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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

खिचड़ी है संपूर्ण आहार, पाचन दुरुस्त रखने के साथ ही देता है बीमारियों से लड़ने की शक्ति

By Priyanka SinghEdited By:
Published: Thu, 08 Aug 2019 04:06 PM (IST)Updated: Thu, 08 Aug 2019 04:31 PM (IST)

स्वास्थ्य के लिए और रोग की अवस्था में खिचड़ी का सेवन अत्यंत लाभप्रद है। आइए जानते हैं खिचड़ी की खूबियों के बारे में...

खिचड़ी है संपूर्ण आहार, पाचन दुरुस्त रखने के साथ ही देता है बीमारियों से लड़ने की शक्ति
खिचड़ी है संपूर्ण आहार, पाचन दुरुस्त रखने के साथ ही देता है बीमारियों से लड़ने की शक्ति

पौष्टिकता की दृष्टि से और रोग की अवस्था में खिचड़ी खाना बहुत ही फायदेमंद होता है। खिचड़ी में दाल और चावल दोनों मिलाए जाते हैं। दालों का चयन पीड़ित व्यक्ति के रोग के अनुसार होता है। चावल कार्बोहाइड्रेट्स से भरपूर होता है और दाल से प्रोटीन मिलता है।

संपूर्ण आहार

खिचड़ी में सब्जियां मिलाए जाने से विटामिंस और मिनरल्स भी पूर्ण मात्रा में मिल जाते हैं और यह एक संपूर्ण आहार बन जाती है। इसमें जीरे का तड़का और घी मिलाने से इसका स्वाद और स्वास्थ्य से संबंधित लाभ और भी बढ़ जाते हैं। अगर मूंग की दाल की खिचड़ी खाई जाए तो आपको उसमें कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के अलावा अच्छी खासी मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम, मैगनीशियम, फॉस्फोरस और पोटैशियम आदि पोषक तत्व मिलेंगे।

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तीनों दोषों को कम करे

आयुर्वेद के अनुसार खिचड़ी एक ऐसा व्यंजन है, जिसे दिन भर में कभी भी खाया जा सकता है। यह शरीर से नुकसानदेह तत्वों को दूरकर शरीर के तीन दोषों - वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वात, पित्त और कफ के संतुलन से शरीर को सभी बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है और रोग-प्रतिरोधक तंत्र मजबूत होता है। खिचड़ी बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक है। कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रित रहने से हृदय रोग होने का खतरा कम हो जाता है।

खराब स्वास्थ्य में लाभप्रद

खिचड़ी को आयुर्वेदिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। स्वस्थ अवस्था के अलावा रोग की अवस्था में भी खिचड़ी दी जाती है, क्योंकि यह आसानी से पचने योग्य और पौष्टिक होती है। बुखार, पेट से संबधित समस्या या खराब स्वास्थ्य में डॉक्टर लोगों को खिचड़ी खाने का परामर्श देते हैं। खिचड़ी बुजुर्गों के लिए भी एक अच्छा आहार है। वृद्धावस्था में पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। इसलिए वृद्धों को इसे पचाना आसान होता है। गर्भवती महिलाओं के लिए लाभप्रद

गर्भावस्था के दौरान अक्सर कब्ज या अपच की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में खिचड़ी खाना अत्यंत लाभप्रद है। इसे खाने के बाद पेट में भारीपन, गैस और एसीडिटी की समस्या नहीं होती है और यह शीघ्र ही पच जाती है। जो लोग ग्लूटेन के प्रति संवेदनशील (ग्लूटेन से एलर्जी) होते हैं, उनके लिए भी खिचड़ी लाभप्रद है। ग्लूटेन गेहूं और जौ जैसे कुछ अनाजों में पाया जाता है। ग्लूटेन एलर्जी से ग्रस्त लोगों को पेट से संबंधित समस्या हो जाती है। ऐसे लोगों के लिए खिचड़ी बेहतर विकल्प है, क्योंकि यह पर्याप्त पोषण प्रदान करती है और ग्लूटेन-मुक्त होती है। आयुर्वेद में पित्त दोष की स्थिति में खिचड़ी को दही के साथ खाने का विधान है। अगर पाचन तंत्र कमजोर है तो खिचड़ी में नीबू मिलाकर खाना चाहिए।

अलग अलग प्रदेशों की अलग-अलग परंपरा और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार खिचड़ी देश भर में चाव से खाई जाती है। गुजरात और राजस्थान में बाजरे की खिचड़ी बड़े चाव से खाई जाती है।

देश का सुपरफूड

इन दिनों फास्ट फूड्स और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के बहुत ज्यादा प्रचलन में आने से कम लोग ही खिचड़ी खाते हैं,लेकिन ये सेहत के लिए बहुत ही अच्छी होती है। खिचड़ी को ग्लोबल फूड एक्सपो द्वारा आयोजित व‌र्ल्ड फूड इंडिया 2017 में भारत की ओर से सुपर फूड के रूप में मान्यता दी गई। अब तक खिचड़ी की लोकप्रियता ने इंडियाज नेशनल डिश के रूप में मान्यता प्राप्त की है। अंतत: भारत सरकार ने खिचड़ी को इंडियाज सुपर फूड और और क्वीन ऑफ आल फूड्स के तौर पर दुनिया के समक्ष पेश किया।

मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली की चीफ न्यूट्रीशनिस्ट डॉ. रितिका समादार और आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ.अर्पिता सी राज से विवेक शुक्ला की बातचीत पर आधारित

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