नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। एक नई रिसर्च से पता चला है कि वायरस अपने पर्यावरण से जानकारी का उपयोग यह तय करने के लिए कर रहे हैं कि कब अपने मेज़बान के अंदर कसकर बैठना है और कब फैलना है और मेज़बान सेल को मारना है। इस वक्त, वायरस अपने फायदे के लिए अपने पर्यावरण की निगरानी करने की क्षमता का लाभ उठा रहे हैं। शोध में शामिल एक वैज्ञानिक ने कहा, "लेकिन भविष्य में, 'हम इसका फायदा उनके नुकसान के लिए उठा सकते हैं।"

सुनने और समझने की क्षमता रखता है वायरस

जैविक विज्ञान के प्रोफेसर और इस रिसर्च के वरिष्ठ मेंबर इवान एरिल कहते हैं, एक वायरस की अपने मेज़बान द्वारा उत्पादित तत्वों सहित अपने पर्यावरण को समझने की क्षमता, "वायरल-होस्ट इंटरैक्शन में जटिलता की एक और परत" जोड़ती है। इस वक्त वायरस अपने फायदे के लिए अपनी क्षमताओं को टेस्ट कर रहे हैं। लेकिन भविष्य में, "हम इसका फायदा उठाकर उन्हें ख़त्म करने में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।"

नई रिसर्च का फोकस बैक्टीरियोफेज पर है- ऐसे वायरस जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं, इसे अक्सर "फेजेस" (Phages) के रूप में जाना जाता है। अध्ययन में फेजेस सिर्फ अपने मेज़बानों को संक्रमित कर सकते हैं, जब जीवाणु कोशिकाओं में विशेष उपांग होते हैं, जिन्हें पिली और फ्लैगेला कहा जाता है, जो बैक्टीरिया को स्थानांतरित करने और संभोग करने में मदद करते हैं।

बैक्टीरिया CtrA नामक एक प्रोटीन का उत्पादन करते हैं, जो इन उपांगों को उत्पन्न करने पर नियंत्रित करता है। नए पेपर से पता चलता है कि कई उपांग-आश्रित चरणों में उनके डीएनए में पैटर्न होते हैं, जहां CtrA प्रोटीन संलग्न हो सकता है, जिसे बाइंडिंग साइट कहा जाता है। एरिल का कहना है कि एक फेज का मेज़बान द्वारा उत्पादित प्रोटीन के लिए बाइंडिंग साइट होना असामान्य है।

रणनीति बनाकर करते हैं अटैक

एरिल कहते हैं कि हम फेजेस के बारे में जो भी कुछ जानते हैं, उनके द्वारा विकसित की गई हर एक विकासवादी रणनीति वायरस को फायदा पहुंचाती है, जो पौधों और जानवरों को संक्रमित करते हैं। इसलिए अगर फेजेस अपने मेज़बान को सुन रहे हैं, तो वायरस जो इंसानों को प्रभावित करते हैं, वे भी यही करेंगे।

ऐसे कुछ अन्य उदाहरण भी हैं, जहां देखा गया है कि फेजेस (phages) किस तरह अपने परिवेश को पेचीदा तरीकों से मॉनिटर करते हैं, लेकिन कई बैक्टीरियल मेज़बानों पर हमला करने के लिए एक ही रणनीति का उपयोग करने वाले कई फेजेस को शामिल नहीं किया गया है। एरिल के अनुसार, यह पहला ऐसा अध्ययन जिसमें ऐसे प्रमाण मिले हैं कि फेजेस, सेल गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस पर भविष्य में और भी रिसर्च की जाएगी।

नई रिसर्च से मिलेंगे नए उपचार के तरीके

एरिल ने बताया कि इस रिसर्च से सबसे महत्वपूर्ण बात यही पता चली है कि वायरस निर्णय लेने के लिए "सेलुलर इंटेल" का उपयोग करता है। अगर यह बैक्टीरिया में हो सकता है, तो यह लगभग निश्चित रूप से पौधों और जानवरों में भी हो सकता है। जानवरों ने आने वाले वायरस इस बात को जानने में दिलचस्पी रख सकते हैं कि वे किस तरह के टिशू में हैं या मेज़बान की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की ताकत कितनी है, ताकि वे लंबा जीवित रह सकें और फैलने की रणनिति पर काम कर सकें।

हालांकि, यह रिसर्च जो बताती है कि वायरस किस तरह हमें ज़्यादा बीमार करने की रणनीति बना सकते हैं, लोगों में चिंता बढ़ाने का काम कर सकती है। हालांकि, साथ ही यह नई खोज नए तरह के उपचार के अवसर भी प्रदान करती है।

Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

Picture Courtesy: Freepik

Edited By: Ruhee Parvez

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट