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कोल्हान का काला सच: 5 साल में 87 महिलाओं की 'डायन' बताकर हत्या, आंकड़ों में देखें अंधविश्वास की भयावहता

Published: Thu, 19 Feb 2026 08:43 PM (IST)

झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में 'डायन-बिसाही' कुप्रथा का भयावह सच सामने आया है। पिछले पांच वर्षों (2021-2025) में 87 महिलाओं ...और पढ़ें

फाइल फोटो।

फाइल फोटो।

HighLights

  1. पश्चिम सिंहभूम में 46 महिलाओं को अंधविश्वास का शिकार बनाया।

  2. अशिक्षा, जागरूकता की कमी से कुप्रथा जारी है।

जागरण संस, कुमारडुंगी। डिजिटल युग में जहां दुनिया चांद और मंगल पर बस्तियां बसाने की बात कर रही है, वहीं झारखंड का कोल्हान प्रमंडल आज भी 'डायन-बिसाही' जैसी अमानवीय कुप्रथा के अंधकार में डूबा है। चाईबासा के कुमारडुंगी थाना क्षेत्र में हाल ही में हुई मां-बेटे को जिंदा जलाने की घटना कोई पहली वारदात नहीं है। 
 
आंकड़ों की परतें खोलें तो पता चलता है कि यहां अंधविश्वास एक 'साइलेंट किलर' की तरह पैर पसार चुका है। कोल्‍हान का काला सच मानवता को शर्मसार कर रहा है। 

खौफनाक आंकड़े: पांच वर्षों में 87 मौतें 

सरकारी आंकड़ों और स्थानीय रिकॉर्ड्स के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों (2021-2025) के दौरान कोल्हान प्रमंडल में कुल 87 महिलाओं की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई क्योंकि उन्हें 'डायन' करार दिया गया था। अकेले पश्चिम सिंहभूम जिले में इस अवधि में 46 महिलाओं ने अपनी जान गंवाई। 

कोल्हान प्रमंडल में वर्षवार हत्या के आंकड़े 

         वर्ष         हत्याओं की संख्या 

  • 2021       16
  • 2022       23
  • 2023       16
  • 2024       18
  • 2025       14
  • कुल          87  

कुमारडुंगी: जहां अपनों ने ही बहाया खून 

कुमारडुंगी थाना क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों में 7 महिलाओं की हत्या हुई है। यहां की घटनाओं का विश्लेषण करें तो एक डरावना सच सामने आता है। अक्सर हत्यारे बाहर वाले नहीं, बल्कि सगे संबंधी (पति, जेठ, बेटा या भतीजा) ही होते हैं। 

विगत वर्षों के प्रमुख मामले (Flashback) 

  • केस 1 (2017): चेमलासाई गांव में बंजलो कुई को शौच के दौरान मार डाला गया। उनका अर्धनग्न शव दिकुबालकांड पुल के नीचे मिला था। 
  • केस 2 (2018): हेस्सासाई में जाम्बी कोंडाकेल के साथ पहले दुष्कर्म किया गया, फिर मुंडन के बाद गला रेतकर हत्या कर दी गई।
  • केस 3 (2019): खोकरकट्टा गांव में 65 वर्षीय मानी हेम्ब्रम को पत्थर से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया गया।
  • केस 4 (2020): पुरगुन सिंकु की हत्या उनके ही भतीजों ने कुल्हाड़ी से कर दी। क्रूरता ऐसी कि सिर को धड़ से अलग कर दिया गया था। 
  • केस 5 (2022): तिरिंगबासा में सुषमा सुंडी को उनके पति, सास-ससुर और जेठ ने मारने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने जंगल की ओर भागकर जान बचाई। 
  • केस 6 (2023): रालीबेड़ा में दशरथ पुरती ने अपनी भाभी सोमवारी पुरती की कटार से हत्या कर दी।
  • केस 7 (2024): महुलडीहा में महेंद्र बोयपाई ने अपनी 67 वर्षीय मां पार्वती हेम्ब्रम की टांगी से काटकर हत्या कर दी। 

क्यों नहीं थम रहा मौत का सिलसिला? 

सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि इस कुप्रथा के पीछे मुख्य कारण अशिक्षा, जागरूकता का अभाव और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है। जब गांव में कोई बीमार होता है या पशु मरते हैं, तो ओझा-गुनी के चक्कर में लोग किसी बेगुनाह महिला को निशाना बना लेते हैं। 

विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ कठोर कानून काफी नहीं है। जब तक गांव-गांव में व्यापक जनजागरण अभियान और वैज्ञानिक चेतना का विकास नहीं होगा, तब तक बेगुनाह महिलाओं की बलि चढ़ती रहेगी।