बाइक बीमा क्लेम खारिज करना बजाज एलियांज को पड़ा महंगा, चाईबासा उपभोक्ता आयोग ने लगाया जुर्माना
पश्चिमी सिंहभूम उपभोक्ता आयोग ने बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस को बाइक बीमा दावा खारिज करने पर सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया।

जिला उपभोक्ता न्यायालय। (जागरण)
HighLights
बजाज एलियांज को सेवा में कमी का दोषी पाया गया।
कंपनी को 47,360 रुपये भुगतान करने का आदेश।
पश्चिमी सिंहभूम उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला।
जागरण संवाददाता, चाईबासा। बाइक दुर्घटना के बाद बीमा दावा खारिज करना बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को भारी पड़ गया।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पश्चिमी सिंहभूम ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी मानते हुए शिकायतकर्ता मनोज कुमार यादव के पक्ष में फैसला सुनाया है।
आयोग ने बीमा कंपनी को 32,360 रुपये दावा राशि, 10,000 रुपये मानसिक प्रताड़ना तथा 5,000 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया है। पूरी राशि का भुगतान आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर करना होगा।
निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 32,360 रुपये की दावा राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। मामला सी.सी. केस संख्या 29/2025 से संबंधित है।
शिकायतकर्ता मनोज कुमार यादव, पिता कालीपद यादव, बांदा कुंडियाधार, हाटगम्हरिया निवासी हैं। उन्होंने अपनी रॉयल एनफील्ड बाइक का बीमा बजाज एलियांज से कराया था।
पॉलिसी 9 सितंबर 2024 से 8 सितंबर 2025 तक प्रभावी थी। शिकायतकर्ता के अनुसार बाइक दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद उन्होंने बीमा कंपनी और रॉयल एनफील्ड के अधिकृत डीलर एसपी वेंचर्स, चाईबासा से संपर्क किया।
डीलर की ओर से वाहन की मरम्मत का अनुमान तैयार किया गया, लेकिन बीमा कंपनी ने मरम्मत खर्च की स्वीकृति नहीं दी। बीमा कंपनी ने आयोग के समक्ष दावा किया कि दुर्घटना 26 फरवरी 2025 को हुई थी, जबकि उसे इसकी सूचना 1 अप्रैल 2025 को मिली।
कंपनी ने इसे करीब 34 दिनों की देरी बताते हुए शिकायतकर्ता से देरी का कारण, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन की तस्वीर समेत अन्य दस्तावेज मांगे।
बीमा कंपनी के अनुसार 18 अप्रैल, 29 अप्रैल और 9 मई 2025 को पत्र एवं रिमाइंडर भेजे गए। आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने का हवाला देते हुए कंपनी ने 20 मई 2025 को बीमा दावा खारिज कर दिया।
हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के सामने रिकॉर्ड से जुड़ी कई विसंगतियां भी सामने आईं। शिकायतकर्ता के शपथपत्र में दुर्घटना की तारीख 24 दिसंबर 2024 बताई गई, जबकि बीमा कंपनी के रिकॉर्ड में दुर्घटना की तारीख 26 फरवरी 2025 दर्ज थी।
ड्राइविंग लाइसेंस और सर्वे रिपोर्ट की तारीख को लेकर भी पक्षों के बीच विवाद सामने आया। मामले में बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने बाइक का निरीक्षण कर क्षति का आकलन 32,360 रुपये किया था।
ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी आपत्ति
बीमा कंपनी ने कुछ क्षतियों को पुरानी क्षति बताते हुए दावा किया कि उन्हें दुर्घटना के नुकसान में शामिल करने का प्रयास किया गया। कंपनी ने ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी आपत्ति जताई थी।
आयोग ने मामले में एसपी वेंचर्स, रॉयल एनफील्ड के अधिकृत डीलर के खिलाफ सेवा में कमी साबित नहीं होने पर शिकायत खारिज कर दी। आयोग ने माना कि केवल बीमा कंपनी द्वारा मरम्मत खर्च स्वीकृत नहीं किए जाने के आधार पर डीलर को वाहन की मुफ्त मरम्मत करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं मरम्मत खर्च वहन करने की तैयारी का भी ठोस प्रमाण सामने नहीं आया। दूसरी ओर आयोग ने बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ शिकायत को स्वीकार करते हुए उसके स्तर पर सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार स्थापित माना।
आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 32,360 रुपये दावा राशि के अलावा 10,000 रुपये मानसिक प्रताड़ना और 5,000 रुपये मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया।
सी.सी. केस संख्या 29/2025 में संस्थापन 18 जुलाई 2025 को हुआ था। मामले की अंतिम सुनवाई 22 अगस्त 2026 को हुई और आयोग ने फैसला 2 सितंबर 2026 को सुनाया। आदेश में 45 दिनों के भीतर भुगतान का निर्देश दिया गया है। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर दावा राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
