विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दांतों की बीमारी से हो सकता है गठिया! डॉक्टर ने बताया Gum Infection कैसे बढ़ा रहा जोड़ों का दर्द?

Published: Fri, 17 Apr 2026 07:00 PM (GMT+05:30)

मसूड़ों की बीमारी और रुमेटॉइड आर्थराइटिस के बीच गहरा संबंध है। विशेषज्ञ बताते हैं कि मसूड़ों के बैक्टीरिया शरीर में ...और पढ़ें

मसूड़ों की बीमारी और गठिया का गहरा संबंध (Picture Credit- AI Generated)

मसूड़ों की बीमारी और गठिया का गहरा संबंध (Picture Credit- AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि आपके ब्रश करने की आदत का सीधा असर आपके घुटनों और जोड़ों पर पड़ सकता है? हम अक्सर दांतों की सेहत और हड्डियों के स्वास्थ्य को दो बिल्कुल अलग चीजें मानते हैं, मेडिकल साइंस एक बेहद चौंकाने वाली सच्चाई बताता है। 

मसूड़ों से खून आना या पायरिया सिर्फ मुंह की बीमारी नहीं है, बल्कि यह 'रुमेटॉइड आर्थराइटिस' यानी गठिया भी को जन्म दे सकती है या उसे और बिगाड़ सकती है। आइए, ओरल हेल्थ और जोड़ों के दर्द के इस कनेक्शन को देश के जाने-माने एक्सपर्ट्स से बिल्कुल सरल भाषा में समझते हैं।

मसूड़ों की बीमारी का आर्थराइटिस से कनेक्शन

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (वैशाली) में ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट के निदेशक, डॉ. अखिलेश यादव बताते हैं कि मसूड़ों की बीमारी और रुमेटॉइड आर्थराइटिस के बीच एक गहरा और खतरनाक कनेक्शन है। इसकी मुख्य वजह है शरीर में 'लगातार रहने वाली सूजन' और हमारी इम्युनिटी का रास्ता भटक जाना।

डॉ. अखिलेश के अनुसार, "जब मसूड़ों में बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया पनपते हैं, तो वे शरीर के कुछ प्रोटीन्स का रूप बदल देते हैं। इससे हमारे शरीर की इम्युनिटी कंफ्यूज हो जाती है और गलती से अपने ही जोड़ों के टिश्यूज पर हमला कर देती है। यही कारण है कि गठिया के मरीजों में जोड़ों का दर्द और सूजन बढ़ जाती है।" 

डॉक्टर आगे बताते हैं कि यह कनेक्शन दोनों तरफ से काम करता है। मसूड़ों में लगातार रहने वाला इंफेक्शन खून में जाकर जोड़ों का दर्द बढ़ाता है और दूसरी तरफ गठिया के कारण शरीर की खराब हुई इम्युनिटी मसूड़ों को जल्दी संक्रमण का शिकार बना देती है। यह एक ऐसा चक्रव्यूह है, जिसमें एक बीमारी दूसरी को हवा देती है।

पूरे शरीर में कैसे फैलता है इंफेक्शन?

न्यूमेड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (नोएडा) में मैक्सिलोफेशियल और डेंटल विभाग की प्रमुख, डॉ. सुमन यादव भी इस कनेक्शन पर सहमति जताती हैं। वह बताती हैं कि जब मसूड़ों के नीचे हानिकारक बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, तो वे सिर्फ दांतों की जड़ों को ही नहीं गलाते, बल्कि वहां से भारी मात्रा में 'सूजन पैदा करने वाले तत्व' खून में मिल जाते हैं। खून के जरिए ये तत्व पूरे शरीर में फैलकर रुमेटॉइड आर्थराइटिस की समस्या को और खतरनाक बना देते हैं।

डॉ. सुमन ने गठिया के मरीजों की एक बड़ी व्यावहारिक समस्या भी उजागर की। वह कहती हैं कि डेंटल क्लीनिक में हम अक्सर देखते हैं कि गठिया के मरीजों के हाथों और उंगलियों में इतना दर्द व अकड़न होती है कि वे ठीक से ब्रश या फ्लॉस नहीं कर पाते। साफ-सफाई न होने से मसूड़ों की बीमारी और तेजी से बढ़ती है।

क्या है बचाव का रास्ता?

इससे बचने के लिए दोनों एक्सपर्ट एक ही उपाय बताते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक इस खतरनाक साइकिल को तोड़ने के लिए शुरुआत मुंह की सफाई से करनी होगी। डॉक्टर्स के मुताबिक अगर गठिया का कोई मरीज प्रिवेंटिव डेंटल केयर ले, अपने गम इन्फेक्शन का सही इलाज कराए और रोजाना ब्रश व दांतों के बीच की सफाई का ध्यान रखे, तो पूरे शरीर में सूजन का स्तर काफी कम हो जाता है। ऐसा करने से न सिर्फ मसूड़े स्वस्थ रहते हैं, बल्कि जोड़ों के दर्द में भी चमत्कारी रूप से राहत मिलती है और मरीज की जीवनशैली सुधरती है।