जब राजा ने पूछा- "ये क्या खिलाया है?", कम ही लोग जानते हैं मैसूर पाक कहानी; जानिए कैसे घर-घर पहुंचा इसका स्वाद
विजयादशमी के वैभव और मैसूर की शाही विरासत का दिव्य अनुभव है मैसूर पाक। जीवन में कम से कम एक ...और पढ़ें

दशहरा उत्सव में क्यों सबसे खास माना जाता है मैसूर पाक? (Image Source: AI-Generated)
HighLights
मैसूर पाक की शुरुआत महाराजा कृष्णराज वाडियार चतुर्थ के शासनकाल में हुई
यह दशहरा उत्सव और दक्षिण भारत में लोकप्रिय 'मिठाइयों का राजा' है
काकासुर मडप्पा ने बेसन, चीनी, घी से यह स्वादिष्ट मिठाई बनाई
डॉ. एम.सी. वशिष्ठ, केरल। यदि आपका जन्म भारत में हुआ है, तो आपको जीवन में कम से कम एक बार मैसूर पाक का स्वाद अवश्य चखना चाहिए, खासकर मैसूर के प्रसिद्ध दशहरा उत्सव के दौरान। मैसूर पाक कर्नाटक की उत्सव संस्कृति, विशेषकर नाडा हब्बा (दशहरा) में गहराई से रचा-बसा है। यह समृद्धि और भव्यता का प्रतीक है, जिसे नाडा हब्बा (नवरात्र-विजयादशमी का दस दिवसीय दशहरा उत्सव) और विशेष रूप से देवी चामुंडेश्वरी के भोग के रूप में परोसा जाता है। मांग तो साल भर रहती है मगर दक्षिण भारत के राज्यों-केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में मिठाई की बड़ी दुकानों और बेकरी में यह लाजवाब मिठाई दशहरा में सबसे ज्यादा बिकती है।
दक्षिण में मिठाइयों का राजा
कर्नाटक का यह व्यंजन शादियों और बड़े समारोहों में भी मुख्य आकर्षण होता है। यह अपेक्षाकृत नया मिष्टान्न है मगर लोकप्रियता की वजह से इसे दक्षिण भारत में मिठाइयों का राजा कहा जाता है। दरअसल मैसूर पाक बेसन, चीनी और प्रचुर मात्रा में शुद्ध घी से बनने वाला एक बेहतरीन भारतीय व्यंजन है, जो मुंह में जाते ही घुल जाता है। इसके मुख्य घटकों में चीनी, घी और बेसन शामिल हैं, जिसे अक्सर इलायची से सुगंधित किया जाता है। इस जालीदार मिठाई की बनावट एक मलाईदार घने बिस्कुट जैसी लगती है, शायद इसीलिए इसे स्थानीय बेकरियों में भी बड़ी शान से रखा जाता है। इसकी बहुमुखी प्रतिभा के कारण इसे विभिन्न स्वादों में बनाया जा सकता है। आज इसके सबसे लोकप्रिय प्रकारों में पारंपरिक घी मैसूर पाक, काजू, नारियल और केसर मैसूर पाक से लेकर नए-नवेले चाकलेट मैसूर पाक तक शामिल हैं। फ्लेवर कोई भी हो, इसकी अद्वितीय कोमलता और मिठास आपको जीवन भर याद रहेगी।
राजशाही से जुड़ा इतिहास
यह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि मैसूर पाक की शुरुआत 20वीं शताब्दी की शुरुआत में मैसूर के महाराजा कृष्णराज वाडियार चतुर्थ के शासनकाल के दौरान हुई थी। कृष्णराज वाडियार चतुर्थ के 1912 में बनकर तैयार हुए नए मैसूर महल (अंबा विलास पैलेस) में एक भव्य शाही रसोई थी, जहां दक्षिण और मध्य भारत के कई रसोइए कार्यरत थे। जनश्रुतियों के अनुसार, महल के एक रसोइये काकासुर मडप्पा ने दशहरा उत्सव के दौरान महाराजा के लिए कुछ विशेष बनाने के उद्देश्य से बेसन, चीनी और घी के मिश्रण के साथ प्रयोग किया। इससे सुनहरे रंग की, समृद्ध स्वाद वाली और थोड़ी कुरकुरी बनावट वाली मिठाई तैयार हुई। जब महाराजा ने इसका नाम पूछा, तो मडप्पा ने इसे 'मैसूर पाक' कहा, जहां 'पाक' शब्द पकाने की प्रक्रिया को दर्शाता है। यह संस्कृत मूल के शब्द 'पाक' से आया है, जिसका अर्थ खाना पकाना या तैयार व्यंजन होता है। वस्तुतः दक्षिण भारतीय मिठाइयों के संदर्भ में, पाक का अर्थ चीनी की चाशनी या इसमें पका हुआ गाढ़ा मिश्रण होता है। भारतीय मिष्ठान परंपरा में कई व्यंजनों के साथ इस शब्दावली का उपयोग किया जाता है, जैसे बेसन पाक या गोंद पाक आदि।
पीढ़ी-दर-पीढ़ी पारंपरिक स्वाद
महाराजा कृष्णराज वाडियार चतुर्थ का सोच था कि राजमहल का यह अनोखा स्वाद केवल शाही परिवार तक सीमित न रहे, बल्कि इसका आनंद आम जनता भी ले सके। उन्होंने काकासुर मडप्पा को महल की चारदीवारी से बाहर एक स्वतंत्र दुकान खोलने का सुझाव दिया। इस प्रकार मैसूरु के ऐतिहासिक देवरजा मार्केट के पास गुरु स्वीट मार्ट की नींव पड़ी, जिसे आज भी मडप्पा के परपोते पूरी निष्ठा और परंपरा के साथ चला रहे हैं। मैसूर में श्री महालक्ष्मी स्वीट्स, ,पताका मन्नार्स, बांबे टिफिन, मनसुखलाल डी. मिठाईवाला, कज्जायदा माने श्री न्यू बालाजी स्वीट्स, द ग्रैंड नंदिनी फैमिली रेस्टोरेंट, कांति कैंडीज, द ग्रैंड स्वीट्स आफ वैष्णवी और इंद्रा पारस कैफे भी इसके लिए कुछ मशहूर दुकानें हैं।
रसोई में आजमाएं पारंपरिक रेसिपी
सामग्री:
बेसन -1 कप, चीनी -2 कप, पानी - आधा कप, घी - डेढ़ से दो कप।
बनाने की विधि:
सबसे पहले बेसन को छान लें। घी को गर्म करके गुनगुना रखें। एक भारी तले की कड़ाही में पानी और चीनी डालकर चाशनी तैयार करें। गुठलियां बनने से रोकने के लिए लगातार चलाते हुए धीरे-धीरे बेसन मिलाएं। अब इसमें धीरे-धीरे गर्म घी डालें। इसे तब तक पकाएं जब तक कि मिश्रण कड़ाही के किनारे न छोड़ने लगे और झागदार न हो जाए। इसे तुरंत घी लगी ट्रे में पलटें और थोड़ा ठंडा होने पर टुकड़ों में काट लें।
(लेखक इतिहासकार एवं भोजन रसिक हैं)
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