देश मेक इन इंडिया के साथ-साथ डिजिटल इंडिया की ओर भी अपने कदम बढ़ा चुका है। ई-कॉमर्स, ई-बैंकिंंग, ई-टिकटिंग से लेकर एजुकेशन और हेल्थकेयर, पुलिस से लेकर कोर्ट तक हर सेक्टर को डिजिटल बनाने के ठोस प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। जाहिर है, इन सभी क्षेत्रों में टेक-सेवी युवाओं की जरूरत बढ़ेगी। वेब डिजाइनर्स, डेवलपर्स, प्रोग्रामर्स और डिजिटल सॉल्यूशन मार्केटिंग एक्सपट्र्स की डिमांड होगी। यही वजह है कि केंद्र सरकार आने वाले पांच वर्षों में न सिर्फ स्किल्ड आइटी फोर्स तैयार करना चाहती है, बल्कि डिजिटल इंडिया के माध्यम से डायरेक्ट और इनडायरेक्ट तौर पर बड़े पैमाने पर जॉब क्रिएशन करने का इरादा भी रखती है। आखिर यंग इंडिया के लिए इससे बड़ा और सुनहरा मौका क्या हो सकता है...

डिजिटल इंडिया के जरिए अगले पांच साल में एक करोड़ से ज्यादा शहरी और ग्रामीण युवाओं को आइटी, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स में ट्रेंड किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस अभियान से नौजवानों को रोजगार मिलेगा। प्रत्यक्ष रूप से 1.7 करोड़, जबकि अप्रत्यक्ष तौर पर 8.5 करोड़ युवाओं के लिए जॉब क्रिएट होने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, गांवों में बीपीओ खोलने के साथ ही पांच लाख रूरल आइटी वर्क फोर्स तैयार करने की योजना है। जब रोजगार सृजन की बात होगी, तो शिक्षा को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है। डिजिटल इंडिया से शिक्षा के क्षेत्र में भी आमूल-चूल बदलाव लाने की योजना है। करीब 2.5 लाख स्कूल, यूनिवर्सिटीज आदि को वाई-फाई से कनेक्ट किया जाएगा। इससे जिन गांवों में अच्छे शिक्षक न भी हों, वहां तकनीक के जरिए शहर के टीचर्स, प्रोफेसर्स सैटेलाइट और ब्रॉडबैंड के जरिए क्लासेज या ट्यूटोरियल्स लेंगे।

ऑनलाइन की ओर बढ़ते कदम

इसमें दो राय नहीं है कि इंटरनेट और तकनीकी क्रांति के मामले में भारत तेजी से अपने कदम बढ़ा रहा है। आइटी के अलावा हेल्थ, एजुकेशन, इंश्योरेंस, सर्विस और बैंकिंग जैसे सेक्टर्स में ई-सर्विस की सुविधाएं दिनों-दिन बढ़ रही हैं। आज आप कोई मेडिकल टेस्ट कराते हैं, तो कागजी रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना पड़ता। सब कुछ ऑनलाइन उपलब्ध होता है। इंश्योरेंस सेक्टर पर नजर डालें, तो वहां भी ऑनलाइन प्रीमियम जमा करने जैसी सहूलियतें मिलने लगी हैं। बैंकिंग तो इंटरनेट के अलावा मोबाइल पर भी होने लगी है। शिक्षा के क्षेत्र में अब तक प्राइवेट इंस्टीट्यूशंस ऑनलाइन स्पेस में मोर्चा संभाले हुए थे, लेकिन अब आइआइटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी आगे आ रहे हैं। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार सभी ग्राम पंचायतों को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे की कोशिश करने जा रही है। इसके तहत 2.5 लाख गांवों में ब्रॉडबैंड सेवा पहुंचाई जाएगी। शुरुआत केरल के इडुक्की जिले से हो चुकी है, यानी यह पहला जिला है जिसे नेशनल ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क से कनेक्ट किया गया है। इस पंचायत के अंतर्गत आने वाले सभी गांव मोबाइल फोन और इंटरनेट से कनेक्टेड होंगे। देश के अन्य गांवों में भी जल्द ही ऐसी पहल होगी।

डिजिटल की तरफ कदम

-इंडिया को डिजिटली एम्पॉवर्ड सोसायटी और नॉलेज में बदलने का यह अंब्रेला प्रोग्राम है।

3 सेंट्रल एरियाज पर फोकस

-हर नागरिक के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर

-गवर्र्नेंस ऐंड सर्विसेज ऑन डिमांड

-नागरिकों का डिजिटल एम्पॉवरमेंट

9 पिलर्स पर जोर

-ब्रॉडबैंड हाइवेज

-यूनिवर्सल एक्सेस टु फोन्स

-पब्लिक इंटरनेट एक्सेस प्रोग्राम

-ई-गवर्र्नेंस: टेक्नोलाइज्ड सरकारी सिस्टम

-ई-क्रांति: सर्विसेज की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी

-सबके लिए इन्फॉर्मेशन

-इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग

-जॉब्स के लिए आइटी

-अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम्स

ई-एजुकेशन क्वालिटी कंटेंट

भारत में ऑनलाइन एजुकेशन स्पेस में काफी प्रगति हुई है। युवाओं को आज जिस क्वालिटी कंटेंट की दरकार है, वह उन्हें ई-लर्निंग के माध्यम से मिल रहा है। स्मार्टफोन, ऐप और वर्चुअल क्लासरूम ने पढ़ाई को आसान बनाने के साथ ही उसकी क्वालिटी को बढ़ाने में मदद की है। ऐसा अनुमान है कि 2017 तक ऑनलाइन एजुकेशन मार्केट करीब 40 अरब डॉलर के आसपास पहुंच जाएगा। फिलहाल यह लगभग 20 अरब डॉलर का है।

पढ़ाई हुई आसान

आज चाहे बेसिक स्कूल कोर्स की स्टडी हो या सीए, एमबीए या आइटी जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज या फिर डांस या म्यूजिक के कोर्सेज की, हर जगह ई-लर्निंग मेथड्स बहुपयोगी साबित हो रहे हैं। मार्केट में ऐसे पोर्टल्स की संख्या बढ़ गई है जो जेइइ, एआइपीएमटी, बैंकिंग जैसे एंट्रेंस एग्जाम्स की प्रिपरेशन कराते हैं। इसी तरह यूनिवर्सिटीज अब मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स (एमओओसी) जैसे टेक्नोलॉजिकल इनोवेशंस की मदद ले रही हैं। इससे देश के किसी भी कोने में बैठे स्टूडेंट्स अपनी पसंद का ऑनलाइन कोर्स कर सकते हैं। इंडिया में रहते हुए विदेशी यूनिवर्सिटीज से डिग्री हासिल कर सकते हैं। अब आइआइटी में पढ़ाई न कर पाने वाले स्टूडेंट्स भी एमओओसी के जरिए आइआइटी मद्रास और कानपुर के प्रोफेसर्स के लेक्चर्स ऑनलाइन सुन सकते हैं। इसके लिए न ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत होती है और न ही कहीं दूर जाने की। कम फीस में क्वालिटी एजुकेशन उपलब्ध होने लगा है।

ई-लर्निंग का मार्केट

ई-लर्निंग की लोकप्रियता का आलम यह है कि देश के अलावा कई विदेशी प्लेयर्स स्टूडेंट्स को अलग-अलग सब्जेक्ट्स में ऑनलाइन कोर्सेज उपलब्ध करा रहे हैं। इसमें कोर्सेरा, उडेसिटी, उडेमी, करियर लॉन्चर, टाइम आदि उल्लेखनीय हैं। बीते वर्ष मार्च तक अमेरिका के बाद कोर्सेरा के दूसरे सबसे ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स भारत से थे। कोर्सेरा देश की टॉप यूनिवर्सिटीज के साथ पार्टनरशिप कर फ्री में ऑनलाइन कोर्सेज उपलब्ध कराता है। यहां इसका इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के साथ टाई-अप है। ई-लर्निंग का कारोबार बढऩे से ऑनलाइन ट्यूटर्स की भी एक नई फोर्स तैयार हो रही है, जो अपनी सुविधानुसार घर बैठे कमाई कर रहे हैं। एजुकेशन स्टार्ट-अप्स में इनवेस्टमेंट बढऩे से भी रोजगार के नए अवसर लगातार सामने आ रहे हैं।

ई-बैंकिंग हाई प्रोडक्टिविटी

सरकार के महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से बैंकिंग इंडस्ट्री में बड़े बदलाव की उम्मीद है। यानी ई-बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग को बढ़ावा मिलने से कैश, चेक, एप्लीकेशन फॉर्म, स्टेटमेंट आदि पर होने वाला कागजी खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा। इससे बैंकों की सेल्स प्रोडक्टिविटी, स्टाफ प्रोडक्टिविटी, सर्विस क्वालिटी और पहुंच में भी इजाफा होगा। बोस्टन कंस्लटिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 तक स्मार्टफोन ही प्राइमरी

ई-इंडिया का वादा

डेढ़ लाख पोस्ट ऑफिस को मल्टीपल सर्विस सेेंटर बनाने की सरकार की योजना है। इसके साथ ही गांवों में बीपीओ भी शुरू किए जाएंगे।

ब्रॉडबैंड हाइवेज

दिसंबर 2016 तक 2.5 लाख ग्राम पंचायतों में ब्रॉडबैंड सेवा की शुरुआत करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, शहरों में वर्चुअल नेटवर्क ऑपरेटर्स और स्मार्ट बिल्डिंग बनाने की योजना भी है। मार्च 2017 तक नेशनल इंफॉर्मेशन स्ट्रक्चर खड़ा करने की पूरी कोशिश होगी।

यूनिवर्सल मोबाइल एक्सेस

साल 2018 तक 16,000 करोड़ रुपये की लागत से 42,300 गांवों तक मोबाइल फोन की सुविधा पहुंचाने का सरकार का प्रयास होगा।

पब्लिक इंटरनेट एक्सेस

आने वाले दो वर्षों में यानी मार्च 2017 तक गांवों में कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, डेढ़ लाख पोस्ट ऑफिस को मल्टीपल सर्विस सेंटर में तब्दील किया जाएगा। इस पर कुल 4,750 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

ई-गवर्र्नेंस को बढ़ावा

वैसे तो सरकार के कई विभागों में ई-गवर्र्नेंस को प्रोत्साहित किया जा रहा है, लेकिन आने वाले सालों में इसमें और तेजी लाने की कोशिश होगी। इससे लोगों को सर्टिफिकेट लेने से लेकर आधार कार्ड बनाने या अपनी कोई शिकायत दर्ज कराने में आसानी हो जाएगी।

ई-इंडिया का वादा

ई-क्रांति

ई-क्रांति के जरिए हर सर्विस की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी का प्लान है।

ई-एजुकेशन

-ढाई लाख स्कूलों में फ्री वाई-फाई और ब्राडबैंड कनेक्शन

ई-कॉमर्स

-ऑनलाइन कैश, लोन, मोबाइल बैंकिंग से रिलीफ पेमेंट

ई-हेल्थकेयर

-ऑनलाइन मेडिकल कंसल्टेशन

-ऑनलाइन मेडिकल रिकॉर्ड

-ऑनलाइन मेडिकल सप्लाई

-मरीजों की ऑनलाइन इंफॉर्मेशन

-3 साल में पूरी कवरेज की योजना

ई-सिक्योरिटी

-मोबाइल इमरजेंसी सर्विसेज

-नेशनल साइबर सिक्योरिटी को-ऑर्डिनेशन सेंटर

ई-फाइनेंस

-मोबाइल बैंकिंग

-माइक्रो एटीएम प्रोग्राम

-ऑनलाइन पोस्टऑफिस

ई-जस्टिस

-ई-कोर्ट

-ई-पुलिस

-ई-जेल

-ई-प्रॉजिक्यूशन

टू-वे कम्युनिकेशन

-सोशल मीडिया और वेब बेस्ड प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिकों से सीधा जुड़ाव

-देखें www.mygov.in

इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग

-मेक इन इंडिया के तहत सेट टॉप बॉक्सेज, मोबाइल्स, वी-सैट्स, कंज्यूमर ऐंड मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्ट एनर्जी मीटर्स, स्मार्ट काड्र्स, इंक्यूबेटर्स, क्लस्टर्स की इंडिया में मैन्युफैक्चरिंग पर जोर।

बैकिंग चैनल के रोल में आ जाएंगे। इंटरनेट, पीओएस डेबिट और ईसीएस जैसे डिजिटल चैनल्स पर पेमेंट ग्रोथ होगी, जबकि बैंकों के ब्रांचेज स्पेशल कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने लगेंगे।

मोबाइल बैंकिंग की पॉवर

शहरों या मेट्रो सिटीज में रहने वाले ज्यादातर कस्टमर्स आज तमाम तरह के बिल पे करने से लेकर टिकट की बुकिंग, फंड ट्रांसफर, मोबाइल फोन रिचार्ज या बैंक अकाउंट खोलने के लिए मोबाइल फोन या इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करने लगे हैं। 2014 में मोबाइल बैंकिंग की सेवा लेने वाले एसबीआइ कस्टमर्स की संख्या 85.7 लाख से बढ़कर 1.25 करोड़ हो गई। प्राइवेट सेक्टर में एचडीएफसी और आइसीआइसीआइ बैंक का मोबाइल बैंकिंग स्पेस में दबदबा है। वैसे, इंडिया में मोबाइल बैंकिंग के कुल कस्टमर्स की संख्या करीब - करोड़ है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार, मोबाइल बैंकिंग से बैंक और कस्टमर दोनों को फायदा है क्योंकि इसमें ब्रांच बैंकिंग का 2 प्रतिशत, एटीएम का 50 प्रतिशत और इंटरनेट बैंकिंग का सिर्फ 50 प्रतिशत खर्च आता है।

मिनटों में निकलेगा सॉल्यूशन

बैंकों में डिजिटल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से मैनपॉवर की प्लानिंग, सही जगह पर सही प्रोफेशनल की प्लेसमेंट में मदद मिलेगी। साथ ही साथ परफॉर्मेंस मैनेजमेंट में पारदर्शिता आएगी। कस्टमर सर्विस में व्यापक सुधार आएगा। इस समय बैंकिंग सिस्टम के अंतर्गत संचालित कॉल सेंटर्स ऑनलाइन कस्टमर्स की पूरी मदद करते हैं। कस्टमर केयर का नंबर डायल करते ही, आपकी बात फोन बैंकिंग ऑफिसर से

होती है और मिनटों में समस्या का समाधान निकल जाता है।

न्यू जॉब क्रिएशन

सबसे बड़ी बात, डिजिटाइजेशन की वजह से बैंकों में वेब डिजाइनर्स, टेक्नोलॉजी फम्र्स, डिजिटल मीडिया एजेंसीज, सोशल मीडिया प्लेटफॉम्र्स, फाइनेंशियल वेबसाइट्स, स्पेशलाइज्ड वेब एनालिटिक्स फम्र्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉम्र्स और ऑनलाइन मर्चेंट्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इससे रोजगार के नए अवसर सामने आ रहे हैं। अपनी डिजिटल सेल बढ़ाने के लिए बैंक अपनी डेडिकेटेड टीम भी बना रहे हैं।

ई-हेल्थकेयर : सुधरेगी सेहत

एजुकेशन की तरह हेल्थकेयर सेक्टर भी ऑफलाइन से ऑनलाइन की ओर कदम बढ़ा चुका है। इंडस्ट्री रिपोट्र्स के मुताबिक, 2015 तक ऑनलाइन हॉस्पिटल मार्केट करीब 10,860 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाएगा। मैक्स हेल्थकेयर, अपोलो और फोर्टिस जैसे देश के प्रमुख हॉस्पिटल चेन्स ऑनलाइन माध्यम के जरिए छोटे शहरों और कस्बों तक अपनी सेवा का विस्तार कर रहे हैं। इनके अलावा ऑनलाइन सेगमेंट में कई इनोवेटिव हेल्थ स्टार्ट-अप्स, मेडिकल कंसल्टेंसी से लेकर हेल्थ इक्विपमेंट्स तक लोगों को प्रोवाइड करा रहे हैं। यहां तक कि अब ब्लड डोनर्स सीधे फेसबुक से कनेक्ट होने लगे हैं।

डॉक्टर-पेशेंट का बढ़ा कनेक्शन

भारत में ऐसे लोगों की तादाद बढ़ रही है, जो डॉक्टर्स या हेल्थ एक्सपट्र्स से ऑनलाइन कंसल्टेंशन ले रहे हैं। वे ऑनलाइन ही अप्वाइंटमेंट बुक कराते हैं। दरअसल, ऑनलाइन हेल्थ वेंचर्स ने डॉक्टरों और मरीजों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया है, जहां वे एक-दूसरे से कनेक्ट हो पाते हैं। इससे समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है। डॉक्टर नेट और फोन के जरिए हमेशा मरीज के संपर्क में रहते हैं। मरीज का डेटाबेस उनके स्मार्टफोन से लिंक होने पर, वह कहीं से भी पेशेंट को गाइड कर सकते हैं। उसका लाइन ऑफ ट्रीटमेंट बता सकते हैं।

रिकॉड्र्स की मेंटिनेंस

हेल्थकेयर सेक्टर में डिजिटाइजेशन से मेडिकल रिकॉड्र्स को मेनटेन और मैनेज करना कहीं ज्यादा आसान हो गया है। आज अधिकांश हॉस्पिटल्स और डायग्नोस्टिक लेबोरेट्रीज की रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध होने लगी है। मरीज अपने सारे मेडिकल रिकॉड्र्स डायरेक्ट अपने डेस्कटॉप या स्मार्टफोन या ऐप पर एक्सेस कर सकता है। वह चाहे तो, इंटरनेट की मदद से हॉस्पिटल की परफॉर्मेंस, डॉक्टर का ट्रैक रिकॉर्ड और फीस आदि के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है। ऑनलाइन मेडिकल सर्विस की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अब कई ट्रेडिशनल मेडिकल प्रैक्टिशनर्स भी वर्चुअल वल्र्ड में दस्तक दे रहे हैं। वहीं, जॉब के नजरिए से भी ऑनलाइन चैट एग्जीक्यूटिव, टेक लीड, जावा, एचटीएमएल डेवलपर, मोबाइल लीड, हेल्थकेयर कंसल्टेंट जैसे कई नए ऑप्शंस यहां खुल गए हैं।

ई-ट्रैवलिंग : ऐप से बुकिंग

डिजिटाइजेशन की इस प्रक्रिया में ट्रैवलिंग इंडस्ट्री भी पीछे नहींहै। प्लेन, ट्रेन या बस की टिकट के अलावा होटल रूम्स की बुकिंग, सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार, एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में जापान और चीन के बाद भारत का ऑनलाइन ट्रैवल मार्केट करीब 24.8 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रहा है। स्मार्टफोन और टैबलेट सरीखी टेक्नोलॉजी की मदद से ऑनलाइन ट्रैवल सेल्स में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

डिजिटल बुकिंग को प्रिफरेंस

वल्र्ड ट्रैवल मार्केट, ग्लोबल ट्रेंड्स 2014 की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2013 से 2014 के बीच ऑनलाइन रेलवे बुकिंग 300 प्रतिशत तक बढ़ गई। आज एक एसएमएस के जरिए भी आइआरसीटी की साइट पर बुकिंग कराई जा सकती है। इससे ऑफलाइन ट्रैवल एजेंट्स तक को फायदा हुआ है। वे इंटरनेट के बगैर भी मोबाइल पर पैसेंजर्स का टिकट बुक कर सकते हैं। सिर्फ टिकट ही नहीं, बल्कि होटल रिजर्वेशन से लेकर हॉलिडे पैकेज तक ऑनलाइन ऑफर कर रहे हैं। इसमें ट्रैवल पोर्टल्स का भी बड़ा योगदान रहा है।

ई-इंडिया का वादा

आइटी फॉर जॉब्स

-गांवों-कस्बों के करीब 1 करोड़ से ज्यादा स्टूडेंट्स को अगले 5 साल में आइटी जॉब्स के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।

-आइटी सर्विस डिलीवर करने के लिए अगले 2 साल में 3 लाख एजेंट्स की नियुक्ति

-ग्रामीण इलाकों में अगले 5 साल में 5 लाख आइटी प्रोफेशनल्स की टेलीकॉम रेडी वर्कफोर्स

-नॉर्थ-ईस्ट राज्यों के हर गांव में बीपीओ सेंटर्स की स्थापना

अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम्स

मास मैसेजिंग

-1 करोड़ 36 लाख मोबाइल्स और 22 लाख ई-मेल्स तक पहुंच

-कवरेज-चुने गए जनप्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी

ई-ग्रीटिंग

-सरकारी ई-ग्रीटिंग्स के टैंपलेट्स

-पोर्टल 14 अगस्त 2014 से ही तैयार

बॉयोमेट्रिक अटेंडेंस

-केेंद्र सरकार के दिल्ली स्थित सभी दफ्तरों में लागू

सभी यूनिवर्सिटीज में वाई-फाई

-करीब 790 करोड़ रुपये की लागत से दिसंबर 2015 तक पूरा करने का लक्ष्य

ई-मेल होगा प्राइमरी कम्युनिकेशन

-सरकारी विभागों में सबकी ई-मेल आइडी होंगी

-पहले फेज में 10 लाख एम्प्लॉइज की

-दूसरे फेज में 50 लाख एम्प्लॉइज की

वाई-फाई सुविधा

-10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में दिसंबर 2015 तक वाई-फाई सुविधा

ई-बुक्स

-मार्च 2015 तक डिजिटल स्कूली किताबें

वेदर इंफॉर्मेशन सिस्टम

-एसएमएस बेस्ड वेदर इंफॉर्मेशन

वेबसाइट डिजाइनर

आज के डिजिटल इंडिया में कंपनी हो या ऑर्गनाइजेशन, सरकारी हो या प्राइवेट उसकी वेबसाइट को उसका डिजिटल बिजनेस कार्ड माना जाता है। इनकी जरूरत और भी बढऩे वाली है। ये काम स्किल्ड प्रोफेशनल वेबसाइट डिजाइनर्स ही कर सकते हैं।

वर्क प्रोफाइल

वेब डिजाइनिंग में वेबसाइट डेवलप करने के अलावा, वेब कंटेंट राइटिंग, वेब कटेंट प्लानिंग, नीड एनालिसिस, सॉल्यूशन डिजाइनिंग, प्रोडक्ट फोटोग्राफी, ग्राफिक डिजाइनिंग जैसे काम शामिल होते हैं।

एलिजिबिलिटी

वेबसाइट डिजाइनिंग से संबंधित सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या बैचलर डिग्री में नामांकन के लिए किसी भी विषय में 12वीं पास होना जरूरी है।

स्किल्स

वेबसाइट को इंफॉर्मेटिव व अट्रैक्टिव बनाने के लिए एचटीएमएल, जावा स्क्रिप्ट, सीएसएस जैसे सॉफ्टवेयर के साथ-साथ ग्राफिक डिजाइन, फोटोशॉप, कोरल ड्रॉ, इलस्ट्रेशन, फ्लैश का बेहतर नॉलेज होना बेहद जरूरी है। टेक्निकल स्किल और क्रिएटिविटी के साथ हमेशा नए-नए आइडिया होने चाहिए और स़ॉफ्टवेयर्स के प्रति अपडेट रहना भी जरूरी है।

इंस्टीट्यूट वॉच

-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद

www.nid.edu

-एरिना एनिमेशन

www.arena-multimedia.com

-टीजीसी एनिमेशन एंड मल्टीमीडिया, नई दिल्ली www.tgcindia.com

इनकी बढ़ेगी डिमांड

पिछले एक दशक में देश में डिजिटाइजेशन में काफी काम हुआ है, लेकिन भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'डिजिटल इंडिया' के शुरू होने के बाद सभी क्षेत्रों में काफी तेजी से इसका विस्तार होगा। डिजिटाइजेशन बढऩे से कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और मार्केट में बने रहने के लिए कंपनियों को हर दिन नए और बेहतर सॉफ्टवेयर की जरूरत होगी।

सॉफ्टवेयर डेवलपर

गार्टनर ने अपनी एक रिपोर्ट में संभावना जताई है कि 2020 तक भारत विश्व का सॉफ्टवेयर सुपर पावर बन सकता है। ऐसे में आने वाले समय में प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर डेवलपर्स काफी डिमांड में रहेंगे।

प्रमुख कोर्स

-बीएससी इन कंप्यूटर साइंस

-बैचलर इन सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग

-बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन

-मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन

-मास्टर इन सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग

-सर्टिफिकेट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट ऑफ सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट

एलिजिबिलिटी

कंप्यूटर साइंस या सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के बैचलर डिग्री में एनरोलमेंट के लिए मैथ्स और साइंस सब्जेक्ट में 12वीं की डिग्री होनी चाहिए, वहीं मास्टर डिग्री के लिए कंप्यूटर साइंस या सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग या मैथ्स में बैचलर डिग्री जरूरी है।

स्किल्स

सॉफ्टवेयर डेवलपर कस्टमर की जरूरतों के अनुसार कंप्यूटर प्रोग्रामिंग या सॉफ्टवेयर डेवलप करता है। ऐसे में सॉफ्टवेयर डेवलपर में स्ट्रॉन्ग कंप्यूटर प्रोग्रामिंग स्किल्स, एनालिटिकल स्किल्स, क्रिएटिविटी, कम्युनिकेशन स्किल्स, डिटेल ओरिएंटेड, कस्टमर सर्विस स्किल्स, प्रॉबल्म सॉल्विंग स्किल्स और इंटर-पर्सनल स्किल्स होना जरूरी है। इसके साथ ही हर दिन सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में आने वाले बदलाव से अपडेट रहना और इनोवेटिव सॉफ्टवेयर डेवलप करने के लिए रिसर्च की हैबिट जरूरी है।

इंस्टीट्यूट

-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, कोलकाता

http://niitimperia.com/

-आइआइटी, दिल्ली, चेन्नई, कानपुर, बॉम्बे, रुड़की, गुवाहाटी

www.iitd.ac.in/

-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद www.iiita.ac.in/

सोशल मीडिया मैनेजर

इस समय देश में लगभग 20 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं। इनमें से अधिकांश यूजर्स किसी न किसी रूप में सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं। सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से कंपनियां अपने प्रमोशन और प्रोडक्ट सेलिंग के लिए इनका बेहतर इस्तेमाल कर रही हंै। सॉफ्टकॉर्न एंटरप्राइजेज के फाउंडर अनुराग श्रीवास्तव के मुताबिक, आने वाले समय में 'डिजिटल इंडिया' प्रोग्राम शुरू होने के बाद कंपनियां प्रोडक्ट सेलिंग के लिए सोशल मीडिया का और अधिक इस्तेमाल करेंगी। ऐसे में कंपनियों को सोशल मीडिया पर अपने बेहतर प्रमोशन के लिए काफी संख्या में प्रोफेशनल सोशल मीडिया मैनेजर्स की जरूरत होगी।

कोर्स

-सोशल मीडिया मार्केटिंग सर्टिफिकेशन कोर्स

-सर्टिफिकेशन इन सोशल ऐंड मोबाइल मार्केटिंग

-सर्टिफिकेट इन सोशल मीडिया

-बीजेएमसी, पीजीजेएमसी, एमजेएमसी

एलिजिबिलिटी

सोशल मीडिया में सर्टिफिकेट कोर्स और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन जर्नलिज्म ऐंड मास कम्युनिकेशन (पीजीजेएमसी) और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म ऐंड मास कम्युनिकेशन करने के लिए ग्रेजुएट होना जरूरी है, वहीं बीजेएमसी के लिए 12वीं पास होना जरूरी है।

वर्क प्रोफाइल

कंपनी और प्रोडक्ट के बारे में कम शब्दों में मीनिंगफुल और इंपैक्टफुल मैसेज तैयार कर उसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपलोड करना। सोशल मीडिया यूजर्स को प्रोडक्ट की तरफ अट्रैक्ट करते हुए कंपनी की ब्रांडिंग करना और कस्टमर के साथ ऑनलाइन टॉक से सॉल्यूशन उपलब्ध कराना सोशल मीडिया मैनेजर्स का प्रमुख काम होता है।

स्किल्स

सोशल मीडिया मैनेजर का सारा काम कंपनी की ब्रांडिंग और विचारों के आदान-प्रदान पर ही केेंद्रित होता है। इस वजह से इनके अंदर बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स के अलावा ब्रांडिंग और मार्केटिंग नॉलेज, ऑउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग और एनालिसिस करने की बेहतर क्षमता होनी चाहिए।

इंस्टीट्यूट वॉच

-डिजिटल एकेडमी, गुडग़ांव

http://www.digitalacademyindia.com

-डिजिटल विद्या, दिल्ली, मुंबई, बंगलुरू, गुडग़ांव

http://www.digitalvidya.com

ऐप डेवलपर

स्मार्टफोन यूजर की बढ़ती संख्या ने ऐप्स की डिमांड में काफी तेजी ला दी है। आने वाले समय में सभी क्षेत्रों की कंपनियों को मार्केट में बने रहने और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंच बनाने के लिए ऐप डेवलप कराना एकमात्र विकल्प होगा। इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार जून 2015 तक भारत में मोबाइल पर इंटरनेट यूजर्स का आंकड़ा 21 करोड़ को पार कर जाएगा, वहीं गार्टनर की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2017 तक 268 अरब से भी ज्यादा बार मोबाइल ऐप्स डाउनलोड किए जाएंगे। ऐसे में एक्सपर्ट ऐप डेवलपर की मांग बढ़ेगी।

एलिजिबिलिटी

साइंस सब्जेक्ट में 12वीं पास युवा ऐप डेवलपमेंट से संबंधित सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और बैचलर डिग्री या कंप्यूटर साइंस या सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल कर सकते हैं।

स्किल्स

क्लाइंट्स की जरूरतों को समझते हुए ऐप डेवलपिंग की क्षमता हो, ताकि ऐसे ऐप का निर्माण कर सकेें, जो स्मॉल स्क्रीन, कम मेमोरी, कम प्रोसेसिंग पावर और ज्यादा से ज्यादा यूजर्स द्वारा संचालित किया जा सके। सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री व ऐप्स मार्केट में हर दिन आने वाले बदलाव से अपडेट रहने के साथ ऐप को इंप्रूव-अपडेट करने की क्षमता भी आवश्यक है।

इंस्टीट्यूट

-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी

http://www.niit.com

-भारती विद्यापीठ डीम्ड यूनिवर्सिटी, पुणे

www.bhartividyapeeth.edu

-एपेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मल्टीमीडिया, कोयंबटूर

www.apexmultimediaz.com

कॉन्सेप्ट ऐंड इनपुट : अंशु सिंह, मिथिलेश श्रीवास्तव, प्रसन्न प्रांजल

Posted By: Babita kashyap

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