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विकास के दावों ने खोली व्यवस्था की पोल! सिमडेगा में सड़क नहीं होने से चटाई पर अस्पताल पहुंची 14 साल की सुषमा

Published: Wed, 16 Sep 2026 10:26 AM (IST)

सिमडेगा के मड़की टोली में सड़क न होने से ग्रामीणों को एक अचेत किशोरी को चटाई पर ढोकर अस्पताल ले ...और पढ़ें

चटाई के सहारे मरीज को ले जाते ग्रामीण। जागरण

चटाई के सहारे मरीज को ले जाते ग्रामीण। जागरण

HighLights

  1. मड़की टोली में सड़क न होने से मरीज को ढोया।

  2. कृषि मंत्री के समृद्धि के दावों पर उठे सवाल।

संवाद सहयोगी, सिमडेगा। जलडेगा प्रखंड में मंगलवार को कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की किसानों को लाह की खेती के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत बनने और स्थानीय स्तर पर रोजगार की राह दिखा रही थी। इसी प्रखंड की पतिअम्बा पंचायत के मड़की टोली से उसी दिन सामने आई एक तस्वीर ने विकास की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा कर दिया।

पंचायत मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर इस आदिवासी बहुल गांव में 14 वर्षीय सुषमा मड़की के अचानक अचेत होने पर ग्रामीणों को उसे चटाई पर ढोकर खेत की पगडंडी से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा। इसके बाद ऑटो से उसे अस्पताल पहुंचाया गया।

स्वजनों के अनुसार, गणेश पूजा की छुट्टी में मामा के घर से लौटने के बाद सुषमा अचानक गिरकर पीढ़ा से टकरा गई और अचेत हो गई। काफी देर तक होश नहीं आने पर परिजन घबरा गए। ग्रामीणों ने तत्काल मदद की, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस अथवा वाहन पहुंचने की सुविधा नहीं मिल सकी।

ग्रामीणों ने चटाई को ही अस्थायी स्ट्रेचर बनाया और पगडंडी के रास्ते उसे सड़क तक पहुंचाया। हालांकि इलाज के बाद उसकी स्थिति ठीक बताई गई है।

समृद्धि की बात, बुनियादी सुविधाओं का इंतजार

मड़की टोली में करीब 50 परिवार रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पक्की सड़क नहीं है। जलमीनार स्थापित होने के बावजूद चालू नहीं है और आंगनबाड़ी केंद्र भी शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में बीमारी या आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचना चुनौती बन जाता है।

गांव की सलोमी मड़की, सलमोन मड़की, विश्राम मड़की, उर्मिला देवी, अनिल बरजो समेत ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत मुख्यालय के बेहद करीब रहने के बावजूद गांव सड़क, पानी और आंगनबाड़ी जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब विकास और आर्थिक उन्नति की योजनाओं की बात हो रही है। तब उनके गांव तक मरीज को ले जाने के लिए सड़क की जगह पगडंडी और एंबुलेंस की जगह चटाई का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है। उन्होंने जल्द बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। 

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