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नॉन-डायबिटिक लोगों में भी तेजी से घट-बढ़ सकता है शुगर लेवल, यहां समझें कारण और बचाव के तरीके

Published: Tue, 07 Apr 2026 11:55 AM (IST)

अगर आपको डायबिटीज नहीं है, लेकिन फिर भी थकान और सुस्ती बनी रहती है, तो यह ब्लड शुगर बढ़ने या कम होने के कारण हो सकता है।

आप में भी दिखें ये लक्षण, तो हो जाएं सावधान (Picture Courtesy: Freepik)

आप में भी दिखें ये लक्षण, तो हो जाएं सावधान (Picture Courtesy: Freepik)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर लोगों का मानना होता है कि ब्लड शुगर की समस्या सिर्फ डायबिटीज के मरीजों को होती है, लेकिए ऐसा नहीं है। कई बार उन लोगों का भी शुगर लेवल ऊपर-नीचे हो सकता है, जिन्हें डायबिटीज की समस्या नहीं है। 

ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसा क्यों होता है और इसके कारण क्या हैं? आइए डॉ. मोहित शर्मा (सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से समझें क्यों बिना डायबिटीज के भी ब्लड शुगर लेवल गड़बड़ हो सकता है और इसके लक्षण कैसे होते हैं। 

डायबिटीज के बिना ब्लड शुगर अनस्टेबल होने के कारण

जब ब्लड शुगर बिना डायबिटीज के अनियंत्रित होता है, तो इसे अक्सर नॉन-डायबिटिक हाइपरग्लाइसीमिया यानी शुगर बढ़ना या रिएक्टिव हाइपोपोटेंशन, यानी शुगर कम होना, कहा जाता है। इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं-

  • ज्यादा तनाव- जब आप मानसिक या शारीरिक तनाव में होते हैं, तो शरीर कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन रिलीज करता है। ये हार्मोन लिवर को ग्लूकोज रिलीज करने के लिए उत्तेजित करते हैं ताकि शरीर को एनर्जी मिले, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है।
  • गलत खान-पान और शुगर क्रैश- अगर आप बहुत ज्यादा रिफाइंड कार्ब्स, जैसे- मैदा, पास्ता या मीठी चीजें खाते हैं, तो शरीर में इंसुलिन का स्तर तेजी से बढ़ता है। इससे शुगर लेवल पहले बहुत ऊपर जाता है और फिर अचानक नीचे गिर जाता है, जिसे शुगर क्रैश कहते हैं।
  • नींद की कमी- नींद की कमी शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी को बिगाड़ देती है। इसके कारण सेल इंसुलिन का ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाते और ब्लड शुगर एनर्जी में बदल नहीं पाता। केवल एक रात की अधूरी नींद भी आपके शरीर के ग्लूकोज को प्रोसेस करने के तरीके को प्रभावित कर सकती है।
  • हार्मोनल इंबैलेंस- महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम इंसुलिन रेजिस्टेंस का एक बड़ा कारण है। इसमें शरीर इंसुलिन तो बनाता है, लेकिन सेल्स उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं, जिससे शुगर लेवल अनस्टेबल रहता है।
Risk Factors of Diabetes

इसके संकेत कैसे हो सकते हैं?

अगर आपका ब्लड शुगर स्थिर नहीं है, तो आपका शरीर ये चेतावनी संकेत दे सकता है-

  • बहुत थकान- अच्छी नींद के बाद भी दिन भर सुस्ती महसूस होना
  • ब्रेन फॉग- फोकस में कमी और बार-बार चीजें भूलना।
  • बार-बार शुगर क्रेविंग- खाना खाने के तुरंत बाद भी कुछ मीठा खाने का मन करना।
  • चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स- शुगर लेवल गिरने पर अचानक गुस्सा या घबराहट होना।
  • बार-बार भूख लगना- पेट भरा होने के बावजूद थोड़ी-थोड़ी देर में भूख महसूस होना।
  • पसीना आना और कंपकंपी- खासतौर से खाने के 2-3 घंटे बाद पसीना आना या हाथ कांपना

बचाव के लिए क्या करना चाहिए?

प्रोटीन और फाइबर जोड़ें- कभी भी कार्ब्स अकेले न खाएं। उनके साथ दाल, पनीर, अंडा या सलाद जरूर लें।फाइबर शुगर के अब्जॉर्प्शन को धीमा कर देता है।

  • खाने के बाद वॉक- खाने के बाद मात्र 10-15 मिनट की वॉक मांसपेशियों को ग्लूकोज इस्तेमाल करने में मदद करती है।
  • स्ट्रेस मैनेज करें- तनाव कम करने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज और मेडिटेशन करें। 
  • पूरी नींद- रोज कम से कम 7-8 घंटे की नींद और कोशिश करें कि एक ही समय पर सोएं और उठें। 
  • खाना स्किप न करें- नियमित समय पर खाना खाएं। खाना स्किप करने से भी ब्लड शुगर अनियंत्रित हो सकता है। 

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