कम सुनाई देना बढ़ा सकता है डिमेंशिया का खतरा? जानिए दोनों के बीच का कनेक्शन और शुरुआती लक्षण
अक्सर सुनने की शक्ति कम होने को कान की समस्या से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह आपके दिमाग को भी प्रभावित कर सकती है।

कम सुनाई देना सिर्फ कान से जुड़ी समस्या नहीं (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य में कई बदलाव आते हैं, जिनमें सुनने की शक्ति कम होना भी शामिल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सुनने की शक्ति कम होने का डिमेंशिया से सीधा कनेक्शन है? जी हां, कई स्टडी में यह बात सामने आई है कि हियरिंग लॉस के कारण डिमेंशिया का जोखिम बढ़ता है।
दरअसल, सुनने की समस्या हमारे दिमाग के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकती है। आइए समझें कैसे और डिमेंशिया के किन संकेतों से सावधान रहना चाहिए।
हियरिंग लॉस और डिमेंशिया के बीच कनेक्शन
अगर किसी व्यक्ति की सुनने की क्षमता कम हो रही है, तो उनमें डिमेंशिया विकसित होने का रिस्क बढ़ जाता है। इसमें हियरिंग लॉस की गंभीरता और यह समस्या कितने समय से है, ये दोनों ही बातें जोखिम को प्रभावित करते हैं।
इसके पीछे तीन कारण हो सकते हैं-
- दिमाग पर एक्स्ट्रा दबाव- जब हमें ठीक से सुनाई नहीं देता, तो हमारे दिमाग के उन हिस्सों को जो आवाज और शब्दों को समझने का काम करते हैं, बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसके कारण दिमाग में ऐसे बदलाव ला सकता है जो हमारी याददाश्त और सोचने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।
- सामाजिक अलगाव- सुनने में परेशानी होने पर लोग अक्सर बातचीत से कतराने लगते हैं और धीरे-धीरे समाज से कट जाते हैं। सामाजिक अकेलापन और डिप्रेशन दोनों ही डिमेंशिया के बड़े रिस्क फैक्टर माने जाते हैं।
- शुरुआती लक्षण या कारण- यह भी हो सकता है कि हियरिंग लॉस डिमेंशिया का एक शुरुआती लक्षण हो, या फिर यह डिमेंशिया पैदा करने वाला एक फैक्टर। व्यक्तिगत स्तर पर यह तय करना मुश्किल होता है कि कौन सी समस्या पहले शुरू हुई।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि सुनने की समस्या होने का मतलब यह कतई नहीं है कि व्यक्ति को डिमेंशिया होगा ही, लेकिन यह उनके जोखिम को थोड़ा बढ़ा जरूर देता है।

(AI Generated Image)
डिमेंशिया के सामान्य शुरुआती लक्षण
डिमेंशिया को पहचानने के लिए इसके शुरुआती संकेतों पर गौर करना बहुत जरूरी है।
- याददाश्त कमजोर होना- हाल ही में हुई बातों या अहम जानकारियों को भूल जाना।
- फोकस में कमी- किसी काम पर ध्यान लगाने या फैसले लेने में परेशानी महसूस करना।
- रोजमर्रा के कामों में मुश्किल- रोज किए जाने वाले कामों को करने में उलझन होना, जैसे खरीदारी करते समय पैसों के लेनदेन या शर्ट के बटन लगाने में तकलीफ।
- बातचीत में परेशानी- बातचीत के दौरान शब्दों को भूल जाना, सही शब्द न ढूंढ पाना या बातचीत के फ्लो को न समझ पाना।
- समय और जगह का भ्रम- यह भूल जाना कि अभी कौन सा समय है या वे अभी कहां हैं।
- व्यवहार और मूड में बदलाव- अचानक स्वभाव में बदलाव आना या बिना किसी कारण के उदास या चिड़चिड़ा महसूस करना।
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