फल-सब्जियों से लेकर पानी तक, हमारे शरीर में ऐसे पहुंच रहे हैं 10 घातक टॉक्सिन्स
माइक्रोबायोटक्स के एक अध्ययन में भारत के 9 राज्यों के शहरी लोगों के खून में कीटनाशक, एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड और 'फॉरएवर केमिकल्स' जैसे घातक रसायन पाए गए हैं।

78% भारतीयों के खून में मिले कीटनाशक अवशेष (Image Source: AI-Generated)

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एएनआई, नई दिल्ली। आजकल हम अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी सचेत रहते हैं, यह स्वाभाविक भी है, लेकिन सोचिए, क्या हो अगर जहर हमारे रोजमर्रा के खाने, पानी और पर्यावरण में ही छिपा हो? हाल ही में आंतरिक स्वास्थ्य स्टार्टअप 'माइक्रोबायोटक्स' ने एक ऐसा ही हैरान करने वाला अध्ययन किया है।
इस अध्ययन में भारत के 9 राज्यों और 14 शहरों की शहरी आबादी के 200 लोगों के खून के नमूनों की गहराई से जांच की गई। इसका मुख्य उद्देश्य हमारे शरीर में छिपे हुए रसायनों- जैसे कीटनाशक, एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड और हमेशा बने रहने वाले केमिकल्स की मौजूदगी और उनके जहरीले प्रभाव का पता लगाना था।

(Image Source: AI-Generated)
शरीर में छिपे केमिकल्स का जाल
इस रिपोर्ट के आंकड़े हमारी सेहत पर चुपचाप मंडरा रहे एक बड़े खतरे की ओर इशारा करते हैं:
- कीटनाशकों का भारी असर: जांच किए गए लोगों में से 78 प्रतिशत के खून में कीटनाशकों के खतरनाक अवशेष पाए गए। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि 36 प्रतिशत लोग 3 या उससे अधिक प्रकार के कीटनाशकों के संपर्क में थे, जो एक बहुत गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।
- एंटीबायोटिक्स की मौजूदगी: खून के 54 प्रतिशत नमूनों में एंटीबायोटिक्स मिले हैं। यह स्थिति एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (यानी जब दवाएं शरीर पर असर करना बंद कर देती हैं), मुश्किल से ठीक होने वाले संक्रमण और आंतों के माइक्रोबायोम को बिगाड़ने का कारण बन सकती है। इससे मेटाबोलिक बीमारियां भी पनप सकती हैं।
- स्टेरॉयड का बढ़ता खतरा: परीक्षण में शामिल 39 प्रतिशत लोग स्टेरॉयड (ग्रोथ रेगुलेटर्स) के संपर्क में पाए गए। इसके कारण एंडोक्राइन प्रणाली में गड़बड़ी हो सकती है और कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
- 'फॉरएवर केमिकल्स' की पुष्टि: 38 प्रतिशत लोगों में इन रसायनों का टेस्ट पॉजिटिव आया है। ये ऐसे स्थायी और खतरनाक पदार्थ हैं जो शरीर और पर्यावरण में आसानी से नष्ट नहीं होते। ये कैंसर के जोखिम को बढ़ाने के साथ-साथ प्रजनन क्षमता में कमी, थायरॉयड, हार्मोनल दबाव, हाई कोलेस्ट्रॉल, लिवर को नुकसान और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी बीमारियों से सीधे तौर पर जुड़े हैं।
17% सैंपल्स में एक साथ मिले 10 घातक टॉक्सिन्स
अध्ययन में एक बहुत ही डराने वाली बात यह भी सामने आई कि 17 प्रतिशत नमूनों में तीन अलग-अलग श्रेणियों के 10 या उससे अधिक विषाक्त पदार्थ एक साथ पाए गए। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि लोग जाने-अनजाने में लंबे समय से इन छिपे हुए रसायनों और कीटाणुनाशकों के संपर्क में हैं।
यह जहर हमारे शरीर में कैसे पहुंच रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, ये खतरनाक रसायन कोई एक दिन में नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- रोजाना का खान-पान: हम जो भी दैनिक आहार ले रहे हैं, उसके माध्यम से।
- प्लास्टिक का इस्तेमाल: रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक की चीजों का अत्यधिक उपयोग।
- दूषित भूजल: जमीन के नीचे का वह पानी जिसे हम पीते या इस्तेमाल करते हैं।
- पर्यावरणीय प्रदूषण: हमारे आस-पास फैला हुआ हवा और पानी का प्रदूषण।
यह अध्ययन इस बात का एक स्पष्ट संकेत है कि हमें अपने खान-पान और पर्यावरण में मौजूद इन अनदेखे खतरों के प्रति अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है।
