क्या आपको पता है कि अनेक बीमारियां जीवाणुओं और वायरस आदि से नहीं फैलतीं। फिर भी लोग बीमार पड़ते हैं। इसका कारण है अनहेल्दी लाइफस्टाइल, जो आजकल के जमाने में मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य समस्याओं को उत्पन्न करती है। स्वस्थ जीवनशैली के अंतर्गत समुचित खानपान, व्यायाम, पर्याप्त रूप से नींद लेना और सकारात्मक सोच आदि बातों को शामिल किया जाता है। गौरतलब है कि मौसम के अनुसार भी जीवनशैली में बदलाव करना पड़ता है।

बदलते मौसम के मिजाज़ के अनुसार अगर लोग अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करें, तो वे स्वस्थ व सुखी जीवन जी सकते हैं।

डायबिटीज वाले ध्यान दें

डायबिटीज के साथ जिंदगी जी रहे लोगों को गर्मियों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। गर्मियों में शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होने से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है, जो डायबिटीज वालों के लिए समस्या पैदा कर देती है। इसलिए डायबिटीज वालों को पानी अधिक पीना चाहिए कम-से-कम तीन लीटर पानी।

- ग्लूकोमीटर द्वारा नियमित रूप से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा की जांच करें।

- डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दवाओं में बदलाव करना चाहिए।

- आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि डायबिटीज से ग्रस्त व्यक्ति ब्लड शुगर को कंट्रोल नहीं कर पाते। इस कारण उनके रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है इसका मुख्य कारण है इस मौसम में ठंडे पेय, शर्बत, लस्सी व शीतल पेय का सेवन अधिक होता है। आइसक्रीम, कुल्फी से ब्लड शुगर नियंत्रण में नहीं रहती। डायबिटीज वालों को फलों में जामुन, सेब, संतुलित मात्रा में तरबूज व खरबूज का सेवन करना चाहिए।

हाई ब्लड प्रेशर रहेगा काबू में

गर्मियों के मौसम में आमतौर पर ब्लड प्रेशर सर्दियों की तुलना में 10 मि.मी. कम हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि सर्दियों में रक्तवाहिनी (ब्लड वेसेल्स)ठंड के कारण सिकुड जाती हैं और गर्मियों में यानी अप्रैल-मई में जब तापमान में वृद्धि होती है, तो रक्तवाहिनियां फैल जाती हैं और धमनियों पर ब्लड का प्रेशर कम होता है। हाई ब्लड प्रेशर के मरीज डॉक्टर से परामर्श कर अपनी दवा की डोज को कम कर सकते हैं। इसी प्रकार जो व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए डाईयूरिक दवाएं (जिनसे पेशाब ज्यादा होती है) लेते हैं, उन्हें इन दवाओं की मात्रा कम कर देनी चाहिए। ऐसा देखा गया है कि जो लोग इन दवाओं का सेवन करते हैं, उनमें गर्मी में पसीना आने के कारण शरीर में पानी की कमी (डीहाइडे्रशन) तथा आवश्यक लवण सोडियम की कमी हो जाती है। इसके परिणास्वरूप सुस्ती, उदासी, कमजोरी महसूस होती है। ऐसी दवाओं को डॉक्टर के परामर्श से बंद कर देना चाहिए।

जांच करवाएं 

अगर गर्मियों में उल्टी या दस्त हो जाएं तो ब्लड प्रेशर की जांच करवा लें और डॉक्टर को यह जरूर बताएं कि किन दवाओं का सेवन नियमित रूप से कितने समय से कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में ब्लडप्रेशर कम हो जाता है। इसलिए इलाज करने वाले डॉक्टर के समक्ष रोगी को अपनी दवाओं की पूरी जानकारी देना जरूरी है।

पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं। 

गर्मियों में आमतौर पर 10 से 12 गिलास पानी पीना चाहिए। अगर किडनी रोग है, दिल की बीमारी है तो डॉक्टर से बात करने के बाद ही पानी संतुलित मात्रा में पिएं।

खानपान पर दें ध्यान

आहार में तले हुए खाद्य पदार्थ जैसे पूड़ी, कचौड़ी,समोसा और अन्य वसायुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कम-से-कम करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इस मौसम में मेटाबॉलिज्म सर्दियों की तुलना में ज्यादा एक्टिव नहीं होता। इसलिए हरी सब्जियां, दही, लौकी, तोरई, भिंडी, टिंडा, छाछ, आम का पना का सेवन अधिक करना चाहिए।

खीरा, ककड़ी, तरबूज, टमाटर में पानी की मात्रा 90 प्रतिशत तक होती है इसलिए ऐसे फलों का सेवन ज्यादा करना चाहिए। चाय, कॉफी का सेवन भी कम करें। नीबू पानी, शिकंजी, अमरस, ठंडाई आदि पेय पदार्थों फायदेमंद होते हैं। अधिक मात्रा में प्रोटीन यानी आहार में अंडे, मांस, मछली आदि भी नहीं खाना चाहिए। आम, लीची, अंगूर शीतलता प्रदान करने वाले फल हैं, जो हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीजों के लिए अच्छे हैं लेकिन डायबिटीज के रोगियों के लिए ये फल सही नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि इनकी ग्लाइसीमिक इंडेक्स बहुत अधिक होती है। इसलिए रक्त में ग्लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है। डायबिटीज वालों को जामुन और सेब का सेवन लाभप्रद होता है।

शारीरिक श्रम

गर्मियों में आमतौर पर सुबह 30 मिनट तक टहलना ही बेहतर है। कमरे का तापमान भी 25 से 30 डिग्री तक रहे तो अच्छा है। धूप में जरूरत पड़ने पर ही निकलें। जरूरत पडे तो पानी की बोतल साथ लेकर निकलें। सिर ढकने के लिए छाते का इस्तेमाल करें। अधिक शारीरिक श्रम या व्यायाम करने से पसीना ज्यादा निकलता है, जिससे शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।

वृद्ध रखें खास ख्याल 

वृद्ध लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। लगभग 70 फीसदी से ज्यादा बूढ़े लोग हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त हैं। इसलिए आपको प्रात:काल ही टहलना चाहिए। ग्लूकोमीटर से ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करनी या करानी चाहिए। अपने डॉक्टर से परामर्श कर दवाओं की मात्रा को सुनिश्चित करना चाहिए। हरी सब्जी व दो फलों का सेवन करना चाहिए। 10 बजे से सायं 5 बजे तक धूप में बाहर नहीं निकलना चाहिए।

डॉ. अनिल चतुर्वेदी

प्रीवेंटिव हेल्थ व जीवनशैली रोग विशेषज्ञ, दिल्ली

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Posted By: Priyanka Singh

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