स्मार्टवॉच में आ गया ECG फीचर, क्या अब डॉक्टर की जरूरत नहीं? गैजेट की इन सीमाओं को समझें
आधुनिक स्मार्टवॉच अब ECG फीचर के साथ सेहत की जानकारी देती हैं, लेकिन ये डॉक्टर का विकल्प नहीं हैं।

स्मार्टवॉच और फिटनेस वियरेबल्स का बढ़ता ट्रेंड (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मॉडर्न होती इस दुनिया में अब हाथ में बंधी घड़ी सिर्फ समय नहीं बताती, यह समय के साथ स्मार्ट हो गई है। यही वजह है कि इन्हें स्मार्टवॉच कहा जाता है, जो टाइम दिखाने के साथ-साथ व्यक्ति की सेहत की भी जानकारी देने लगी हैं।
आपने दिनभर में कितने कदम चले, दिल की धड़कन किस गति से चल रही है या फिर कितनी कैलोरी बर्न हुई; इन सबका हिसाब-किताब स्मार्टवॉच के पास है। पर यहां सबसे जरूरी सवाल यह है कि क्या आपकी स्मार्टवॉच डॉक्टर की जगह ले सकती है? आइए इन स्मार्ट गैजेट्स की सीमाओं को जानते हैं।
स्मार्टवॉच और फिटनेस वियरेबल्स का बढ़ता ट्रेंड
इन दिनों स्मार्टवॉच और फिटनेस वियरेबल्स का ट्रेंड लगातार बढ़ता ही जा रहा है। ये गैजेट्स उन लोगों में ज्यादा पॉपुलर हो गए हैं, जिन्हें हर दिन खुद को फिट रखने या अपनी सेहत पर नजर रखने की आदत है। इसमें कोई शक नहीं कि ये स्मार्टवॉच एक्सरसाइज करते समय हार्ट रेट को मॉनिटर करती है।
इसमें भी कार्डियोवैस्कुलर वर्कआउट करने वाले लोगों के लिए यह बड़ी मददगार है, क्योंकि इस दौरान हार्ट रेट को देखकर एक्सरसाइज की इन्टेन्सिटी का पता लग पाता है। इतना ही नहीं, इसकी मदद से अलर्ट की भी जानकारी मिलती है कि कहीं एक्सरसाइज शरीर पर भारी तो नहीं पड़ रही। साथ ही, वियरेबल्स एक्सरसाइज की अवधि, एक्टिविटी लेवल और कैलोरी बर्निंग से जुड़ी जरूरी जानकारी भी देते हैं।
स्मार्टवॉच का ECG फीचर कितना फायदेमंद?
हाल ही में, कई स्मार्टवॉच में एडिशनल कार्डियक फीचर भी आ चुका है, जो बेसिक ECG को रिकॉर्ड करने और दिल की धड़कन से जुड़ी अनियमितता के बारे में भी बताती है। उदाहरण के लिए, कुछ डिवाइस अनियमित धड़कन या संभावित एट्रियल फाइब्रिलेशन का अलर्ट दे सकते हैं।
स्मार्टवॉच गैजेट्स की सीमाओं को समझना जरूरी
हालांकि, यह बहुत जरूरी हो गया है कि इन स्मार्ट गैजेट्स की सीमाओं को समझा जाए। एक स्मार्टवॉच की ईसीजी स्टैंडर्ड मेडिकल ग्रेड ईसीजी रिपोर्ट का विकल्प नहीं हो सकती। गैजेट्स की रीडिंग्स को केवल एक स्क्रीनिंग टूल की तरह या फिर अनुमानित गाइड के तौर पर लिया जाना चाहिए। इसके लिए इन बातों का जरूर ध्यान रखें:
स्मार्टवॉच का अलर्ट किसी गड़बड़ी या असामान्यता की तरफ इशारा कर सकती है लेकिन यह एक मशीन है जिसमें झूठे अलर्ट भी आ सकते हैं।
रिकॉर्डिंग के समय किसी भी तरह का शारीरिक मूवमेंट, त्वचा से सही से संपर्क न हो पाना और दूसरे कारक इसकी सटीकता पर असर डाल सकते हैं।
घड़ी का बार-बार अलर्ट जारी कर रही है, अनियमित धड़कन की जानकारी दे रही है या ईसीजी से जुड़ी चेतवनी दे रही है, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सही फैसला है।
सबसे आखिर में बस यही बात कि स्मार्टवॉच को एक मेडिकल टूल की तरह न लेकर केवल सहायक के तौर पर लिया जाना चाहिए। ये कुछ असमान्यताएं बता सकती हैं, लेकिन ये सारी दिल से जुड़ी बीमारियों का पता नहीं लगा सकती, ऐसे में सही जानकारी के लिए डॉक्टर के पास जाने में ही समझदारी है।
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(डॉ. वैभव मिश्रा मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज में CTVS, कार्डिएक साइंसेज के प्रिंसिपल डायरेक्टर हैं)
