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आपका बच्चा भी चिलचिलाती धूप में स्कूल जा रहा है? डिहाइड्रेशन और लू से बचाने के लिए जरूर पढ़ें ये सलाह

Published: Tue, 28 Apr 2026 05:00 PM (IST)

गर्मी बढ़ जाने के कारण इन दिनों बच्चों में डिहाइड्रेशन, पेट दर्द और उलटी जैसी समस्याएं देखने में आ रही हैं। खासकर, स्कूल जाने वालों बच्चों को लेकर सावधानी बरतें।

तेज धूप में कैसे रखें बच्चों को सुरक्षित? (Picture Courtesy: Freepik)

तेज धूप में कैसे रखें बच्चों को सुरक्षित? (Picture Courtesy: Freepik)

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समय कम है?

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संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आमतौर पर मई महीने के मध्य से तेज गर्मी और लू के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं देखने में आती हैं। लेकिन इस बार अभी से ही पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार चुका है। कई स्थानों पर यह 45 के पार पहुंचने लगा है। 

यही कारण है कि डिहाइड्रेशन, डायरिया, बुखार और उल्टी जैसी समस्याएं दिखने लगी हैं। इस समय स्कूल जाने वाले बच्चों को गर्मी के प्रकोप से बचाने की जरूरत है। उनके खानपान और स्वच्छ पानी को लेकर भी सतर्क होने की जरूरत है। आइए पढ़ें डॉ. प्रवीण मखीजा (प्रिंसिपल कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक्स, मैक्स अस्पताल, नई दिल्ली) की सलाह। 

डिहाइड्रेशन से बचाव जरूरी 

इस समय तापमान सामान्य से काफी ज्यादा हो गया है। यह बच्चे ही नहीं वयस्कों के लिए भी बर्दास्त करना मुश्किल है। स्कूल जाने वाले बच्चों को हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचाने की जरूरत है। हमें समझना होगा कि इंसान का शरीर खुले में 44-45 डिग्री सेल्सियल तापमान सहने की स्थिति में नहीं होता है। ऐसी दशा में जितना हो सके ठंडी जगह पर रहने और खूब पानी पीने की कोशिश करनी चाहिए। 

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(AI Generated Image)

तेज धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए। स्कूल बसें एसी वाली होनी चाहिए ताकि बच्चों को गर्मी के चलते कोई परेशानी न हो। बच्चे को कार के अंदर शीशे बंद करके नहीं छोड़ना चाहिए। धूप और गर्मी के चलते ड्राइनेस, डिहाइड्रेशन, प्यास लगने, यहां तक बेहोशी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। 

शरीर में पानी की कमी होने पर यूरिन कम हो जाता है। तापमान को नियंत्रित करने के लिए शरीर से पसीना निकलता है। एक सीमा के बाद शरीर की गर्मी सहने की सीमा खत्म हो जाती है, जिससे हीट स्ट्रोक या बेहोशी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। बुखार, थकान, उलटी, ब्लडप्रेशर लो हो जाने, अचानक हाथों-पैरों के ठंडा होने जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

बच्चों को लेकर सतर्कता

बच्चों को सुबह ठंड में स्कूल भेजना चाहिए और स्कूल से आते समय उन्हें धूप से बचाकर रखना चाहिए। ध्यान रखें कि बच्चे 11 बजे से चार बजे तक बाहर न निकलें। स्कूल में भी बच्चों को अंदर ही रखना चाहिए और उनके खेलने-कूदने की व्यवस्था अंदर ही होनी चाहिए। खुले में कोई भी एक्टिविटी कराने से बचना चाहिए।

बच्चों के खानपान को लेकर सतर्कता

धूप और गर्मी से बचाने के लिए बच्चों के हाइड्रेशन का खयाल रखना होगा। बच्चे को शुगर एडेड पेय या कार्बोनेटेड ड्रिंक्स देने के बजाय बोतल में ठंडा पानी, मौसमी और ताजे फलों का जूस, नारियल पानी, नींबू पानी देना चाहिए। साथ ही, छाछ, शिकंजी, लस्सी आदि का सेवन भी लाभकारी है। गर्मी के दिनों में इस तरह के खानपान की परंपरा रही है और यह बहुत उपयोगी भी है। गर्मी से बचाव में खानपान को लेकर सतर्कता बहुत जरूरी है। अभी हमारा लक्ष्य डिहाइड्रेशन से बचाव का होना चाहिए।

गर्मी से परेशानी होने पर करें उपाय

  • अगर गर्मी के कारण बच्चे को परेशानी हो रही है, तो उसे तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं।
  • अगर बच्चा गर्मी के कारण बेहोश हो रहा है तो सबसे पहले उसे आरामदायक जगह पर लेकर उससे सामान्य करें।
  • अगर आप सोचेंगे कि बच्चा छोटा, गर्मी लग गई है या हल्का बुखार हो रहा है, तो इससे परेशानी बढ़ सकती है। ऐसी दशा में तुरंत डाक्टर से मिलना चाहिए।
  • बच्चे को नारियल पानी, ओआरएस और घर का बना ही भोजन देना चाहिए। स्वच्छता का ध्यान रखना और स्ट्रीट फूड से दूरी बनाकर रखना अनिवार्य है।