नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Keto Diet Side-Effects: कीटोजेनिक डाइट मतलब कीटो डाइट, आजकल सबसे ज़्यादा पॉपुलर डाइट ट्रेंड्स में से एक है। चाहे आप वज़न कम करना चाह रहे हों या फिर फिट रहना चाहते हों, ये लो कार्ब और हाई फैट डाइट काफी लाभदायक है इसलिए लोगों के बीच मशहूर होती जा रही है।  

ये सच भी है, यहां तक कि विज्ञान भी कहता है कि कीटो डाइट आपका वज़न कम करने में काफी मदद करती है। हालांकि, ये भी सच है कि इस डाइट के काफी साइड-इफेक्ट्स भी हैं, जो आप शायद ही जानते हों। तो इससे पहले कि आप इस डाइट को अपनाना शुरू करें, हम आपको बता रहे हैं ऐसे साइड-इफेक्ट्स के बारे में जो आपको पता होने चाहिए।

कीटो फ्लू

कुछ लोग कीटो डाइट को जैसे ही शुरू करत हैं वह बीमार पड़ जाते हैं। उनको गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिस्ट्रेस, सिर दर्द और कमज़ोरी जैसी दिक्कतें आने लगती हैं। ये सभी कीटो फ्लू के लक्षण हैं। ये फ्लू आमतौर पर इसलिए होता है क्योंकि आपका शरीर एनर्जी बरकरार रखने के लिए कार्ब्स की जगह फैट्स का इस्तेमाल करने लगता है। रिसर्च की मानें तो कीटो डाइट अपनाने वाले कम से कम 25 प्रतिशत लोगों को यह परेशानी आती है। हालांकि, इसमें घबराने की बात नहीं है, ये फ्लू अपने आप ही कुछ दिन में चला जाता है।  

कब्ज़ महसूस कर सकते हैं

जब आप कीटो डाइट पर होते हैं, तो आपका बाथरूम का चक्कर ज़्यादा लगता है। फाइबर की कमी से आपको कब्ज़ जैसा महसूस हो सकता है। बाउअल मूव्मन्ट की अनियमितता कम-कार्ब वाली डाइट का एक आम साइड-इफेक्ट है। एक अच्छे बाउअल मूव्मन्ट के लिए आप कीटो के खाने में से एवकाडो या फिर नट्स खाएं, इसमें फाइबर मौजूद होता है।

लौट सकता है आपका शुरुआती वज़न

कीटो डाइट की शुरुआत में आप देखेंगे कि आपका वज़न तेज़ी से कम होता जा रहा है, लेकिन आमतौर पर यह वापस आ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रोटीन और फैट्स की तुलना में कार्ब्स में अधिक पानी होता है। जब आप कम कार्ब वाली कीटो डाइट शुरू करत हैं तो आपके शरीर में पानी का वज़न तेज़ी से कम हो जाता है। शुरुआत में आज जो वज़न घटाते हैं वह आमतौर पर सिर्फ पानी का वज़न होता है जो कुछ दिन में वापस आ जाता है। 

हर वक्त प्यास लगना

जब आप कीटो डाइट पर होते हैं तो आपको ज़्यादा पास लगती है। ऐसा इसलिए क्योंकि आपके शरीर से अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाता है, जिससे आपको हर समय प्यास लगती है। इसलिए ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिएं ताकि शरीर में पानी की कमी  न हो जाए।  

सांस में होगा बदलाव 

जब आप कीटो डाइट शुरू करते हैं, तब आपका शरीर कीटोसिस में चला जाता है और कीटोन्स का उत्पादन शुरू कर देता है। आपका शरीर एसीटोन नाम का एक कैमीकल का भी उत्पादन शुरू कर देता है, जो आमतौर पर नेलपॉलिश रिमूवर में पाया जाता है। एसीटोन का अणु इतना छोटा होता है कि यह फेफड़ों से होकर गुज़रता है और आप सांस लेते हुए इन्हें बाहर निकालते हैं।

Posted By: Ruhee Parvez

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