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चक्कर आना, धुंधला दिखना या अचानक कम सुनाई देना: कहीं आपका दिमाग किसी खतरे का इशारा तो नहीं कर रहा?

Published: Sun, 07 Jun 2026 07:00 AM (IST)

आंख, कान या शरीर के संतुलन में अचानक आई समस्याएं न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का संकेत हो सकती हैं। आइए, 8 जून ...और पढ़ें

आपका दिमाग तो नहीं दे रहा किसी बड़े खतरे की घंटी? (Image Source: AI-Generated)

आपका दिमाग तो नहीं दे रहा किसी बड़े खतरे की घंटी? (Image Source: AI-Generated) 

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमारी आंखें, कान और शरीर का संतुलन सिर्फ हमारी सुविधा के लिए नहीं हैं। असल में, ये हमारे दिमाग का ही एक अहम हिस्सा हैं। ये तीनों एक बेहद जटिल न्यूरोलॉजिकल नेटवर्क के जरिए एक साथ काम करते हैं।

जब इनमें से किसी में भी अचानक कोई परेशानी आती है, तो समझ लीजिए कि आपका दिमाग आपको किसी खतरे के प्रति आगाह करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है- क्या आप अपने शरीर की इन चेतावनियों को समझ पा रहे हैं? आइए, मेदांता अस्पताल, नोएडा में न्यूरोसाइंसेस विभाग के डायरेक्टर और हेड, डॉ. मनीष वैश्य से विस्तार से जानते हैं इस बारे में।

dizziness staggering neurological causes

(Image Source: AI-Generated) 

सिर्फ थकान नहीं है आंखों से जुड़ी समस्या

आजकल धुंधला दिखना, चीजें दो-दो दिखाई देना, अचानक आंखों की रोशनी कम होना, या आंखों के सामने चमक और धब्बे महसूस होने को हम अक्सर थकान या ज्यादा मोबाइल स्क्रीन देखने का नतीजा मान लेते हैं। कई बार यह सच भी होता है।

लेकिन, अगर देखने से जुड़ी कोई भी समस्या अचानक हो जाए या लगातार बनी रहे, तो यह रेटिनल डिटैचमेंट, ग्लूकोमा, डायबिटिक आई डिजीज या फिर स्ट्रोक और ब्रेन ट्यूमर जैसी किसी गंभीर दिमागी बीमारी का संकेत हो सकती है।

डॉ. मनीष का कहना है कि अगर अचानक आंखों की रोशनी कम होने के साथ-साथ तेज सिरदर्द हो, चेहरे पर कमजोरी महसूस हो या बोलने में लड़खड़ाहट हो, तो यह एक 'न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी' है। ऐसे में अपनी अगली रूटीन अपॉइंटमेंट का इंतजार बिल्कुल न करें, तुरंत अस्पताल पहुंचें।

कानों से अचानक कम सुनाई देना

अगर आपको 72 घंटों के भीतर अचानक से कम सुनाई देने लगे, जिसे Sudden sensorineural hearing loss कहते हैं, तो यह एक बड़ी मेडिकल इमरजेंसी है। बहुत से मरीज यह सोचकर अपने कीमती दिन बर्बाद कर देते हैं कि "शायद यह अपने आप ठीक हो जाएगा।" डॉक्टर बताते हैं कि इलाज में की गई यही देरी अक्सर लोगों से उनकी सुनने की क्षमता हमेशा के लिए छीन लेती है।

इसके अलावा, कानों में लगातार सीटी जैसी आवाजें आना, आवाजों का धुंधला हो जाना, कान भरा हुआ महसूस होना या भीड़ में लोगों की बातें समझने में दिक्कत होना- इन सबको सिर्फ "बढ़ती उम्र का असर" मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण कान के अंदरूनी हिस्से की समस्या, एकॉस्टिक न्यूरोमा या वैस्कुलर डिजीज की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं।

सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाने वाला लक्षण

चक्कर आना और शरीर का लड़खड़ाना कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिन्हें लोग अक्सर "स्ट्रेस" या "लो बीपी" का नाम देकर सालों तक सहते रहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि वेस्टिबुलर डिसऑर्डर, सेरिबैलम से जुड़ी दिक्कतें, पोस्टीरियर सर्कुलेशन स्ट्रोक, पार्किंसंस डिजीज और मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआत अक्सर इसी तरह संतुलन बिगड़ने से होती है।

अगर आपको बार-बार चक्कर आ रहे हैं, या इसके साथ कमजोरी, देखने में परेशानी या बोलने में दिक्कत महसूस हो रही है, तो यह घर पर रहकर घरेलू नुस्खे आजमाने का वक्त नहीं है।

early brain disease symptoms

(Image Source: AI-Generated) 

ये तीनों आपस में कैसे जुड़े हैं?

हमारी आंखें, कान और शारीरिक संतुलन, ये तीनों एक ही न्यूरोलॉजिकल सर्किट शेयर करते हैं- जिसमें वेस्टिबुलोकोक्लियर नर्व, ब्रेनस्टेम और सेरिबैलम शामिल हैं।

दिमाग के पिछले हिस्से में होने वाली कोई भी गड़बड़ी, जैसे- ट्यूमर, वैस्कुलर मालफॉर्मेशन या डीमाइलिनेटिंग लीजन, इन तीनों को एक ही समय पर प्रभावित कर सकती है। इसलिए, ऐसी स्थिति में सिर्फ किसी एक विशेषज्ञ को दिखाना काफी नहीं होता, बल्कि एक संपूर्ण न्यूरोलॉजिकल जांच करवानी बेहद जरूरी है।

सही समय पर लें फैसला

  • अगर बिना वजह ऐसा कोई लक्षण पहली बार दिखे, तो डॉक्टर से तुरंत अपनी जांच करवाएं।
  • अगर लक्षण बार-बार आ रहे हैं, तो इसे अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाएं।
  • अगर अचानक लक्षण उभरें और साथ में तेज सिरदर्द, कमजोरी या बोलने में दिक्कत हो, तो इसे तुरंत मेडिकल इमरजेंसी मानें।

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