विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चंपुआ में बैलों को घर छोड़ लौटते समय वज्रपात से किसान की मौत, जानिये क्यों दो साल में ठनका बनी साइलेंट किलर

Published: Sat, 18 Jul 2026 09:45 PM (GMT+05:30)

चंपुआ के बिष्णुपुर गांव में खेत से लौट रहे किसान मोहन चरण गिरि की वज्रपात से मौत हो गई, जिससे पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया है।

आकाशीय बिजली की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

आकाशीय बिजली की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. पिछले दो वर्षों में वज्रपात की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।

  2. जलवायु परिवर्तन वज्रपात की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ा रहा है।

संसू, जैंतगढ़। चंपुआ थाना क्षेत्र के बिष्णुपुर गांव में शनिवार शाम आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने से 50 वर्षीय किसान मोहन चरण गिरि की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे बिष्णुपुर गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।
 
मिली जानकारी के अनुसार, बिष्णुपुर निवासी मोहन चरण गिरि शनिवार शाम अपने खेतों से काम खत्म कर बैलों को सुरक्षित घर पहुंचाकर वापस लौट रहे थे। 
 
इसी बीच मौसम ने अचानक करवट ली और तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। मोहन अभी अपने घर से कुछ ही दूरी पर पहुंचे थे कि तभी उनके ऊपर कड़कड़ाती हुई आकाशीय बिजली गिर गई। 
 
वज्रपात की चपेट में आने से वे गंभीर रूप से झुलस गए और मौके पर ही अचेत होकर गिर पड़े। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए चंपुआ उपजिला अस्पताल ले गए। 
 
हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही चंपुआ थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। 
 
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा और सरकारी सहायता देने की मांग की है। प‍िछले दो वर्षों से आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ गई हैं।
 

पिछले दो वर्षों में आकाशीय बिजली बनी 'साइलेंट किलर'

मोहन चरण गिरि की मौत ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर आकाशीय बिजली से होने वाले जान-माल के नुकसान पर चिंता बढ़ा दी है। 
 
आपदा प्रबंधन और मौसम वैज्ञानिकों के हालिया शोधपरक आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत के पूर्वी राज्यों (ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार) में वज्रपात एक बड़े खतरे के रूप में उभरा है:


पिछले दो वर्षों में भारत में हर साल आकाशीय बिजली गिरने से औसतन 2,000 से 2,500 लोगों की जान जाती है। 

  •     70% शिकार ग्रामीण और किसान: आंकड़ों के मुताबिक, वज्रपात का शिकार होने वाले लोगों में 70 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों के किसान और मवेशी चराने वाले लोग होते हैं, जो खुले खेतों या पेड़ों के नीचे आश्रय लेते हैं।
  •     ओडिशा और झारखंड सबसे संवेदनशील: ओडिशा और उससे सटे झारखंड के सीमावर्ती जिलों (जैसे चंपुआ, जैंतगढ़, पश्चिमी सिंहभूम) में छोटानागपुर पठार और बंगाल की खाड़ी से उठने वाली चक्रवाती हवाओं के कारण जून से सितंबर के बीच आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं सबसे अधिक रिकॉर्ड की गई हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण बादलों में घर्षण बढ़ा है, जिससे वज्रपात की तीव्रता और बारंबारता में पिछले दो वर्षों में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।