नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। कोरोनावायरस का कहर मरीजों पर लंबे समय तक देखने को मिलता है। चीन के वुहान शहर से जन्म लेने वाले इस वायरस की चपेट में आए मरीजों के फेफड़ों पर लंबे समय तक असर रहता है। बीजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ चाइनीज मेडिसिन के डोंगझेमिन अस्पताल के डॉक्टर लियांग टेंगशियाओ ने कोरोना के मरीजों पर अध्ययन किया है। अध्ययन में पाया गया है कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों के फेफड़ों पर लंबे समय तक कोरोना का असर रहता है।

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने वुहान के एक प्रमुख अस्पताल से ठीक हुए कोविड-19 मरीजों के एक समूह के नमूने लिए, जिसमें 90 फीसदी मरीजों के फेफड़ों को नुकसान पहुंचा था। इतना ही नहीं पांच फीसदी मरीज दोबारा कोरोना से संक्रमित पाएं गए जिन्हें आइसोलेशन में रखा गया।

वुहान विश्वविद्यालय के झोंगनन अस्पताल की आईसीयू के निदेशक पेंग झियोंग के नेतृत्व में एक दल ने अप्रैल में ठीक हो चुके 100 मरीजों से मिलकर उनकी सेहत का हाल पूछा। अध्ययन में शामिल मरीजों की उम्र 59 साल थी।

सरकारी ग्लोबल टाइम्स की खबर के मुताबिक पहले चरण के नतीजों के मुताबिक 90 प्रतिशत मरीजों के फेफड़े अब भी खराब स्थिति में हैं, जिसका मतलब यह है कि उनके फेफड़ों से हवा के प्रवाह और गैस विनिमय का काम अब तक स्वस्थ लोगों के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में शामिल मरीजों के छह मिनट टहलने की जांच की। उन्होंने पाया कि बीमारी से ठीक हुए लोग छह मिनट की अवधि में 400 मीटर ही चल सके जबकि तंदुरूस्त लोगों ने 500 मीटर की दूरी तय की।

बीजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ चाइनीज मेडिसिन के डोंगझेमिन अस्पताल के डॉक्टर लियांग टेंगशियाओ के मुताबिक अस्पताल से छुट्टी मिलने के तीन महीने बाद भी ठीक हो चुके कुछ मरीजों को ऑक्सीजन मशीन की जरूरत पड़ती है। 

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