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व्हीलचेयर देखकर छलक उठीं बुजुर्ग सुमी की आंखें, चेहरे पर लौटी मुस्कान; Pathna BDO ने दिखाई मानवीय संवेदना

Published: Sat, 07 Nov 2026 06:53 PM (IST)

Sahibganj News: पतना प्रखंड में बीडीओ कुमार देवेश द्विवेदी ने 69 वर्षीय बुजुर्ग सुमी हेम्ब्रम को व्हीलचेयर भेंट की, जो चलने में असमर्थ थीं।

व्हीलचेयर पर बैठकर मुस्कुरातीं सुमी हेम्ब्रम। (फोटो सौजन्य)

व्हीलचेयर पर बैठकर मुस्कुरातीं सुमी हेम्ब्रम। (फोटो सौजन्य)

HighLights

  1. बीडीओ ने 69 वर्षीय सुमी हेम्ब्रम को व्हीलचेयर प्रदान की।

  2. चलने में असमर्थ सुमी के चेहरे पर खुशी की लहर।

  3. ग्रामीणों ने बीडीओ के मानवीय और संवेदनशील कार्य की सराहना की।

संवाद सहयोगी, पतना (साहिबगंज)। कभी-कभी एक छोटी-सी मदद किसी की जिंदगी में कितनी बड़ी खुशी ला सकती है, इसकी मिसाल शनिवार को झारखंड के साहिबगंज जिले के पतना प्रखंड के केसरो गांव में देखने को मिली।

होम-टू-रोल विजिट अभियान के तहत घर-घर पहुंच रहे बीडीओ कुमार देवेश द्विवेदी की नजर एक ऐसे दृश्य पर पड़ी, जिसने उन्हें तत्काल मदद के लिए प्रेरित कर दिया। एक घर के आंगन में 69 वर्षीय बुजुर्ग महिला सुमी हेम्ब्रम जमीन पर सरकते हुए चूल्हे तक पहुंचने की कोशिश कर रही थीं।

चलने-फिरने में असमर्थ सुमी के पास कोई सहारा नहीं था। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि उनके लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था की जा सके। बुजुर्ग महिला की बेबसी देखकर बीडीओ ने बिना देर किए अपने कर्मी से गाड़ी में रखी व्हीलचेयर मंगवाई और उसे सुमी के सामने रख दिया।

व्हीलचेयर देखते ही उनकी आंखें भर आईं। कांपते हाथों से उन्होंने व्हीलचेयर को थामा और उस पर बैठ गईं। लंबे समय बाद खुद को एक सहारा मिलने की खुशी उनके चेहरे की मुस्कान में साफ झलक रही थी। यह दृश्य देखकर आसपास मौजूद ग्रामीण भी भावुक हो उठे। लोगों ने बीडीओ के इस संवेदनशील प्रयास की सराहना करते हुए उन्हें दुआएं दीं।

बीडीओ ने बताया कि सुमी हेम्ब्रम की उम्र 69 वर्ष है और उन्हें पहले से पेंशन मिल रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, सुमी के एक बेटा और तीन बेटियां हैं। पति का निधन हो चुका है।

बेटे के अत्यधिक नशे की लत के कारण बहू भी घर छोड़कर जा चुकी है। ऐसे में चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद सुमी को अपने खाने का इंतजाम खुद करना पड़ता है।

इस मौके पर बीडीओ कुमार देवेश द्विवेदी ने कहा कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उनका लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। फाइलों में बंद कागज किसी का दर्द कम नहीं कर सकते।

जरूरतमंदों की पहचान कर उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराना ही प्रशासन की असली जिम्मेदारी है। इस दौरान पंचायत सचिव बिरजू तांती, महिला सुपरवाइजर रश्मि प्रियवंदा, फुलकुमारी और सेविका मौजूद थीं।

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