विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बासी रोटी से लेकर नवाबों के दस्तरखान तक: ऐसे बनी मामूली सी ब्रेड ‘शाही टुकड़ा’, 500 साल पुरानी है कहानी

Published: Sun, 26 Jul 2026 07:00 AM (IST)

शाही टुकड़ा ब्रेड के साथ मलाईदार रबड़ी वाली यह डिश मामूली नहीं है, नवाबों की रसोई में था खास डेजर्ट।

शाही टुकड़े का रोचक इतिहास (Image Source: AI Generated)

शाही टुकड़े का रोचक इतिहास (Image Source: AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सुनहरे भूरे तले हुए ब्रेड के टुकड़ों पर जब मलाईदार रबड़ी डाली जाती है तो वह शाही टुकड़ा बन जाता है। हां, वही शाही टुकड़ा जिसे मुगलई मिठाई, नवाबों की शान, रामपुरी मिठाई, कई नामों से बुलाते हैं। आज भी यह मिठाई लोगों के दिलों पर राज करती हैं लेकिन क्या आप इसके इतिहास के बारे में जानते हैं? यह ब्रेड का एक टुकड़ा शाही कैसे बना इसकी कहानी जानते हैं? आइए आपको शाही टुकड़े के इतिहास की तरफ ले चलते हैं। 

शाही टुकड़े का रोचक इतिहास 

मुगलों ने जब 16 वीं शताब्दी में मध्य एशिया से भारत की तरफ पलायन किया तो वो अकेले नहीं आए, उनके साथ आई नवाबी संस्कृति, सूफी संगीत और कलाएं। कोलकाता की बिरयानी से लेकर लखनऊ के गलोटी कबाब तक, आज मशहूर बहुत से व्यंजन मुगलई संस्कृति का हिस्सा थे। इन्हीं में से एक था शाही टुकड़ा, जो देखते ही देखते लोगों का पसंदीदा बन गया। 

शाही टुकड़े के उत्पत्ति को लेकर मतभेद 

शाही टुकड़े के उत्पत्ति को लेकर भी अलग-अलग बातें कही जाती हैं, कुछ इतिहासकार इसे मिस्र की पारंपरिक मिठाई उम्म अली से भी जोड़कर देखते हैं। मिस्र में उम्म अली एक फेमस ब्रेड पुडिंग है। कहते हैं कि अपने साथियों के साथ सुल्तान नील शिकार पर निकले थे और उस समय वो एक गांव में ठहरे। उस समय सुल्तान नील के लिए उम अली नाम के शख्स ने बासी रोटी, मेवे, दूध और चीनी को मिलाकर डिश बनाई। यह सुल्तान को इतनी पसंद आई कि इसे उन्होंने अपनी रसोई में शामिल कर लिया। इस तरह मिस्र में इस डिश का नाम पड़ा उम अली। वहीं, भारत में शाही टुकड़े का संबंध ऐतिहासिक रूप से अवध क्षेत्र से है। 

जब ब्रेड नहीं थी तब कैसे बनता था शाही टुकड़ा 

अब मन में एक सवाल जरूर आया होगा कि मुगलों के जमाने में ब्रेड ही नहीं होती थी, फिर कैसे इसे ब्रेड पर बनाया जाता था। बताते चलें कि उस समय भारत में ब्रेड तो थी लेकिन पुर्तगालियों के आने के बाद ब्रेड उतनी मशहूर नहीं हुई थी कि उसे रसोई का हिस्सा बनाया जा सके। इस बारे में कहा जाता है कि उस समय बालाई नाम की मोटी लेयर वाली एक मिठाई होती जिसपर रबड़ी और मेवे रखकर खाया जाता था। बाद में ब्रेड शाही टुकड़े का एक अहम हिस्सा बन गया। 

कैसे बनता है शाही टुकड़ा? 

इसे बनाने के लिए एक पूरा प्रोसेस फॉलो किया जाता है, पारंपरिक तरीके में इसके लिए चपटी ब्रेड (फ्लैटब्रेड) इस्तेमाल होती थी। वहीं, अवध में कहीं-कहीं इसे शीरमाल (मीठी खमीर की रोटी) से भी बनाते हैं। आज यह नवाबी मिठाई देसी घी में तलकर, चीनी की चाशनी में डुबोकर, फिर उसपर रबड़ी और मेवे डालकर खाई जाती है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।