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सारंडा मुठभेड़ में मारी गईं तीन महिला नक्सली गोइलकेरा की रहने वालीं, 5 साल पहले छोड़ा था घर-बार

Published: Fri, 23 Jan 2026 10:39 PM (IST)

पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में हुई मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की पहचान तेज हो गई है। पांच महिला ...और पढ़ें

गोइलकेरा में मातम मनाते मुठभेड़ में मारी गई महिला नक्‍सली कैडरों के परिजन।

गोइलकेरा में मातम मनाते मुठभेड़ में मारी गई महिला नक्‍सली कैडरों के परिजन।

HighLights

  1. गोइलकेरा की तीन महिला नक्सलियों की पहचान हुई।

  2. परिजनों और ग्रामीणों में गहरा सदमा, नक्सलवाद का भयावह चेहरा।

जागरण संवाददाता, गोइलकेरा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की पहचान की प्रक्रिया तेज हो गई है। शिनाख्त के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि ढेर हुई पांच महिला नक्सलियों में से तीन गोइलकेरा प्रखंड के सुदूरवर्ती गांवों की रहने वाली थीं। 

कुईड़ा और कदमडीहा पंचायत की रहने वाली थीं महिलाएं

ये तीनों महिलाएं करीब पांच से छह साल पहले अपना घर-बार छोड़कर प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) में शामिल हो गई थीं। 

शुक्रवार को कुईड़ा पंचायत के मुखिया दिनेश चंद्र बोयपाई ने प्रभावित गांवों का दौरा कर परिजनों से संपर्क किया, जहां तस्वीरों के माध्यम से इन महिला नक्सलियों की पहचान की गई।

जोंगा कोड़ाह उर्फ तुर्की: कुईड़ा पंचायत के वनग्राम बोयपाई शासन की रहने वाली जोंगा के माता-पिता का पहले ही देहांत हो चुका है। वह वर्ष 2021-22 में नक्सली दस्ते में शामिल हुई थी। बताया जाता है कि कुछ समय पहले वह एक बार अपने घर लौटी थी, लेकिन इलाके में पुलिस की बढ़ती सक्रियता और नक्सल उन्मूलन अभियान को देखते हुए वह वापस संगठन में चली गई।

पूर्णिमा गोप उर्फ चांदमुनि: कदमडीहा पंचायत के वनग्राम ईचागोड़ा की रहने वाली पूर्णिमा पांच साल पहले संगठन से जुड़ी थी। उसके पिता की मृत्यु काफी समय पहले हो चुकी है और घर में केवल उसकी बूढ़ी मां है।

सोमवारी पूर्ति: कदमडीहा के ही काशीजोड़ा गांव की रहने वाली सोमवारी ने भी पांच साल पहले गांव और परिवार को छोड़ दिया था। उसके परिवार में माता-पिता के अलावा भाई-बहन भी हैं। 

मुुठभेड़ के बाद परिजन और ग्रामीणों में पसरा सन्नाटा  

मुखिया दिनेश चंद्र बोयपाई ने जब पूर्णिमा और सोमवारी के परिजनों से उनके गांव में मुलाकात की, तो तस्वीर देखते ही परिजनों की आंखें छलक पड़ीं। वर्षों पहले घर से लापता हुई बेटियों की इस तरह मौत की खबर मिलने से गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। 

सारंडा में दिखा नक्सलवाद का भयावह चेहरा 

यह घटना दर्शाती है कि किस तरह नक्सली संगठन सुदूरवर्ती गांवों के भोले-भाले युवाओं और महिलाओं को बरगलाकर हिंसा की राह पर धकेल देते हैं। मारे गए 16 नक्सलियों में शामिल इन महिला कैडरों की पहचान होने के बाद अब पुलिस अन्य नक्सलियों के रिकॉर्ड खंगालने में जुटी है। 

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