इस्पात और मगध एक्सप्रेस सहित चार जोड़ी ट्रेनों से छिना सुपरफास्ट का दर्जा, 1 जनवरी से बदलेंगे नंबर
दक्षिण पूर्व रेलवे ने इस्पात और मगध एक्सप्रेस सहित चार जोड़ी ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा हटा दिया है। ये ट्रेनें ...और पढ़ें

चक्रधरपुर रेल मंडल को भी नए ट्रेन नंबरों के अनुसार आवश्यक तकनीकी और परिचालन बदलाव करने के निर्देश मिल चुके हैं।
HighLights
चार जोड़ी ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा हटाया गया।
1 जनवरी 2027 से नए नंबरों पर चलेंगी।
यात्रियों को गति घटने की चिंता सता रही है।
जासं, चक्रधरपुर। दक्षिण पूर्व रेलवे ने हावड़ा-कंटाबांजी और हावड़ा-जूनागढ़ रोड इस्पात एक्सप्रेस समेत चार जोड़ी ट्रेनों को सुपरफास्ट श्रेणी से हटाकर नॉन सुपरफास्ट श्रेणी में शामिल करने का बड़ा निर्णय लिया है।
नए साल की शुरुआत यानी 1 जनवरी 2027 से ये सभी ट्रेनें नए नंबरों के साथ नॉन सुपरफास्ट श्रेणी में परिचालित होंगी। यानी नए साल में इन ट्रेनों की पहचान तो बदलेगी ही, साथ ही इनका सुपरफास्ट का दर्जा भी समाप्त हो जाएगा।
दक्षिण पूर्व रेलवे के उपमुख्य परिचालन प्रबंधक (यातायात) श्रीनिवास सामंत की ओर से इस संबंध में सभी संबंधित रेल मंडलों और अधिकारियों को आधिकारिक पत्र जारी कर दिया गया है।
इसके तहत चक्रधरपुर रेल मंडल को भी नए ट्रेन नंबरों के अनुसार आवश्यक तकनीकी और परिचालन बदलाव करने के निर्देश मिल चुके हैं।
इन ट्रेनों के बदले जाएंगे नंबर और श्रेणियां
रेलवे के इस नए आदेश के बाद प्रभावित होने वाली प्रमुख चार जोड़ी ट्रेनें और उनके नए नंबर इस प्रकार हैं:
- हावड़ा - कंटाबांजी इस्पात एक्सप्रेस: अब तक 22861/22862 नंबर से चलने वाली यह ट्रेन 1 जनवरी 2027 से नए नंबर 18073/18074 के साथ चलाई जाएगी।
- हावड़ा - जूनागढ़ रोड इस्पात एक्सप्रेस: इस ट्रेन का मौजूदा नंबर 12871/12872 बदलकर अब 18071/18072 कर दिया जाएगा।
- टाटानगर - कटिहार एक्सप्रेस: अब तक 28181/28182 नंबर से परिचालित होने वाली यह ट्रेन नए साल से 18633/18634 नंबर से चलेगी।
- मगध एक्सप्रेस (इस्लामपुर - नई दिल्ली - इस्लामपुर): इस लोकप्रिय ट्रेन का नंबर 20801/20802 से बदलकर क्रमशः 18187/18188 कर दिया गया है।
नंबर बदला, दर्जा घटा; क्या धीमी होगी ट्रेनों की रफ्तार?
रेलवे के इस अचानक आए फैसले के बाद से यात्रियों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है और कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
वर्षों से सुपरफास्ट श्रेणी के रूप में पहचान रखने वाली इन ट्रेनों को अचानक नॉन सुपरफास्ट में शामिल करने के पीछे रेलवे का क्या उद्देश्य है, इसे लेकर असमंजस बना हुआ है।
यात्रियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या श्रेणी घटने के साथ ही इन ट्रेनों की परिचालन गति (स्पीड) भी प्रभावित होगी या फिर बदलाव केवल ट्रेन नंबर और कागजी व्यवस्था तक ही सीमित रहेगा?
फिलहाल रेलवे की ओर से जारी अधिसूचना में केवल नए ट्रेन नंबर और श्रेणी परिवर्तन का उल्लेख किया गया है। ट्रेनों की नई समय-सारिणी, निर्धारित यात्रा अवधि और वास्तविक गति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
यात्रियों को रेलवे के स्पष्टीकरण का इंतजार
रेलवे के इस निर्णय ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ जहां रेलवे नेटवर्क को आधुनिक और तेज करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वर्षों पुरानी सुपरफास्ट ट्रेनों का दर्जा छीने जाने से यात्रियों में निराशा है।
अब देखना यह होगा कि 1 जनवरी 2027 से इन ट्रेनों की चाल सचमुच बदलती है या यह बदलाव केवल रेलवे के रिकॉर्ड तक ही सीमित रहता है। यात्री फिलहाल रेलवे की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश और स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहे हैं।