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जहरीली हवा से बढ़ रहा है अल्जाइमर का खतरा, पौने तीन करोड़ लोगों पर हुई रिसर्च में बड़ा खुलासा

Published: Fri, 20 Feb 2026 08:51 AM (IST)

अमेरिका की एमोरी यूनिवर्सिटी के एक बड़े अध्ययन से खुलासा हुआ है कि प्रदूषित हवा, खासतौर से पीएम 2.5 कण, ...और पढ़ें

वायु प्रदूषण से अल्जाइमर्स का ज्यादा जोखिम (Image Source: Freepik)

वायु प्रदूषण से अल्जाइमर्स का ज्यादा जोखिम (Image Source: Freepik) 

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प्रेट्र, नई दिल्ली। बुढ़ापे में याददाश्त का कमजोर होना एक आम समस्या मानी जाती है। अब तक वैज्ञानिक भी इसके पीछे के ठोस कारणों का पता नहीं लगा पाए हैं, लेकिन एक हालिया अध्ययन ने एक बड़े खतरे की ओर इशारा किया है और वह है हमारे आस-पास मौजूद प्रदूषित हवा। जी हां, नई रिसर्च के मुताबिक, खराब हवा में सांस लेने से इस गंभीर बीमारी का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

Toxic Air Increases Alzheimers Risk

(Image Source: Freepik) 

अमेरिका में हुई एक बहुत बड़ी रिसर्च

अमेरिका की 'एमोरी यूनिवर्सिटी' के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर एक बहुत बड़ा अध्ययन किया है। यह रिसर्च अमेरिका के लगभग पौने तीन करोड़ लोगों के डेटा पर की गई है। इसके चौंकाने वाले नतीजे 'पीएलओएस मेडिसिन' नाम के मशहूर मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। इस अध्ययन के लिए साल 2000 से लेकर 2018 के बीच के उन लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिनकी उम्र 65 वर्ष या उससे अधिक थी।

सीधे दिमाग पर वार करता है 'PM 2.5'

अध्ययन में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि हवा में मौजूद खतरनाक प्रदूषक कण, जिन्हें 'PM 2.5' कहा जाता है, अल्जाइमर का खतरा बढ़ा देते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने का सबसे ज्यादा और सीधा असर हमारे दिमाग की सेहत पर पड़ता है। यह प्रदूषण हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और डिप्रेशन का जोखिम भी बढ़ाता है, जो अल्जाइमर से जुड़ी बीमारियां हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण इन बीमारियों के जरिए नहीं, बल्कि सीधे तौर पर दिमाग पर वार करके अल्जाइमर का खतरा ज्यादा बढ़ाता है।

किन्हें है सबसे ज्यादा खतरा?

हवा का यह जहर वैसे तो हर किसी के लिए नुकसानदेह है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है:

  • स्ट्रोक के मरीज: जिन लोगों को पहले कभी स्ट्रोक आ चुका है, उन पर वायु प्रदूषण का सबसे बुरा असर होता है।
  • हाई बीपी के मरीज: हाई ब्लड प्रेशर जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोग भी इस जहरीली हवा के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं।

बचाव का तरीका क्या है?

एमोरी यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम का मानना है कि 'डिमेंशिया' जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए हवा की गुणवत्ता में सुधार करना बेहद जरूरी है। साफ हवा ही हमारे दिमाग को भविष्य के खतरों से सुरक्षित रखने की एक अहम चाबी हो सकती है।

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