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सावधान! आपके शहर की बढ़ती गर्मी चुपके से छीन रही है आपकी नींद, रिपोर्ट में डराने वाला खुलासा

Published: Thu, 16 Jul 2026 02:16 PM (IST)

हर दिन बढ़ती गर्मी खतरे की घंटी है क्योंकि यह हमसे हमारी सबसे कीमती चीज नींद छीन रही है।

हर साल 90 घंटे की नींद हो रही कम (Image Source: AI Generated)

हर साल 90 घंटे की नींद हो रही कम (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। डॉक्टर हमेशा से यह कहते आए हैं कि हेल्दी लाइफ के लिए 7-8 घंटे की नींद लेना बहुत जरूरी है, ऐसा न करने पर हमें डिप्रेशन समेत बहुत सी मानसिक और शारीरिक बीमारियां घेर सकती हैं। लेकिन इस मामले में हाल ही में आई एक स्टडी एक और चौंकाने वाला खुलासा कर रही है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु के बदलने से खासकर तापमान के ज्यादा बढ़ने से लोगों की नींद पर सीधे तौर पर फर्क पड़ रहा है। 

हर साल 90 घंटे की नींद हो रही कम 

ग्लोबल क्लाइमेट रिसर्च ऑर्गनाइजेशन क्लाइमेट सेंट्रल की हाल ही में आई रिपोर्ट कहती है कि देश के सबसे गर्म और उमस वाले इलाकों में रह रहे लोगों की हर साल 90 घंटे की नींद कम हो रही है। रिपोर्ट में इसके लिए बढ़ते हुए तापमान को जिम्मेदार ठहराया गया है। 

इस रिपोर्ट में दक्षिण भारत के राज्यों को दुनिया के हॉटस्पॉट्स में गिना गया है, जिसमें तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना शामिल हैं। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से गर्म रातें और तपते दिन केवल गर्मी ही नहीं बढ़ा रहे बल्कि लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिसे लोग गंभीरता से ही नहीं लेते। इनमें भी वो शहर चिंताजनक स्थिति में हैं जहां की आबादी घनी है। 

रिपोर्ट बताती है कि पुडुचेरी में रात में गर्मी ज्यादा होने की वजह से यहां रहने वाले लोगों की औसतन 92 घंटे की नींद हर साल कम हो रही है। रात के बढ़े हुए तापमान के मामले में पुडुचेरी टॉप है और उसके बाद आंध्र प्रदेश जहां हर साल घटती नींद का औसत 88.6 घंटे है। इसके बाद केरल का नाम है, यहां हर साल नींद कम होने का औसत 88.3 घंटे है। 

मेट्रोपॉलिटन सिटी में चेन्नई सबसे ऊपर 

बात करें मेट्रोपॉलिटन सिटी की तो इसमें चेन्नई में रहने वाले लोगों को नींद के मामले में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इस शहर का हर साल के हिसाब से औसत 93 घंटे है। फिर 84 घंटे की औसत कमी के साथ मुंबई और 80 घंटे की औसतन कमी के साथ कोलकाता का नाम शामिल है। बेंगलुरू की स्थिति भी सब में चिंताजनक है क्योंकि यहां के रेजिडेंट्स की हर साल 8 घंटे की एक्स्ट्रा नींद कम हुई है। 

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Source: Climate Central