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पाचन खराब है, तो कमजोर हो सकती है आपकी याददाश्त; स्टडी में सामने आया गट और ब्रेन का कनेक्शन

Published: Sun, 15 Mar 2026 11:03 AM (IST)

वैज्ञानिकों ने पाया है कि उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त कमजोर होने का संबंध पाचन तंत्र से है।

उम्र के साथ याददाश्त कम होने का है डर? अपनी 'गट हेल्थ' सुधारें और दिमाग को रखें हमेशा जवान (Image Source: Freepik)

उम्र के साथ याददाश्त कम होने का है डर? अपनी 'गट हेल्थ' सुधारें और दिमाग को रखें हमेशा जवान (Image Source: Freepik) 

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

प्रेट्र, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि उम्र के साथ याददाश्त कमजोर होने का सीधा संबंध हमारे पेट और पाचन तंत्र से हो सकता है? आमतौर पर हम मानते हैं कि याददाश्त का कम होना उम्र बढ़ने का एक सामान्य हिस्सा है। लेकिन, हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक शोध ने यह साबित किया है कि हमारी आंतों में मौजूद बैक्टीरिया और हमारे मस्तिष्क के बीच एक गहरा नाता है, जो हमारी याददाश्त को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

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(Image Source: Freepik) 

क्या कहता है यह नया शोध?

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता क्रिस्टोफ थाइस और उनकी टीम ने यह जानने की कोशिश की कि आखिर क्यों कुछ लोग बहुत वृद्ध होने पर भी मानसिक रूप से एकदम तेज रहते हैं, जबकि अन्य लोगों की याददाश्त 50 या 60 वर्ष की उम्र से ही कमजोर होने लगती है।

प्रतिष्ठित 'नेचर' पत्रिका में प्रकाशित यह शोध चूहों पर किया गया। इस अध्ययन से एक चौंकाने वाली बात सामने आई कि याददाश्त में गिरावट कोई पहले से तय प्रक्रिया नहीं है। असल में, हमारा शरीर इसे सक्रिय रूप से नियंत्रित करता है और इस पूरी प्रक्रिया में हमारा पाचन तंत्र सबसे अहम भूमिका निभाता है।

गट और ब्रेन का कनेक्शन

इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए हमें अपने पेट के अंदर चल रही गतिविधियों को समझना होगा:

  • गट माइक्रोबायोम: हमारी आंतों में प्राकृतिक रूप से कई तरह के बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जिनकी आबादी को 'गट माइक्रोबायोम' कहा जाता है।
  • उम्र का प्रभाव: जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, इन जीवाणुओं की संरचना में बदलाव आने लगता है। इनमें से कुछ जीवाणु हमारे लिए दूसरों की तुलना में अधिक फायदेमंद होते हैं।
  • सूजन और रुकावट: पाचन तंत्र में मौजूद प्रतिरक्षा कोशिकाएं आंत के इन बदलावों को तुरंत भांप लेती हैं और शरीर में एक सूजन प्रतिक्रिया पैदा करती हैं।

यह सूजन हमारे शरीर की वेगस नर्व्स के काम में बाधा डालती है। वेगस तंत्रिका का मुख्य काम आंत से मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस तक संकेत भेजना है (हिप्पोकैम्पस मस्तिष्क का वह हिस्सा है जो हमारी याददाश्त और दिशा-निर्देशन के लिए जिम्मेदार होता है)। जब ये संकेत मस्तिष्क तक सही से नहीं पहुंचते, तो इंसान की याददाश्त कमजोर होने लगती है।

क्या इस समस्या को पलटा जा सकता है?

इस अध्ययन की सबसे बड़ी और सकारात्मक खोज यह है कि उम्र के साथ होने वाली इस स्मृति हानि को ठीक किया जा सकता है। प्रयोग के दौरान, जब उम्रदराज चूहों की आंत से मस्तिष्क तक संकेत भेजने वाली 'वेगस तंत्रिका' को उत्तेजित किया गया और उनके गट माइक्रोबायोम की संरचना में बदलाव किया गया, तो देखा गया कि उनकी याददाश्त वापस तेज हो गई। इसका सीधा अर्थ यह है कि आंत के जीवाणुओं को नियंत्रित करके उम्र से जुड़ी याददाश्त की समस्याओं को दूर करने की दिशा में यह एक बड़ी कामयाबी है।

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