त्वचा के लिए क्या सही है और क्या गलत, इस बारे में लोग अकसर भ्रम में रहते हैं। सुनी-सुनाई बातों में आकर वे कई तरह के एक्सपेरिमेंट करने से भी नहीं कतराते। सखी बता रही है, ऐसी ही कुछ धारणाओं और उनकी सच्चाई के बारे में। जब आप किसी मॉडल या सलेब्रिटी को परदे पर देखती हैं तो लगता है, जैसे किसी मूर्तिकार ने संगमरमर को तराश दिया हो। सुंदर चेहरे की ख्वाहिश हर उम्र की स्त्री को होती है। सुंदर दिखने से कॉन्फिडेंस भी बढ़ जाता है लेकिन दूसरे पर जो मेकअप अच्छा लगता है या उसकी त्वचा को जो सूट करता हो, ज़रूरी नहीं कि आपको भी वह रास आए। 

धारणा : सर्दियों में सनस्क्रीन की ज़रूरत नहीं।

सच्चाई : यह धारणा पूरी तरह से गलत है। तीखी धूप न हो, तो भी यूवीए और यूवीबी किरणें चेहरे पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। अगर आपकी त्वचा पर टैनिंग हो रही है तो इसका अर्थ है कि आपकी त्वचा को ज्य़ादा क्षति पहुंच सकती है, इसलिए सचेत हो जाएं। सनस्क्रीन का प्रयोग घर हो या बाहर दोनों ही जगह करना चाहिए।

धारणा : लिपस्टिक के ब्राइट शेड्स जैेसे रेड और ऑरेंज सब पर अच्छे नहीं लगते।

सच्चाई : इस बात को न तो पूरी तरह से $गलत कहा जा सकता है और न सही। हर कोई रेड या ऑरेंज लिपस्टिक का इस्तेमाल कर सकता है लेकिन ये शेड्स बहुत सोच-समझकर चुनने चाहिए। यदि आपका रंग गेहुंआ है तो डीप रेड कलर की लिपस्टिक लगा सकती हैं। अगर आप सांवले रंग की हैं तो मरून रेड कलर का इस्तेमाल कर सकती हैं। आजकल मेक अप में लोग काफी प्रयोगवादी हो गए हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि जिस कलर का इस्तेमाल आप सहजता से कर लें, उसे यूज़ करने से न हिचकें। ब्राउन रेड इस समय चलन में है।

धारणा : ऑयली स्किन पर सिर्फ ऑयल-फ्री प्रोडक्ट का ही इस्तेमाल करना सही रहता है, इस पर मॉयस्चराइजर की जरूरत नहीं।

सच्चाई : यह धारणा गलत है। ऑयली त्वचा हमें युवा बनाए रखने में मददगार है। कई बार चेहरे के किसी हिस्से में चिपचिपाहट महसूस होने पर लोगों को लगता है कि उनकी स्किन ऑयली है लेकिन ज्य़ादातर लोगों की त्वचा मिश्रित होती है। खास बात यह है कि त्वचा चाहे ड्राई, ऑयली या मिक्स हो, नमी की ज़रूरत हर त्वचा को होती है। अपनी स्किन के हिसाब से मॉयस्चराइज़र का इस्तेमाल करें। बाज़ार में हर तरह की स्किन के लिए मॉयस्चराइज़र मौज़ूद हैं। उनमें से जो आपकी त्वचा के अनुरूप हो, उसे ही चुनें। ऐसे किसी भी प्रोडक्ट का इस्तेमाल न करें, जिससे चेहरे पर जलन महसूस हो। अगर आपकी त्वचा वाकई में ऑयली हो, तभी ऑयल-फ्री प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें।

धारणा : लिक्विड आई लाइनर सभी पर सूट करता है।

सच्चाई : यह सच नहीं है। जिन स्त्रियों की आंखें बड़ी होती हैं, उन्हें लिक्विड आई लाइनर अप्लाई नहीं करना चाहिए बल्कि लिक्विड लाइनर की जगह आईशैडो यूज़ करना चाहिए। छोटी आंखों वाली स्त्रियों को आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए नैचरल शेड्स लगाने चाहिए।

धारणा : रोज़ाना कई बार कॉम्ब करने से बाल घने और शाइनी हो जाते हैं।

सच्चाई : ऐसा नहीं है। अच्छी तरह से कंघी करने से बालों में जमे धूल के कण निकल जाते हैं और रक्त संचार में सुधार होता है। इससे सीबम अर्थात बालों में प्राकृतिक तेल का उत्पादन होता है। फिर कॉम्बिंग करते रहने से यह चिकनाहट या तेल बालों में फैल जाता है और वे घने व चमकदार लगते हैं। अच्छे परिणाम के लिए सही हेयर ब्रश लें। पहले बालों को सुलझाते हुए कंघी करें, फिर ऊपर से नीचे तक कंघी करें। गीले बालों पर कंघी कभी न करें, इससे बाल टूट सकते हैं। हमेशा इन्हें बांधकर भी न रखें।

धारणा : ऑयली स्किन के कारण

टी-ज़ोन चमकता है।

सच्चाई : यह धारणा गलत है। टी-ज़ोन ऐसा एरिया है, जो सामने दिखने की वजह से चमकता ही है, जो नाक के दोनों तरफ और चिन या ठोड़ी के आसपास का होता है। ड्राई एरिया में पाउडर थोड़ा कम लगाएं, जबकि टी-ज़ोन में पाउडर ज्य़ादा लगाएं। मेकअप के एकाध घंटे के अंदर ही यदि चिन पर चमक दिखाई पड़े तो इसका मतलब है कि स्किन ऑयली है, इसलिए अपनी स्किन के हिसाब से ही मेकअप करें।

धारणा : फाउंडेशन की हेवी लेयर लगाने से चेहरे की झुर्रियों और फाइन लाइंस को छुपाया जा सकता है।

सच्चाई : यह सच नहीं है। त्वचा में ड्राईनेस के कारण चेहरे पर झुर्रियां पडऩे लगती हैं। फाउंडेशन की मोटी लेयर लगाने से यह त्वचा पर स्मज नहीं होता है और लाइनें दिखने लगती हैं। इसलिए झुर्रियों को छुपाने के लिए त्वचा के रंग से मेल खाते हुए, लाइटवेट और अच्छी क्वॉलिटी वाले फाउंडेशन का चुनाव करें, जो त्वचा में आसानी से मिलकर चेहरे की झुर्रियों को कंसील करे।

धारणा : एस्ट्रिंजेंट से त्वचा के पोर्स बंद हो जाते हैं। 

सच्चाई : यह धारणा गलत है। त्वचा के छिद्र खिड़की की तरह खोले या बंद नहीं किए जा सकते। एस्ट्रिंजेंट त्वचा को उकसाते हैं, जिससे छोटी मांसपेशियां उभरकर तन जाती हैं। इससे रोमछिद्र कुछ देर के लिए दिखते नहीं। प्राय: इसमें एल्कोहॉल का अंश होता है, इसलिए त्वचा का तेल और पानी सूख जाता है। खुले छिद्रों को कोमल बेस से ढकें।

धारणा : बालों की नियमित कंडिशनिंग व हेयर सीरम से दोमुंहें बाल ठीक हो जाते हैं।

सच्चाई : यह धारणा सही है। कंडिशनिंग व सीरम से बालों को पोषण मिलता है और दोमुंहे बाल कुछ हद तक सुलझ जाते हैं पर वे पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकते। इस समस्या को सुलझाने का एकमात्र तरीका यह है कि खराब बालों को रेगुलर ट्रिम कराते रहें ताकि वे व्यवस्थित रहें। बालों के टेक्सचर को मुलायम बनाने के लिए कंडिशनर और सीरम लगाएं।

 

By Sakhi User