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दादी-नानी की हर सलाह अंधविश्वास नहीं! प्रेग्नेंसी से जुड़ी इन बातों को मानता है साइंस भी

Published: Thu, 16 Jul 2026 04:30 PM (GMT+05:30)

प्रेग्नेंसी से जुड़ी ऐसी बहुत सी पुराने जमाने की बातें हैं, जिन्हें लोग ओल्ड फैशन या अंधविश्वास समझकर अनदेखा कर देते हैं।

प्रेग्नेंसी से जुड़ी दादी-नानी की वो बातें जिनके पीछे है वैज्ञानिक आधार (Image Source: AI Generated)

प्रेग्नेंसी से जुड़ी दादी-नानी की वो बातें जिनके पीछे है वैज्ञानिक आधार (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या प्रेग्नेंसी को लेकर घरों में दी जा रही दादी-नानी की सलाह हमेशा अंधविश्वास होती है या फिर इनके पीछे कोई वैज्ञानिक आधार भी है? यह सवाल मन में कभी न कभी तो जरूर आया होगा पर जवाब शायद ही कोई जानता हो। आज हम प्रेग्नेंसी से जुड़ी उन्हीं मान्यताओं और बातों पर चर्चा करने वाले हैं, जिन्हें भले ही लोग ओल्ड फैशन समझकर नजरअंदाज कर देते हों लेकिन इन्हें खुद साइंस भी मानता है। यहां डॉक्टर खुशबू बता रही हैं इन सभी बातों का सच।

प्रेग्नेंसी से जुड़ी दादी-नानी की वो बातें जिनके पीछे है वैज्ञानिक आधार 

दादी-नानी की कई बातों को हम इसलिए अनसुना कर देते हैं क्योंकि इनके पीछे कोई लॉजिक नजर नहीं आता। इसमें भी बात अगर प्रेग्नेंसी की हो तो डॉक्टर की सलाह को ही प्राथमिकता देते हैं, लेकिन इन बड़े-बुजुर्गों की कई बातें ऐसी हैं जिनके पीछे वैज्ञानिक आधार है: 

प्रेग्नेंसी के समय घी खाना 

प्रेग्नेंसी के समय घी खाने को भले ही ओल्ड फैशन कहा जाए पर साइंस इसे फैटी एसिड सप्लीमेंटेशन कहता है। घी में पाया जाने वाला ब्यूटिरिक एसिड भ्रूण के दिमागी विकास और आंत की परत बनने में मदद करता है। इसके अलावा, यह प्रेग्नेंसी में मदर के हॉर्मोन्स को भी बैलेंस करता है। 

प्रेग्नेंसी में गुस्सा न करना 

इस दौरान गर्भवती के गुस्सा करने पर दादी-नानी का टोकना अंधविश्वास लग सकता है, लेकिन साइंस इसे मेटरनल कोर्टिसोल ट्रांसफर मानता है। इन दिनों में मदर का स्ट्रेस लेना प्लेसेन्टल बैरियर को क्रॉस कर सीधे भ्रूण के दिमाग और नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। 

बेबी के लिए पढ़ो, गाओ और बातें करो 

शायद आप जानते होंगे कि प्रेग्नेंसी के 18 हफ्तों के बीच भ्रूण के सुनने की क्षमता विकसित हो जाती है। अगर मां बेबी से इस समय बातें करती है, उसके लिए पढ़ती है या गाती है तो मां और बच्चे के बीच इमोशनल बान्डिंग मजबूती होती है। सबसे जरूरी बात कि साइंस इस चीज को बहुत सपोर्ट करता है, यानि दादी-नानी सही कहा करती थीं। 

प्रेग्नेंसी में अकेले मत खाओ 

प्रेग्नेंसी में अकेले न खाने के पीछे हमें इमोशनल वजह लग सकती है, लेकिन साइंस इसे साइकोसोशल मॉडल मानता है। खाते समय एक महिला कैसा महसूस करती है, इसका सीधा असर पाचन, पोषक तत्वों के अवशोषण और कोर्टिसोल लेवल पर पड़ता है। ऐसे समय में महिला के अकेले खाने से प्रेग्नेंसी के समय एंग्जायटी और डिलीवरी के बाद डिप्रेशन का खतरा ज्यादा रहता है। 

खूब आराम करो 

महिला को प्रेग्नेंसी के समय खूब आराम करना चाहिए क्योंकि मदर जितना स्ट्रेस लेती है, उसका असर भ्रूण के नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। यह समझना जरूरी है कि आराम एक कम्फर्ट नहीं बल्कि बच्चे के लिए न्यूरोलॉजिकल प्रोटेक्शन है। 

बालों, पेट और पैरों पर तेल की मालिश 

दादी-नानी का ऐसा कहना एक रिचुअल लग सकता है, पर धीरे से किया जाने वाला यह टच पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को ऐक्टिवेट करता है। यह कोर्टिसोल और हार्ट रेट कम कर मदर और बेबी को सेफ्टी का सिग्नल देता है।