जोखिम की श्रेणियों में रखते हैं, जो रोकथाम के बारे में चिंताएं उठाता है।"

अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया कि भारतीयों में दिल की बीमारी पश्चिमी जनसंख्या की तुलना में अलग तरीके से विकसित होती है, जिसमें पहले शुरू होने और उच्च डायबिटीज के बोझ, विशिष्ट वसा वितरण व मेटोबोलिज्म पैटर्न जैसे जोखिम कारकों का मिश्रण होता है।

Cardiovascular disease

(Image Source: Freepik)

भारतीय मरीज का व्यवहार अन्य मरीजों से अलग

डॉ. गुप्ता ने कहा, भारतीय मरीजों का व्यवहार अन्य मरीजों से अलग होता है। आनुवंशिकी, प्रदूषण, जीवनशैली और तनाव स्तर जैसे कई कारक प्रभाव डालते हैं। केवल भारतीय या दक्षिण एशियाई होना ही एक जोखिम कारक है । हमें अपनी जनसंख्या के लिए एक स्वदेशी जोखिम कैलकुलेटर की तत्काल आवश्यकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि सबसे अच्छे प्रदर्शन करने वाले मॉडल भी उन अधिकांश मरीजों को चिह्नित करने में असफल रहे, जो बाद में तीव्र मायोकार्डियल इन्फार्शन या हार्ट अटैक का शिकार हुए, जो वर्तमान जोखिम अनुमान प्रणालियों में खामियों को उजागर करता है ।

5,000 मरीजों के चिकित्सा रिकार्ड का विश्लेषण

शोधकर्ताओं ने लगभग 5,000 मरीजों के चिकित्सा रिकार्ड का विश्लेषण किया, जो 40-79 वर्ष की आयु के थे और अपने पहले हार्ट अटैक के साथ भर्ती हुए थे।

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