संवाद सूत्र, खरसावां : सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 30 जुलाई को सरायकेला-खरसावां जिले में 297.4 मिमी. व 31 जुलाई को 456.2 मिमी. बारिश दर्ज की गई। बारिश से नदियों के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई है। सोना नदी के हाई स्कूल घाट स्थित छोटा पुल पानी में डूब चुका है। खेत भी पानी से लबालब हैं। हालांकि मानसून की बारिश से कृषि संबंधी कार्यो में तेजी आ गई है। किसान ट्रैक्टर व हल-बैल के मध्यम से खेतों की जोताई कर रहे हैं। जुलाई माह में औसत से 10.0 मिमी. कम बारिश दर्ज की गई है। लगातार तीन सप्ताह तक काफी कम बारिश हुई थी, जबकि जुलाई के अंतिम सप्ताह में मूसलाधार बारिश हुई। जुलाई माह में सरायकेला-खरसावां जिला में सामान्य बारिश 284.9 मिमी. है, जबकि वास्तविक बारिश 274.4 मिमी. दर्ज की गई। प्रखंड स्तर पर बारिश का आंकड़ा 31 जुलाई तक

प्रखंड सामान्य बारिश वास्तविक बारिश

सरायकेला 220.2 मिमी. 289.8 मिमी.

खरसावां 307.7 मिमी. 230 मिमी.

कुचाई 308.2 मिमी. 291.2 मिमी.

गम्हरिया 281.0 मिमी. 340.9 मिमी.

राजनगर 221 मिमी. 187.8 मिमी.

चांडिल 357.4 मिमी. 293.8 मिमी.

नीमडीह 298 मिमी. 253.6 मिमी.

ईचागढ़ 142.7 मिमी. 272.8 मिमी.

कुकडू 142.7 मिमी. 299.9 मिमी. मारवाड़ी युवा मंच सरायकेला शाखा ने किया पौधारोपण : मारवाड़ी युवा मंच सरायकेला शाखा की ओर से शनिवार को सरायकेला समेत आसपास के क्षेत्रों में 50 से अधिक फलदार पौधे लगाए गए। मारवाड़ी युवा मंच के अध्यक्ष सुमित चौधरी ने बताया कि जिस हिसाब से वृक्षों की कटाई हो रही है, उस हिसाब से पौधारोपण नहीं किया जा रहा है। एक पौधा को वृक्ष बनने में 10-15 वर्ष लग जाते हैं, जबकि उसे काटने में दो-चार घंटे ही काफी होते हैं। पिछले दिनों कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार के दौरान ऑक्सीजन की कमी भी महसूस की गई। इसलिए सभी ओर पौधारोपण किया जा रहा है। पौधारोपण के लिए फिलहाल मौसम भी अनुकूल है। मौके पर समाजसेवी प्रदीप चौधरी, आनंद अग्रवाल, आशुतोष चौधरी, अनमोल सेकसरिया, सौरभ चौधरी समेत कई उपस्थित थे।

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