पहले सिर्फ गहने की तरह इस्तेमाल होता था बटन, फिर कैसे बना कपड़ों का जरूरी हिस्सा?
बटन, जो आज कपड़ों का अहम हिस्सा है, कभी सिंधु घाटी सभ्यता में सिर्फ गहनों के तौर पर इस्तेमाल होता ...और पढ़ें

बटन का दिलचस्प सफर: गहने से कपड़ों का अनिवार्य हिस्सा बनने तक (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रोजमर्रा की अपनी लाइफ में हम कई ऐसी चीजों का इस्तेमाल करते हैं, जो हमारे काम को आसान बनाती हैं। शर्ट-पैंट या जींस में लगा बटन इन्हीं में से एक है, जिसको लगाते समय हम में से शायद कम ही लोगों ने यह सोचा होगा कि आखिर यह छोटी सी गोल चीज आखिर कहां से आई होगी?
हम लगभग रोज ही इसका इस्तेमाल करते हैं और मौजूदा समय में यह हर एक व्यक्ति के जीवन का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर आपके कपड़े को बिखरने से बचाने वाले ये छोटे-से बटन असल में आए कहां से? आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं बटन के इसी दिलचस्प इतिहास के बारे में-
जब बटन सिर्फ एक गहना था
प्लास्टिक से बने इस छोटे-से बटन का इस्तेमाल करते हुए शायद ही आपने कभी यह सोचा होगा कि इसका इतिहास 50-60 साल पुराना नहीं, बल्कि सैकड़ों साल पुराना है। अगर हम इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें, तो पता चलेगा कि बटन के इस्तेमाल का सबूत 2000 ईसा पूर्व यानी सिंधु घाटी सभ्यता के दौर से मिलता है। उस समय लोग सीप, जानवरों की हड्डियों और कीमती पत्थरों को तराश कर बटन बनाते थे।
लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उस दौरान इनका इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ कपड़ों और गहनों को सजाने के लिए होता था। उस जमाने में अपने ढीले-ढाले कपड़ों और को संभालने के लिए लोग चमड़े की बेल्ट, नुकीली पिन या धागों का ही इस्तेमाल करते थे। बटन का इस्तेमाल सिर्फ किसी ब्रोच या आभूषण की तरह हुआ करता था।
कैसे कपड़ों का हिस्सा बना बटन?
कई समय तक गहनों की तरह इस्तेमाल होने वाला बटन कपड़ों का हिस्सा जर्मनी की बदौलत बना। 13वीं सदी के यूरोप खासकर जर्मनी में 'बटनहोल' का आविष्कार होने के बाद कपड़े पहनने का तरीका ही बदल गया। पहले जहां लोग कपड़ों को लपेटा करते थे, वहीं अब बटन की मदद से लोग पूरे फिटिंग वाले कपड़े पहनने लगे। देखते ही देखते यह मध्यकालीन युग का एक ऐसा आविष्कार बन गया, जिसने फैशन को एक पूरी तरह से नई दिशा दी।
शान-ओ-शौकत का हथियार बना बटन
धीरे-धीरे इसका चलन इस कदर बढ़ गया कि बटन रईसों की शान-ओ-शौकत और ताकत दिखाने का एक जरिया बन गया था। उस दौर में जो व्यक्ति जितना अमीर होता, उसके कपड़ों पर बटन उतने ही महंगे और ज्यादा संख्या में होते थे। बटन का यह जुनून इस कदर बढ़ चुका था कि फ्रांस के राजा फ्रांसिस प्रथम ने अपने लिए एक मखमली सूट बनवाया था, जिस पर 13,000 से भी ज्यादा शुद्ध सोने के बटन लगे हुए थे।
लिंग के आधार पर कपड़ों पर लगाएं गए बटन
बटन के इस्तेमाल को लेकर एक समय ऐसा आया जब बटन लगाने की जगह जेंडर के आधार पर तय होती है। पुरुषों के लिए बटन दाईं ओर लगाया जाता है, ताकि अपने हथियार को बाईं से दाईं ओर निकालते समय अपने बटन न काट बैठें। वहीं, महिलाओं के कपड़ों पर बटन बाईं ओर लगाए गए, ताकि उस दौरान नौकरानियों को अपनी मालकिन को कपड़े पहनाने में आसानी हो।
दरअसल, कपड़े पहनाने के लिए नौकरानियां अपने दाहिने हाथ का इस्तेमाल करती थीं, और बटन के बाईं ओर होने से यह काम आसान हो जाता था। बटन को लेकर बना यह नियम आज चला आ रहा है। आज भी पुरुषों और महिलाओं के कपड़ों पर बटन उसी साइड लगाए जाते हैं, जो पहले के जमाने में तय किए गए थे।
आम आदमी तक कैसे पहुंचा बटन?
18वीं और 19वीं सदी में जब दुनिया में औद्योगिक क्रांति आई, तो कई दूसरी चीजों की ही तरह बटन भी आम जनता की पहुंच में आया। बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में कांच, लकड़ी, पीतल और प्लास्टिक जैसी सस्ती चीजों से रोजाना लाखों बटन बनने लगे। इस तरह अमीरों की तिजोरी से निकलकर बटन आम आदमी की अलमारी तक पहुंचा दिया।
