जासं,सिमडेगा : शहर के श्री महावीर जैन भवन में विराजमान श्रद्धेय डा. पद्मराज स्वामी जी महाराज के सान्निध्य में जैन सभा के संरक्षक रामनारायण रोहिल्ला जी की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर डा.पद्मराज स्वामी जी ने रोहिल्ला जी की विशेषताओं का वर्णन करते हुए बताया कि वे सच्चे सत्संग प्रेमी थे। उन्होंने समाज की एकता और अखंडता में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे अपनी प्रत्येक भूमिका को अत्यंत ईमानदारी से निर्वहन करते रहे। उनके वियोग को समाज की अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि जीवन की सफलता इसमें निहित है कि उसमें किस प्रकार के गुण थे। सद्गुणों से व्यक्ति सदैव जीवंत रहता है। अच्छे लोग हमेशा अपनी अच्छाइयों से याद किए जाते हैं । व्यक्ति चला जाता है कितु उसकी यादें हमेशा बनी रहती हैं। स्वामी जी ने बताया कि रोहिल्ला जी ने तिविहार संथारे के साथ अपना जीवन पूर्ण किया। जैनागमों में व्यक्ति के लिए तीन मनोरथ बताए गए हैं,जिनमें आखरी है ''अन्त समय में संथारा प्राप्त करना ।'' यह उस साधना का नाम है,जिसकी बदौलत हम मृत्यु को ही समाप्त करने में सक्षम हो जाते हैं।

गुरुदेव जी ने रोहिल्ला जी के परिवार की अनेक विशेषताओं का जिक्र करते हुए कामना की कि उनका पूरा परिवार अपने पिता के पदचिन्हों पर चलकर स्वस्थ समाज की संरचना में आगे बढ़े।

मौके पर गुरुमां ने प्रभु भजन के साथ रोहिल्ला जी के संस्मरण भी सुनाए।इस

मौके पर ओम प्रकाश अग्रवाल,प्रेमचंद जैन,प्रधान अशोक जैन, वार्ड पार्षद अशोक जैन, राम प्रताप शर्मा, आनंद जैन आदि ने रोहिल्ला जी की स्मृतियों को साझा करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। जैन सभा की ओर से पूरे समाज ने रोहिल्ला जी के तस्वीर पर धूप और पुष्पांजलि अर्पित करके श्रद्धांजलि दी।मंगलपाठ के साथ सभा का समापन किया गया।

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