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असली पश्मीना शॉल की पहचान कैसे करें? हजारों खर्च करने से पहले जरूर जान लीजिए ये 5 तरीके

Published: Mon, 02 Feb 2026 11:29 AM (IST)

पश्मीना की भारी डिमांड और महंगी कीमतों के कारण बाजार में नकली पश्मीना की भरमार है। ऐसे में हजारों-लाखों रुपए ...और पढ़ें

नकली तो नहीं आपका पश्मीना? (Picture Courtesy: Facebook)

नकली तो नहीं आपका पश्मीना? (Picture Courtesy: Facebook)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पश्मीना शॉल सिर्फ एक ऊनी कपड़ा नहीं है, बल्कि एक विरासत है। लेकिन आजकल बाजार में नकली पश्मीना शॉल का भंडार लगा हुआ है। ऐसे में अगर आप कभी पश्मीना शॉल खरीदना चाहते हैं, तो उस पर 30-40 हजार रुपए की भारी रकम खर्च करने से पहले यह देख लें कि यह सचमुच पश्मीना है भी या नहीं। 

नकली और सेमी-सिंथेटिक पश्मीना शॉल पहली नजर में बिल्कुल असली जैसे लग सकते हैं। इसलिए ग्राहक इन पर भी ब़़ी कीमत चुकाने को राजी हो जाते हैं। लेकिन कुछ खास बातों को ध्यान में रखकर आप आसानी से पश्मीना की शुद्धता की जांच कर सकते हैं। आइए जानें कैसे। 

Pashmeena Shawl

(Picture Courtesy: Facebook)

ऊन का स्रोत और गुणवत्ता

असली पश्मीना लद्दाख में पाए जाने वाले चांगथांगी बकरियों के अल्ट्रा-फाइन अंडरकोट से बनाया जाता है। ये बकरियां लद्दाख के बेहद ठंडे तापमान में रहती हैं, जिसके कारण उनके बालों में बेहद गर्माहट, कोमलता और हल्कापन होता है। इसलिए और किसी भी तरह का ऊन ऐसी गर्माहट नहीं दे सकता, जो असली पश्मीना देता है।

वजन में हल्कापन

पश्मीना की सबसे बड़ी खूबी इसका वजन है। असली पश्मीना शॉल वजन में इतना हल्का होता है कि आप हैरान रह जाएंगे। एक शुद्ध पश्मीना शॉल का वजन लगभग 180 ग्राम तक हो सकता है, जबकि एक पश्मीना स्टोल महज 95 ग्राम जितना हल्का हो सकता है। अगर शॉल हाथ में लेने पर भारी महसूस हो, तो उसकी शुद्धता पर संदेह किया जा सकता है।

बर्न टेस्ट 

शुद्धता जांचने का सबसे सटीक तरीका बर्न टेस्ट है। इसके लिए शॉल के किनारे से एक छोटा सा धागा निकालें और उसे जलाएं।

  • असली पश्मीना- यह प्राकृतिक रेशों की तरह धीरे-धीरे जलता है और जलने पर इससे जलते हुए बालों जैसी गंध आती है। जलने के बाद इसकी राख बिल्कुल महीन पाउडर जैसी हो जाती है।
  • नकली पश्मीना- नकली या सिंथेटिक धागा जलने पर प्लास्टिक की तरह पिघलने लगता है, उसमें से प्लास्टिक जैसी गंध आती है और वह राख बनने के बजाय कठोर बन जाता है।

बुनावट और फिनिशिंग

पश्मीना के धागे इतने नाजुक और महीन होते हैं कि उन्हें मशीनों पर नहीं बुना जा सकता। इसलिए असली पश्मीना हमेशा हाथ से बुना जाता है। मशीन से बने कपड़ों में अक्सर एक बहुत ही सटीक और परफेक्ट फिनिशिंग होती है, जबकि हाथ से बुने हुए पश्मीना में धागों की बुनावट में थोड़ी असमानता देखी जा सकती है, जो इसके असली होने का प्रमाण है। अगर कोई दुकानदार आपको पूरी तरह से मशीन जैसी फिनिशिंग वाला शॉल असली पश्मीना कहकर बेच रहा है, तो सावधान हो जाएं।

जीआई (Geographical Indication) टैग

पश्मीना एक महंगा इंवेस्टमेंट है, जिसकी कीमत हजारों में होती है। इसलिए, खरीदारी करते समय दुकानदार से जीआई टैग की मांग जरूर करें। यह टैग उत्पाद की प्रामाणिकता और वह कहां बना है इसकी गारंटी देता है।