संवाद सहयोगी, साहिबगंज : सूबे में साहिबगंज बाढ़ प्रभावित जिला है। प्रत्येक वर्ष बाढ़ आने से जान-माल व फसलों को क्षति होती है। इस बार प्रत्येक वर्ष की अपेक्षा बाढ़ का पानी अगस्त माह में अधिकतम 28.90 सेंटीमीटर तक पहुंच गया था और देर तक पानी जमा रहा। इससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई। बाढ़ के पानी से दियारा क्षेत्र में ईख की फसल बर्बाद हो गई। ईख बेचकर किसानों अपने परिवार को चलाते है, लेकिन फसल सड़ने से किसानों की खुशियों से मिठास गायब हो गया है।

कार्तिक माह में गंगा का जलस्तर खतरा के स्तर को पार कर गया था। इससे दियारा क्षेत्र में कहीं-कहीं ईख की फसल दिखती है। किसान को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। फिर भी किसान अपना हिम्मत जुटाकर खेती करने में जुट चुके हैं। कर्ज लेकर ईख की बुआई कर रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन ने किसी भी प्रकार का संज्ञान इस दिशा में नहीं लिया है।

किसान उमाशंकर यादव ने कहा कि बलुआ दियरा से लेकर नाढी दायरा तक लगभग ढाई सौ एकड़ जमीन पर ईख की खेती होती थी। आज स्थिति यह हो गई है कहीं-कहीं फसल देखने को मिल रहा है। इसका मुख्य वजह यही है कि देर तक पानी खेत में रुका रह गया। खेत की सफाई करके एक बार फिर से एक बोया जा रहा है।

बलुआ दियरा के किसान एखराम मंडल ने कहा कि दियारा क्षेत्र में ईख नहीं होने से इस वर्ष गुड़ ( शक्कर) महंगा हो जाएगा। चीनी की कीमत भी बढ़ जाएगी। यहां से गुड़ साहिबगंज, भागलपुर, कटिहार, अहमदाबाद के मंडी तक ले जाकर बेचते थे। इस फसल से किसान को काफी लाभ पहुंचता था। इस वर्ष बाढ़ अधिक आने से पूरा फसल बर्बाद और सड़ गया।

महादेवगंज वासी गुदड़ यादव ने कहा कि बलुआ दियारा से लेकर नाढी दियरा तक सड़क बना लेकिन सड़क के आर पार पानी पास के लिए बड़ा नाला की व्यवस्था नहीं की गई। जिसके वजह से अभी तक खेतों में पानी जमा हुआ है। जिला प्रशासन को चाहिए दियरा का सर्वे कराकर किसान का मुआवजा दिया जाय ताकि किसान को कुछ राहत मिल सके।

नुकसान का सर्वे का दिया आदेश

जिला कृषि पदाधिकारी पारसनाथ उरांव ने कहा कि मामला संज्ञान में बाया है। मामला सदर प्रखंड के दियारा क्षेत्र का है। जिला अंचल पदाधिकारी को इसको सर्वे कराने का आदेश दिया जा रहा है। सर्वे करने के बाद यह मालूम चल जाएगा कि कितनी एकड़ में ईख की फसल बर्बाद हुई है। किसानों को राहत दी जाएगी।

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