कोलन कैंसर सिर्फ बूढ़ों को होता है? इन 8 मिथकों ने फैला रखा है भ्रम, सच्चाई उड़ा देगी आपके होश
प्रोसेस फूड, हाई-फैट और कम फाइबर वाले डाइट की वजह से भारत में कोलन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ ...और पढ़ें
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कोलन कैंसर के 8 मिथक: जानें सच्चाई और रहें सुरक्षित
HighLights
कोलन कैंसर के मामले बड़े शहरों में बढ़ रहे हैं
35-40 साल के युवाओं में भी खतरा बढ़ रहा है
शुरुआती स्टेज में पहचान होने पर इलाज संभव है
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के बड़े शहरों जैसे हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरू में कोलन कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) के मामले बढ़ रहे हैं। गलत खान-पान, फिजिकल एक्टिविटी का कम होना कोलन कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।
ऐसे में इसके बारे में सही जानकारी सही इलाज पाने और बचाव करने में मदद कर सकते हैं। इस आर्टिकल में हम कोलन कैंसर के लक्षणों और उसके इर्द-गिर्द बुनी गई भ्रामक बातों के बारे में जानेंगे, जोकि इलाज में देरी का कारण बन सकते हैं।
ये होते हैं कोलन कैंसर के लक्षण
- लंबे समय तक डायरिया या कब्ज का बने रहना
- स्टूल या मल में खून आना
- पेट में लगातार दर्द या तकलीफ बने रहना
- अचानक ही वजन कम हो जाना और थकान महसूस होना
ये हैं कोलन कैंसर से जुड़े मिथक
- सिर्फ बुजुर्गों को ही होता है कोलन कैंसर: बढ़ती उम्र के साथ बुजुर्गों में कोलन कैंसर का खतरा बढ़ता है लेकिन 35-40 साल या इससे भी कम उम्र के लोगों में इस कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
- कोलन कैंसर से बचाव संभव नहीं: वैसे तो कोलन कैंसर को जड़ से खत्म करने देने वाली दवा नहीं बनी, लेकिन समय पर इसका पता लगने से खतरे को कम किया जा सकता है। कोलोनोस्कोपी की मदद से उन पॉलिप्स या गांठों को पहले ही रिमूव किया जा सकता है, जो कैंसर का रूप ले सकते हैं।
- हेल्दी लाइफस्टाइल ही सबकुछ है: अगर आपके करीबी रिश्ते में किसी को कोलन कैंसर है तो फिर आपको इसके होने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। अगर आपके परिवार में भी इसकी हिस्ट्री रही है तो हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ-साथ समय-समय पर इसकी जांच कराते रहना भी जरूरी है।
- लक्षण जरूर नजर आएंगे: कोलन कैंसर के लक्षण तब तक नजर नहीं आते, जब तक कि वो पूरी तरह फैल नहीं जाता। इससे जुड़ी एक स्टडी बताती है कि 70% लोगों में कोलन कैंसर के कोई लक्षण नजर नहीं आए, यहां तक कि एडवांस स्टेज में भी। ऐसे में स्क्रीनिंग या जांच पर ही काफी कुछ निर्भर करता है।
- सिर्फ कोलोनोस्कोपी से ही पता चलता है: इसको सबसे सटीक टेस्ट माना जाता है, क्योंकि यह लगभग 95% मामलों में कैंसर की पहचान कर लेता है। हालांकि, इसके अलावा भी कई ऑप्शन हैं जैसे विजुअल परीक्षण और खून या स्टूल की जांच।
- गांठें हमेशा ही कैंसर होती हैं: यह जरूरी नहीं कि कोलन में पाई जाने वाली हर गांठ कैंसरकारी हो। अगर इन्हें रिमूव करा दिया जाए तो उसके कैंसर बनने का खतरा कम हो जाएगा।
- कोलन कैंसर का इलाज नहीं: अगर कोलन कैंसर की पहचान स्टेज 1,2 या 3 में भी कर ली जाए तो सर्जरी की मदद से इसका इलाज संभव है। लगभग 90% लोगों में जिनमें कोलन कैंसर की पहचान शुरुआती स्टेज में हो जाती है उनके बचने की संभावना बढ़ जाती है।
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Disclaimer: लेख में उल्लेखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो, तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
