संवाद सहयोगी, चाईबासा : चाईबासा के उलीझारी में 300 करोड़ की लागत से बनने वाले चाईबासा मेडिकल कॉलेज का काम मजदूरी दर बढ़ाने की मांग को लेकर मजदूरों ने बुधवार को रोक दिया। जिसके बाद काम करने वाले सभी मजदूर एकत्रित होकर उचित मुआवजा देने की मांग करने के लिए नारे बाजी करने लगे। सुबह में जैसे ही मजदूर कार्य करने पहुंचे सभी प्रबंधन से मजदूरी दर बढ़ाने की मांग करने लगे। इसके निर्माण कार्य में लगे लगभग 100 से अधिक मजदूर अपनी मांग के लिए नारा लगाते हुए काम को ठप कर दिये। इस संबंध में जानकारी देते हुए मजदूर भीमसेन देवगम ने कहा कि मेडिकल कॉलेज बन रहा है, इसके लिए सभी ग्रामीणों से सहमति लिया गया। हम सभी मेडिकल कॉलेज निर्माण का विरोध नहीं कर रहे हैं हम उस जगह में काम भी कर रहे हैं। लेकिन सरकार ने जो मजदूरी दर तय किया है वह दिया जाये। वर्तमान समय में मजदूरों को 250 रुपये और मिस्त्री को 350 रुपये दिया जा रहा है। जबकि मजदूरी दर सरकार ने मजदूरों के लिए 390 रुपये और मिस्त्री के लिए 630 रुपये तय किया है। इस आधार पर मेडिकल कॉलेज निर्माण करने वाले प्रबंधन क्यों नहीं मजदूरी दे रहा है। कई बार काम करने वाले ठेकेदार से मजदूरी दर बढ़ाने की मांग किये लेकिन कहा कि जितना रेट चल रहा है उसी आधार से दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि काम करने के दौरान किसी प्रकार का सेफ्टी भी नहीं दिया जाता है। किसी प्रकार घटना मजदूरों के साथ घट जाती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इसलिए प्रबंधन हेलमेट, जुता और ग्लब्स मजदूरों को मुहैया करायें। जिससे सुरक्षित रुप से निर्माण कार्य किया जा सके। उलीझारी में काफी विवाद के बाद 25 एकड़ भूमि में 23 सितंबर 2018 को मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो जाने से क्षेत्र के लोगों का पूरी तरह स्वास्थ्य की हालत सुधर जायेगी। लेकिन मेडिकल कॉलेज निर्माण में समय-समय पर विवाद होते रहता है। कॉलेज का निर्माण तीन वर्ष में पूरा होना है, जिसमें कॉलेज भवन के साथ महिला व पुरुष हास्टल का भी निर्माण किया जायेगा।

Posted By: Jagran

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